Uttarakhand

कॉर्बेट बाघ शिकार प्रकरण: केंद्र सरकार समेत राज्य के पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सामाजिक कार्यकर्ता अतुल सती की याचिका पर हुई सुनवाई, कई अधिकारियों की उड़ी हवाइयां

Rajkumar Dhiman, Dehradun: सात साल पुराने बहुचर्चित बाघ शिकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सीबीआई जांच पर लगी रोक हटाने की मांग पर केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार और राज्य के पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डी.एस. खाती को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश पर्यावरण कार्यकर्ता अतुल सती द्वारा दायर आवेदन पर सुनवाई के दौरान दिया।

अतुल सती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने दलील दी कि जिस अधिकारी पर बाघ के शिकार में संलिप्तता के गंभीर आरोप लगे थे, वही अधिकारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर सीबीआई जांच पर रोक लगाने में सफल रहा और इस प्रक्रिया में अदालत को गुमराह किया। उन्होंने सीबीआई द्वारा पूर्व में दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि एजेंसी ने स्पष्ट रूप से वन अधिकारियों और शिकारी गिरोह के बीच मिलीभगत का उल्लेख किया था, साथ ही सबूतों से छेड़छाड़ की संभावनाओं की ओर भी इशारा किया था। ऐसे में रोक का जारी रहना न्याय के विपरीत है और स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

पूर्व मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक खाती की ओर से पेश वकील ने कहा कि मामला वर्षों बाद उठाया गया है, इसलिए गंभीर आरोपों पर जवाब देने के लिए उन्हें पर्याप्त समय दिया जाए।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने केंद्र, राज्य सरकार और खाती को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 12 दिसंबर को सूचीबद्ध की है।

इस आदेश के बाद बाघ शिकार मामले में लंबित सीबीआई जांच के फिर से शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button