
Rajkumar Dhiman, Dehradun: शिक्षकों के लिए आगे कुआं और पीछे खाई वाली स्थिति पैदा हो गई है। जिन शिक्षकों को बीएलओ बनाया गया है, उन पर एसआईआर कार्यक्रम को रिकॉर्ड समय पर पूरा करने का दारोमदार है। देहरादून में राजकीय प्राथमिक विद्यालय अमृतकौर रोड के हेड मास्टर अरविंद राणा को भी बीएलओ बनाया गया है। वह धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र (भाग 193) में यह कार्य कर रहे हैं, लेकिन रायपुर की उप शिक्षा अधिकारी (डिप्टी ईओ) हेमलता गौड़ की निगाह में वह स्कूल से नदारद हैं। उन पर बीएलओ ड्यूटी में भी शिथिलता बरतने का आरोप मढ़ दिया गया। साथ ही डिप्टी ईओ ने आदेश जारी किया कि असंतोषजनक कार्य के लिए हेड मास्टर अरविंद राणा का जनवरी माह का वेतन रोक दिया जाता है।
यह वेतन तब तक बाधित रहेगा, जब तक कि वह कार्य में संतोषजनक प्रगति हासिल नहीं कर लेते। इस आदेश से व्यथित अरविंद राणा इस समय काटो तो खून नहीं वाली स्थिति से गुजर रहे हैं। वह तो शुक्र है कि जिस निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी/संयुक्त सचिव के अधीन वह बीएलओ ड्यूटी कर रहे थे, वह बचाव में खड़े हो गए।
एमडीडीए के संयुक्त सचिव गौरव चटवाल ने अरविंद राणा पर की गई कार्रवाई को गंभीरता से लिया। उन्होंने उप शिक्षा अधिकारी को कड़ा पत्र लिखा। जिसमें कहा गया कि हेड मास्टर अरविंद राणा नियुक्ति की तिथि से वर्तमान तक बीएलओ का दायित्व उत्कृष्ट ढंग से निभा रहे हैं। जिसकी पुष्टि मैपिंग रिपोर्ट से प्रतिदिन की जा रही है।
संयुक्त सचिव ने यह भी कहा कि सभी बीएलओ की नियुक्ति निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। जिस कारण संबंधित कार्मिकों का वेतन कार्यालय में उपस्थित न होने की दशा में रोकना निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अनदेखी है। लिहाजा, प्रधानाध्यापक अरविंद राणा का वेतन न रोका जाए।



