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जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण मामले में हाई कोर्ट तल्ख, एसएसपी से तीखे सवाल, डीएम से भी मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में की गई सुनवाई, कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान, चप्पे-चप्पे पर पुलिस रही तैनात

Amit Bhatt, Uttarakhand: उत्तराखंड के जिला नैनीताल में जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से एन वक्त पहले कांग्रेस के 05 सदस्यों के गायब होने, उनका अपहरण किए जाने का आरोप लगने, पुलिस की मौजूदगी में गोली चल जाने और भारी हंगामे की स्थिति सामने आ चुकी है। यहां तक कि चुनाव की सुचिता पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए हिस्ट्रीशीटर की उपस्थिति तक की बातें सामने आई हैं। इस पूरे प्रकरण में नैनीताल हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और सोमवार को सुनवाई की।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में की गई सुनवाई में पुलिस की लापरवाही व खुफिया एजेंसियों की विफलता को लेकर खंडपीठ ने मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणीयां की और एसएसपी से पूरे मामले में मंगलवार को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एसएसपी से तीखे भी सवाल पूछे। पूछा गया कि कड़ी सुरक्षा के बीच हिस्ट्रीशीटर कैसे पहुंच गए। सुनवाई से पहले सुरक्षित व्यवस्था के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात करने के साथ ही कोर्ट परिसर से 500 मीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हल्द्वानी विधायक सुमित ह्रदयेश व नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का आगबबूला होकर आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग करने, जबकि कांग्रेस की ओर से अपहरण के बाद युवकों का पार्टी करते वीडियो पेश किया गया, जिसमें युवक कह रहे थे कि नैनीताल को हिला डाला। हमारा मिशन पूरा हो गया और उत्तराखंड को बिहार बना दिया। कोर्ट ने गायब सदस्यों के मामले में भी एसएसपी से जवाब मांगा और पूछा कि सीडीआर क्यों अब तक नहीं निकाली गई। जब गिरोह आया था तो उसकी भनक क्यों नहीं लगी? अपहृत जिला पंचायत के पांचों सदस्यों को भी कोर्ट में पेश किया गया। हालांकि, उनसे कोर्ट ने कोई सवाल नहीं पूछे।

कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवीदत्त कामथ ने वर्चुअली बहस करते हुए कहा कि चुनाव में धनबल, बाहुबल का खुलेआम प्रयोग कर कानून की धज्जियां उड़ाई गई। जिलाधिकारी वंदना की ओर से बताया गया कि रात में ही राज्य निर्वाचन आयोग को 02 रिमाइंडर भेजे गए। चूंकि, जिला पंचायत नियमावली में जिला निर्वाचन अधिकारी को चुनाव रद्द करने की शक्ति नहीं है, इसलिए आयोग से परामर्श के बाद मतगणना कर अनंतिम परिणाम घोषित किया गया। फिलहाल घोषणा भी रोकी गई है।

अब जिला पंचायत अध्यक्ष उपाध्यक्ष का चुनाव परिणाम घोषित होगा या नहीं, इसको लेकर आयोग की ओर से कानूनी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। कोर्ट ने जिलाधिकारी को भी शपथपत्र पेश करने को कहा है। अब इस मामले में अदालत के लिखित व आधिकारिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, सुनवाई अब मंगलवार को होगी। कांग्रेस ने कोर्ट में चुनाव रद्द करने की याचिका भी दायर की है। इस पर भी मंगलवार को सुनवाई की जाएगी।

भाजपा नेताओं पर मुकदमा होते ही सामने आए गायब जिला पंचायत सदस्य
नैनीताल के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान कांग्रेस ने भाजपा नेताओं पर तलवारों और पिस्टलों के दम पर कांग्रेस जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण करने का आरोप लगाया था। आरोपों के अनुसार ये सभी सदस्य कांग्रेस के दूसरे चुने हुए सदस्यों के साथ वोटिंग के लिए बस में जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, भाजपा प्रत्याशी के पति आनंद दर्मवाल समेत 11 नामजद और 15 से 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने यह कार्रवाई जिपं अध्यक्ष प्रत्याशी पुष्पा नेगी, सदस्य जीशांत कुमार और 02 अन्य सदस्यों के परिजनों की तहरीर पर एक्शन लेते हुए की।

नैनीताल में अपहरण कांड के बाद वीडियो के जरिए एकसाथ सामने आए थे कांग्रेस के जिला पंचायत सदस्य।

इसके तुरंत बाद नया मोड़ आ गया और लापता हुए पांचों जिला पंचायत सदस्यों ने एक वीडियो जारी कर स्वेच्छा से मतदान से किनारा करने की बात कही। वीडियो में सदस्यों ने कहा कि हमारा अपहरण नहीं हुआ, बल्कि हम अपनी मर्जी से गए थे। नाटकीय घटनाक्रम में जिला पंचायत सदस्य डिकर सिंह मेवाड़ी पहले अपना और फिर एक-एक करके अन्य सभी जिला पंचायत सदस्यों का परिचय देते हुए कहते हैं, ‘हम अपनी मर्जी से, स्वयं की इच्छा से घूमने निकले हैं। लेकिन हमने सोशल मीडिया और अन्य जगहों पर हमने देखा तो कि कहीं ना कहीं हमारे अपहरण की अफवाहें उड़ाई जा रही हैं, जो कहीं ना कहीं निंदनीय है और हम इसकी घोर निंदा करते हैं।

इससे एक दिन पहले गुरुवार को हुए इस चुनाव के दौरान पुलिस की मौजूदगी में मतदान स्थल से कुछ ही दूरी पर कांग्रेस सदस्यों डिकर सिंह मेवाड़ी, प्रमोद सिंह, तरुण कुमार शर्मा, दीप सिंह बिष्ट और विपिन सिंह को कुछ लोगों ने जबरन उठा लिया था। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर खुलेआम गुंडागर्दी करते हुए अपहरण करने का आरोप लगाया था। घटना के बाद कांग्रेस ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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