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सिगरेट की बिक्री बाद में और बिल पहले, जीएसटी चोरी का नया खेल बेनकाब

देहरादून में बैक डेटिंग का बड़ा खुलासा, 4.04 करोड़ जमा कराए

Rajkumar Dhiman, Dehradun: तंबाकू और सिगरेट कारोबार में जीएसटी चोरी का एक नया तरीका राज्य कर विभाग की जांच में सामने आया है। विभाग ने खुलासा किया है कि कुछ कारोबारियों ने 1 फरवरी 2026 के बाद बेची गई सिगरेटों के बिल जनवरी 2026 की तारीख में जारी कर दिए, ताकि बदले हुए कर ढांचे का लाभ उठाकर सरकारी राजस्व को चूना लगाया जा सके। इस ‘बैक डेटिंग’ के खेल का खुलासा होने के बाद विभाग ने संबंधित कारोबारियों के अभिलेख जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इसी कार्रवाई के दौरान देहरादून संभाग से अकेले 4.04 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा कराए गए।

प्रतीक जैन, आयुक्त राज्य कर, उत्तराखंड।

राज्य कर विभाग को लंबे समय से सिगरेट, गुटखा, खैनी, पान मसाला, तंबाकू, बीड़ी, इंपोर्टेड और फ्लेवर्ड सिगरेट के कारोबार में कर चोरी की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाया गया। अभियान से पहले 15 दिनों तक खुफिया सूचनाएं और कारोबारी गतिविधियों की जांच की गई। संयुक्त आयुक्त (वि. अनु. शा./प्रवर्तन) अजय कुमार के नेतृत्व में प्रदेशभर से सूचनाएं जुटाकर कार्रवाई की रणनीति तैयार की गई।

देहरादून संभाग में उपायुक्त (वि.अनु.शा./प्रवर्तन) सुरेश कुमार की निगरानी में 17 टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने 23 जुलाई 2026 को देहरादून, ऋषिकेश और विकासनगर में तंबाकू उत्पादों के व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान स्टॉक, खरीद-बिक्री, कर भुगतान और अन्य अभिलेखों का गहन परीक्षण किया गया। मौके पर ही कारोबारियों से 4.04 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जबकि कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड विभाग ने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी।

ऐसे पकड़ा गया बैक डेटिंग का खेल
जांच में सामने आया कि सिगरेट पर सेस समाप्त होने और कर की दर 40 प्रतिशत लागू होने के बाद भी कुछ व्यापारियों ने अधिक कर से बचने के लिए बिलों में हेराफेरी की। विभाग के अनुसार, 1 फरवरी 2026 के बाद हुई बिक्री के इनवॉइस जनवरी 2026 की तारीख में जारी किए गए, जिससे ऐसा दिखाया जा सके कि बिक्री पुराने कर ढांचे के दौरान हुई थी। राज्य कर विभाग इसे सुनियोजित कर अपवंचन का तरीका मान रहा है और इससे जुड़े सभी अभिलेखों का फोरेंसिक परीक्षण किया जाएगा।

बैक डेटिंग के अलावा जांच में स्टॉक में भारी अंतर, अपंजीकृत और अस्तित्वहीन व्यापारियों से खरीद-बिक्री दर्शाना, प्रदेश से बाहर बिक्री दिखाना तथा अघोषित व्यापारिक स्थलों से कारोबार करने जैसे कई गंभीर मामले भी सामने आए हैं। इन सभी मामलों में दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

कार्रवाई में राज्य कर विभाग के उपायुक्त अवधेश कुमार पाण्डेय, योगेश मिश्रा, गुलरेज़ रज़वी, विजय कुमार, सहायक आयुक्त चंचल चौहान, कृष्ण कुमार, अलीशा बिष्ट, कंचन थापा, टीकाराम चन्याल, अवनीश पाण्डेय, के.के. पाण्डेय, दीपक सेमवाल, अनंत रजनीश, वंदना नौटियाल, पूनम राजपूत, श्यामदत्त शर्मा, रजनीकांत शाही और अविनाश झा सहित कुल 50 अधिकारियों ने भाग लिया।

गौरतलब है कि 23 जुलाई को राज्य कर विभाग ने पूरे उत्तराखंड में तंबाकू कारोबारियों के 32 प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की थी। पहले ही दिन प्रदेशभर से 8.50 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जिनमें देहरादून संभाग की हिस्सेदारी सबसे अधिक 4.04 करोड़ रुपये रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कर अपवंचन के खिलाफ सख्त नीति के तहत चल रहे इस अभियान में विभाग ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है और दोषी पाए जाने वाले कारोबारियों से कर, ब्याज और जुर्माना नियमानुसार वसूला जाएगा। आयुक्त प्रतीक जैन ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं के कारोबार पर विशेष निगरानी आगे भी जारी रहेगी और कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई लगातार की जाएगी।

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