
Rajkumar Dhiman, Dehradun: दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नवजात की पहचान को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। एक परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रसव के बाद उन्हें बेटे के बजाय बेटी सौंप दी गई। परिवार का दावा है कि अस्पताल से मिले दस्तावेज में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज है, जबकि उन्हें जो नवजात दिया गया वह लड़की है। मामला सामने आने के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से ऑपरेशन थिएटर से लेकर नवजात सौंपे जाने तक की CCTV फुटेज की जांच कराने के साथ ही बच्चे की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए DNA परीक्षण कराने की मांग की है।
मामले की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल तक पहुंचने के बाद उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को जांच के निर्देश दिए हैं। फिलहाल जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला दस्तावेजी त्रुटि का है, अस्पताल स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई है या परिजनों का नवजात बदलने का आरोप सही है।
22 अगस्त को प्रसव के लिए भर्ती हुई थी महिला
परिजन सुमित कुमार के अनुसार उनकी पत्नी का दून अस्पताल में उपचार चल रहा था। प्रसव के लिए उन्हें 22 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में चिकित्सकों ने सामान्य प्रसव की संभावना जताई थी, लेकिन 24 अगस्त को डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन कराने की सलाह दी। परिवार की सहमति के बाद महिला को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।
ऑपरेशन के बाद नवजात को देखने का मौका नहीं मिलने का दावा
सुमित कुमार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद परिवार के सदस्यों को तत्काल नवजात को देखने नहीं दिया गया। कुछ समय बाद जब अस्पताल की ओर से नवजात उन्हें सौंपा गया तो परिजनों ने उसके लड़की होने की बात कही।
यहीं से परिवार के संदेह की शुरुआत हुई। उनका कहना है कि अस्पताल से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज है, जबकि उनके सामने मौजूद नवजात बच्ची है। दस्तावेज में दर्ज जानकारी और सौंपे गए नवजात के बीच इस अंतर के बाद परिवार ने नवजात की अदला-बदली की आशंका जताई।
CCTV से लेकर DNA जांच तक की मांग
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के सामने मामले की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि ऑपरेशन थिएटर से नवजात को बाहर लाने और फिर परिवार को सौंपने तक की CCTV फुटेज खंगाली जाए, ताकि यह पता चल सके कि नवजात की पहचान और हस्तांतरण की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई।
इसके साथ ही परिवार ने DNA जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि DNA परीक्षण से यह निर्णायक रूप से पता लगाया जा सकता है कि अस्पताल से उन्हें सौंपा गया नवजात उन्हीं का बच्चा है या नहीं।
स्वास्थ्य मंत्री के सामने उठाया मामला
शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान परिजनों ने उनसे मुलाकात कर मामले की जानकारी दी। परिवार ने मंत्री से नवजात की पहचान को लेकर स्थिति साफ कराने, CCTV फुटेज की जांच कराने और DNA परीक्षण कराने की मांग की। स्वास्थ्य मंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
‘पहले कन्फ्यूजन दूर करना जरूरी’: सुबोध उनियाल
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि फिलहाल मामले में भ्रम की स्थिति है और सबसे पहले जांच के जरिए इस भ्रम को दूर किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान DNA परीक्षण की आवश्यकता महसूस होती है तो वह भी कराया जाएगा।
मंत्री के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल के रिकॉर्ड में नवजात का लिंग ‘मेल’ दर्ज होने और परिवार को लड़की सौंपे जाने के दावे के पीछे वास्तविक स्थिति क्या है।
जांच से खुलेगा पूरा मामला
फिलहाल नवजात की अदला-बदली के आरोप की पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है। जांच में अस्पताल के रिकॉर्ड, प्रसव और नवजात को सौंपने से जुड़ी प्रक्रिया तथा उपलब्ध CCTV फुटेज अहम भूमिका निभा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर DNA परीक्षण से बच्चे की जैविक पहचान भी स्पष्ट की जा सकती है।
अब जांच का केंद्र यही है कि अस्पताल के दस्तावेज में दर्ज ‘मेल’ और परिवार को सौंपे गए नवजात के बीच अंतर कैसे सामने आया। जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह महज रिकॉर्ड में हुई गलती थी, किसी स्तर पर लापरवाही हुई या वास्तव में नवजात की अदला-बदली हुई।



