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जंतर-मंतर पर वर्दी में पहुंचे कांस्टेबल का गैंगस्टर कनेक्शन, जा चुका जेल और बर्खास्तगी की कार्रवाई भी जारी

कांस्टेबल शेर सिंह 20 जुलाई से चल रहा है निलंबित, पूर्व के मामले में बेल पर है

Rajkumar Dhiman, Dehradun: दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड पुलिस की वर्दी पहनकर पहुंचे निलंबित कांस्टेबल शेर सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस मुख्यालय ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। अब इस मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। शेर सिंह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ जिले से अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहा था। इसके बाद एसपी पिथौरागढ़ ने उसे नोटिस जारी किया और 20 जुलाई 2026 को निलंबित कर दिया। विभागीय स्तर पर उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई भी प्रचलित है।

मंच से बोला- ‘कॉकरोचों की रक्षा करने आया हूं’, नौकरी छोड़ने का किया एलान
वायरल वीडियो में शेर सिंह उत्तराखंड पुलिस की वर्दी में मंच से कहता दिखाई दे रहा है, “जब देश ही नहीं बचेगा तो इस नौकरी का क्या करूंगा? उत्तराखंड पुलिस की नौकरी छोड़कर कॉकरोचों की रक्षा करने आया हूं।” उसने शहीद-ए-आजम भगत सिंह का हवाला देते हुए कहा, “जिंदगी अपने दम पर जी जाती है, दूसरों के कंधों पर जनाजे जाते हैं।” इसके बाद उसने मंच से सार्वजनिक रूप से नौकरी छोड़ने का एलान करते हुए कहा, “यदि अपने हक के लिए आवाज उठाना बागी होना है, तो हम बागी हैं।” उसके इन बयानों का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हरिद्वार का रहने वाला, पहले भी गैंगस्टर कनेक्शन में हो चुकी है गिरफ्तारी
आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती के अनुसार, शेर सिंह हरिद्वार जिले के जटबहादरपुर गांव का निवासी है। वह पहले भी गंभीर आरोपों में घिर चुका है। सितंबर 2025 में उत्तराखंड एसटीएफ ने उसे और कांस्टेबल हसन जैदी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों पर उत्तराखंड के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह से मिलीभगत कर पीड़ित पक्ष को धमकाने और विवादित संपत्ति बेचने का दबाव बनाने का आरोप था।

एसटीएफ की जांच में दोनों पुलिसकर्मियों के प्रवीण वाल्मीकि और उसके भतीजे मनीष बॉलर के गिरोह से संबंध सामने आए थे। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। फिलहाल शेर सिंह उस मामले में जमानत पर बाहर है।

प्रवीण वाल्मीकि गैंग की जांच में आया था नाम
वर्ष 2025 में एसटीएफ ने गोपनीय सूचनाओं के आधार पर रुड़की के पार्षद मनीष बॉलर, पंकज अष्टवाल सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। मनीष बॉलर गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि का भतीजा है। पुलिस ने 27 अगस्त 2025 को मनीष बॉलर और पंकज जायसवाल को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान कांस्टेबल शेर सिंह और हसन जैदी के नाम भी सामने आए। एसटीएफ जांच में दोनों के गैंग से जुड़े होने के साक्ष्य मिलने के बाद कार्रवाई की गई थी।

गिरफ्तारी के बाद हुआ था पिथौरागढ़ तबादला
एसटीएफ कार्रवाई के बाद शेर सिंह का तबादला कुमाऊं रेंज के पिथौरागढ़ जिले में किया गया था। वहीं से वह 28 जून 2026 से बिना अनुमति अनुपस्थित चल रहा था। विभाग ने पहले नोटिस जारी किया और बाद में 20 जुलाई 2026 को निलंबित कर दिया। अब जंतर-मंतर पर पुलिस की वर्दी पहनकर धरना-प्रदर्शन में शामिल होने और मंच से दिए गए बयानों के बाद पुलिस मुख्यालय पूरे मामले की जांच कर रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, शेर सिंह के विरुद्ध विभागीय बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी जारी है।

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