
Rajkumar Dhiman, Dehradun: प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड ने चिकित्सकों की लंबित मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर मांगों का समाधान नहीं किया गया तो चिकित्सक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर और महासचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर ने स्वास्थ्य मंत्री को भेजे पत्र में 11 मांगें उठाई हैं।
संघ के अनुसार स्थानांतरण के बाद चिकित्सकों में अंतर-विष्लेषण की स्थिति पैदा हो रही है। संघ ने स्थानांतरण आदेशों में किए गए संशोधनों को पूरी तरह लागू करने, बीमार चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानांतरित न करने और युगल दंपती चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित न करने की मांग की है।
एसडीएसीपी का लाभ देने की मांग
संघ ने लंबे समय से लंबित SDACP (Special Dynamic Assured Career Progression) का लाभ चिकित्सकों को देने की मांग की है। पत्र के अनुसार लाभ वर्ष में दो बार बैठक कर अनिवार्य सेवा अवधि पूरी कर चुके चिकित्सकों को दिया जाना था, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल रहा है। संघ ने ढाई साल से अधिक समय से लंबित प्रक्रिया को पूरा करने और पूर्व में छूटे लाभ को भी देने की मांग की है।
डीपीसी हर वर्ष कराने पर जोर
संघ ने रिक्त पदों के सापेक्ष हर वर्ष डीपीसी कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि विभाग में वर्षों तक रिक्त पद होने के बावजूद डीपीसी नहीं हो रही है। लंबित डीपीसी तत्काल कराकर उचित कार्यवाही के आदेश जारी करने की मांग की गई है, ताकि लंबे समय से रिक्त पदों पर डीपीसी हो सके।
तीन जिला मुख्यालय और मसूरी को फिर दुर्गम घोषित करने की मांग
अल्मोड़ा जिला मुख्यालय, टिहरी जिला मुख्यालय, नैनीताल जिला मुख्यालय और मसूरी नगर क्षेत्र को दुर्गम से सुगम किए जाने का विरोध संघ ने किया है। संघ का कहना है कि पूर्व में ये चारों स्थान दुर्गम थे। इसलिए इन्हें स्थानांतरण समेत अन्य लाभों के लिए फिर दुर्गम घोषित किया जाए।
इसके अलावा पदों में यथोचित वृद्धि करते हुए एमओ, एमओ-1, एसएमओ, जेडी, एडी और डायरेक्टर के पदों पर विभागीय आवश्यकता के अनुसार वृद्धि की मांग की गई है।
जिला चिकित्सालय स्थानांतरण का विरोध
संघ ने जिला चिकित्सालय को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का भी विरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्ष 2013 से अलग-अलग प्रशासनिक सेवाएं हैं। मुख्यालय में जिला चिकित्सालय नहीं होने की स्थिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पोस्टमार्टम, वीआईपी ड्यूटी और मेडिकल बोर्ड के गठन जैसी जिम्मेदारियों में असुविधा होगी तथा प्रशासनिक टकराव की संभावना बढ़ेगी।
सुरक्षा से लेकर आवास तक की मांग
संघ ने सभी स्थानीय और राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की है। चिकित्सकों के लिए सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, संयुक्त चिकित्सालयों और जिला चिकित्सालयों में स्वीकृत पदों के अनुरूप आवास निर्माण की मांग भी उठाई गई है। संघ ने कहा कि आवासीय परिसर न होने से चिकित्सकों को उचित समय पर आकस्मिक सेवाओं में उपलब्ध कराने में दिक्कत आती है।
उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों में पीएचएमएस के अभ्यर्थियों के लिए सीट आरक्षित करने, सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों की तैनाती पर्वतीय क्षेत्रों में करने और सेवा अवधि में स्नातकोत्तर के बाद दंत रोग विशेषज्ञों को पीजी भत्ता देने की मांग भी पत्र में शामिल है।
संघ ने बताया कि इन मांगों के संबंध में पूर्व में भी पत्र भेजे गए थे। पत्र में पत्रांक 25/26 दिनांक 6 अप्रैल 2026 और पत्रांक 36/26 दिनांक 27 जून 2026 का उल्लेख किया गया है। संघ का कहना है कि अब तक मांगों पर पूर्ण कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में रोष है। संघ ने स्पष्ट किया है कि 15 दिन के भीतर मांगें पूरी नहीं हुईं तो संगठन आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
ज्ञापन भेजने वालों में संरक्षक डॉ. सुनीता टम्टा, संयोजक डॉ. नरेश सिंह नपलच्याल, उपाध्यक्ष (मुख्यालय) डॉ. सौरभ सिंह, उपाध्यक्ष (क्षेत्र) डॉ. लोकेश सलूजा, उपाध्यक्ष (महिला) डॉ. गरिमा भट्ट, उपाध्यक्ष (दंत) डॉ. उपेंद्र सिंह पंवार, कोषाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, अतिरिक्त महासचिव गढ़वाल डॉ. मनीष कुमार, अतिरिक्त महासचिव कुमाऊं डॉ. दीपक शर्मा, प्रभारी तकनीकी सेल डॉ. सुरभि नारायणी अवस्थी, संपादक डॉ. राशि रंजन कुकरेती, मीडिया प्रभारी डॉ. रचित गर्ग तथा संयुक्त सचिव डॉ. कुलदीप यादव, डॉ. मोनिका राणा, डॉ. कुलदीप मर्तोलिया और डॉ. नितिन मलिक शामिल रहे।



