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यमुना को निगल रहा सड़क चौड़ीकरण का मलबा, नैनबाग के नेन गांव में विकास या विनाश?

मानसून सीजन में तबाही ला सकता है मलबा, नदियां क्यों बन रही डंपिंग यार्ड

Onkar Bahuguna, Uttarkashi: नैनबाग क्षेत्र के नेन गांव के पास चल रहा सड़क चौड़ीकरण कार्य अब विकास से ज़्यादा विनाश का प्रतीक बनता जा रहा है। पहाड़ी की अनियंत्रित कटिंग, नियमों की खुली अनदेखी और निर्माण एजेंसी की मनमानी ने पूरे इलाके को खतरे के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

सबसे गंभीर मामला यह है कि सड़क कटिंग से निकला हज़ारों टन मलबा सीधे यमुना नदी में उड़ेला जा रहा है। आज भले ही यमुना का जलप्रवाह कम है, लेकिन आने वाला वर्षा काल इस लापरवाही को महाविनाश में बदल सकता है। जब जलस्तर बढ़ेगा, यही मलबा जलप्रवाह वाले क्षेत्रों के लिए तबाही का सबब बन सकता है। ऐसे में बाढ़, कटाव और पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ेगा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियमों के बिना अनियंत्रित सड़क कटिंग की जा रही है। मलबा वैज्ञानिक निस्तारण की जगह नदी में फेंका जा रहा है। घंटों तक जाम लगाकर वाहनों को रोका जा रहा है और सवाल पूछने पर निर्माण कर्मियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है।

प्रख्यात पर्यावरणविद सुरेश भाई पहले ही इसे यमुना के अस्तित्व के लिए घातक बता चुके हैं। वहीं, स्थानीय निवासी संदीप राणा ने साफ कहा है कि नैनबाग के पास सड़क कटिंग के नाम पर जनता को बेवजह परेशान किया जा रहा है और विरोध करने पर बदसलूकी की जाती है।

अधिशासी अभियंता मनोज रावत का बयान जरूर आया है कि निर्माण एजेंसी से जवाब तलब किया जाएगा और अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई होगी। लेकिन, गंभीर सवाल जो प्रशासन से जवाब मांगते हैं, वह यह हैं कि जब पर्यावरणीय नियम स्पष्ट हैं, तो यमुना में मलबा डालने की अनुमति किसने दी? क्या सड़क चौड़ीकरण के लिए कोई पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA) कराया गया?

अगर वर्षा काल में तबाही हुई तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा, एजेंसी या प्रशासन? आम जनता के साथ दुर्व्यवहार करने वालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या यह सड़क चौड़ीकरण है या नदी हत्या परियोजना?

हकीकत साफ है, आज जो मलबा “कम पानी” के कारण सामान्य दिख रहा है, वही कल उफनती यमुना के साथ तबाही बनकर बहेगा। यह सिर्फ पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

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