80 हजार करोड़ के कर्ज में डूबे उत्तराखंड में मंत्रियों के यात्रा भत्ते बढ़े, अब 90 हजार प्रतिमाह
60 हजार रुपए से बढ़कर 90 हजार पहुंचा भत्तों का ग्राफ

Round The Watch News: एक ओर वित्त विशेषज्ञ बार-बार प्रदेश की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताते हुए वित्तीय अनुशासन कड़े करने की सलाह दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के मंत्रियों के भत्ते लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा आदेश में सरकार ने मंत्रियों को मिलने वाले यात्रा व्यय की मासिक अधिकतम सीमा 60 हजार रुपये से बढ़ाकर 90 हजार रुपये कर दी है।
यह संशोधन 29 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। आदेश उत्तराखंड शासन के मंत्री परिषद अनुभाग द्वारा जारी किया गया है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश मंत्री (यात्रा भत्ता) नियमावली 1997 में संशोधन किया गया है।
दूसरी ओर हकीकत यह है कि उत्तराखंड का कर्ज बीते 25 वर्षों में विस्फोटक तरीके से बढ़कर 4500 करोड़ से सीधे 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। प्रदेश हर महीने ब्याज भरने में ही करोड़ों रुपये खर्च करता है। ऐसे में मंत्रियों के भत्तों में की गई बढ़ोतरी ने राजनीतिक और सार्वजनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
नई व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उप मंत्री अब प्रदेश के भीतर की आधिकारिक यात्राओं पर 90 हजार रुपये प्रतिमाह तक का पूर्ण व्यय प्राप्त कर सकेंगे। पहले यह सीमा 60 हजार रुपये थी। यानी भत्ते में सीधे 30 हजार रुपये की वृद्धि की गई है।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने जनप्रतिनिधियों के मानदेय और भत्तों में बढ़ोतरी की हो। अगस्त 2024 में विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक के बाद विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाकर करीब चार लाख रुपये प्रतिमाह कर दिए गए थे। वर्ष 2023 में दायित्वधारियों के मानदेय में भी लगभग 45 हजार रुपये की वृद्धि की गई थी। 2025 में पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का निर्णय लिया गया था।
वित्तीय जानकारों का मानना है कि लगातार बढ़ते कर्ज के बीच जनप्रतिनिधियों पर खर्च बढ़ाना राज्य की आर्थिक सेहत के लिए चिंताजनक है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि सरकार “आर्थिक तंगी” का हवाला सिर्फ जनता को कटौती के फैसले समझाने के लिए देती है, जबकि नेताओं के भत्तों पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही।
प्रदेश की जनता भी यह सवाल पूछ रही है कि जब पहाड़ों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों पर हर साल बजट की कमी बताई जाती है, तब मंत्रियों के भत्ते बढ़ाने की इतनी जल्दी क्यों?



