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लव, सेक्स, धोखा और रेप की घिसीपिटी कहानी को कोर्ट ने किया खारिज

बलात्कार के आरोपी को अपर जिला एवं सेशन जज पंकज तोमर की कोर्ट ने किया दोषमुक्त, रेप को कहानी को बताया झूठा, कहा कोई बार-बार कैसे जबरन शारीरिक संबंध बना सकता है

Amit Bhatt, Dehradun: लव, सेक्स, धोखा और रेप की घिसीपिटी कहानियां अब कोर्ट रूम में खारिज होने लगी हैं। ऐसे ही एक मामले में देहरादून के अपर जिला एवं सेशन जज पंकज तोमर की कोर्ट ने बलात्कार (रेप) के आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया। साथ ही अपने आदेश में कहा कि कोई कैसे बार-बार जबरन शारीरिक संबंध बना सकता है। साथ ही स्पष्ट किया कि बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती और आरोपी युवक के बीच प्रेम प्रसंग थे, दोनों की मर्जी से शारीरिक संबंध कायम किए गए और जब यह प्यार परवान नहीं चढ़ा तो बलात्कार का मुकदमा दर्ज करा दिया गया। क्योंकि, युवती की उम्र और शिक्षा इतनी है कि वह अपना भला-बुरा समझ सकती है।

अपर जिला एवं सेशन जज पंकज तोमर के आदेश के मुताबिक देहरादून में ऑटोमोबाइल प्रतिष्ठान में काम करने वाली एक युवती के प्रतिष्ठान में ईसी रोड निवासी विशाल सिंघल अपनी बाइक की सर्विसिंग के लिए आता था। उसी दौरान अप्रैल 2018 के आसपास दोनों के बीच दोस्ती हो गई। एक रोज विशाल युवती के कमरे में आता है और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनता है। युवती इसका विरोध करती है और चीखती-चिल्लाती है। जिस पर आरोपी युवक विशाल सिंघल उससे प्यार करने और शादी का वादा करता है। वह युवती को अपनी मां और बहन से मिलवाने अपने घर भी लेता है। इस शादी पर ऐतराज करने के बाद युवक की मां और बहन राजी हो जाते हैं।

इसके बाद युवक कई बार शारीरिक संबंध बनता है और दोनों घूमने भी जाते हैं। हालांकि, कुछ समय बाद ही युवक के परिजन और स्वयं युवक शादी की बात से मुकर जाते हैं। युवती को धमकी भी दी जाती है और युवक कहता है कि उसे जितना इस्तेमाल करना था कर लिया। इसके बाद युवती 20 अगस्त 2018 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) देहरादून के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करती है और विशाल सिंघल पर बलात्कार का आरोप लगाती है। जिसमें कहा गया कि विशाल ने शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए हैं। युवक पर मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भी भेज दिया जाता है।

इसी क्रम में पुलिस की ओर से मुकदमे में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई। वाद सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सेशन जज पंकज तोमर को कोर्ट में भेजा गया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अमित तोमर और अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार ने पैरवी की। इस दौरान कोर्ट के समक्ष पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट, उनकी सहेली के बयान और पीड़िता के सीआरपीसी की धारा-164 के बयान आदि साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने सभी पक्षों के साक्ष्य, बयानों और तर्कों पर गौर किया।

कोर्ट ने पाया कि मुख्य परीक्षा के समय युवती की उम्र 30 साल है, जबकि विवेचक को उम्र 26 वर्ष बताई गई है। साथ ही युवती के जिस कमरे में पहली बार जबरन शारीरिक संबंध बनाने, चीखने-चिल्लाने की बात कही गई है, वह किराए का कमरा है और उससे सटे अन्य कमरों में दूसरे किराएदार भी रहते हैं। यह कैसे हो सकता है कि जोर-जबरदस्ती के समय किसी ने भी उसकी आवाज नहीं सुनी। सिर्फ यही नहीं, इस घटना के बाद क्यों पीड़िता बार-बार युवक से मिलती रही। इस अवधि में भी दोनों के बीच शारीरिक संबंध कायम होते रहे हैं।

कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि पीड़िता 20 अप्रैल 2020 को आरोपी विशाल सिंघल के विरुद्ध रेप की शिकायत दर्ज कराती है, जबकि इसी क्रम में आरोपी को जेल भेज दिया जाता है और उसके जमानत पर बाहर आने की स्थिति में वह 20 जनवरी 2020 को आरोपी युवक से मुलाकात करती है। उसके साथ घूमने जाती है और दोनों साथ में युवती के जन्मदिन का केक काटते हैं। लिहाजा, बात सिर्फ यह है कि दोनों के बीच रजामंदी के संबंध थे और बाद में किसी कारण विवाह की बात आगे न बढ़ पाने के कारण झूठी शिकायत दर्ज करा दी जाती है।

निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि युवती के शिकायत दर्ज कराने से तीन दिन पहले युवक ने एसएसपी को एक प्रार्थना पत्र देकर आशंका व्यक्त की थी कि युवती उसे झूठे केस में फंसा सकती है। युवती की जन्मतिथि 12 अक्टूबर 1988 पाई गई और वह एमए पास है। ऐसे में कोर्ट ने कहा कि युवती अपना भला-बुरा समझने में सक्षम है। पीड़िता की उम्र आरोपी से सात-आठ वर्ष अधिक है। ऐसे में संभव है कि आरोपी के परिजनों ने शादी पर ऐतराज किया हो। लेकिन, इसका आशय यह नहीं है कि युवक ने उसे झांसे में रखकर शारीरिक संबंध बनाए।

इसी आधार पर कोर्ट ने युवक को दोषमुक्त करार दे दिया। आरोपी अभी जमानत पर है और इसका बंधपत्र निरस्त कर दिया गया है। उसके जमानतियों को भी जमानत के दायित्व से मुक्त कर दिया गया। इस निर्णय की एक प्रति जिलाधिकारी देहरादून को भी भेजी गई है। इस तरह के विभिन्न मामलों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी अहम निर्णय दिए जा चुके हैं। अपर जिला एवं सेशन जज पंकज तोमर की कोर्ट ने भी उच्च स्तर के न्यायलयों की टिप्पणी का जिक्र अपने आदेश में किया।

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