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राजधानी के कोरोनेशन अस्पताल में चले जूते-चप्पल, व्हीलचेयर पटकी, मेडिकल कराने पहुंचे दो पक्ष भिड़े

ईएमओ कक्ष के बाहर का शीशा टूटा, बीच-बचाव करने आए पीआरडी जवान से भी मारपीट

Rajkumar Dhiman, Dehradun: जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन) में रविवार देर रात मेडिकल कराने पहुंचे दो पक्ष आपस में भिड़ गए। अस्पताल परिसर में दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट और धक्कामुक्की हुई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों ओर से एक-दूसरे पर जूते-चप्पल फेंके गए और अस्पताल की व्हीलचेयर भी क्षतिग्रस्त हो गई। हंगामे के दौरान ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) कक्ष के बाहर लगा शीशा भी टूट गया। बीच-बचाव करने पहुंचे पीआरडी जवान के साथ भी युवकों ने मारपीट कर दी। देर रात अस्पताल में हुई इस घटना से चिकित्सकों और कर्मचारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

घटना रविवार रात करीब साढ़े 11 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, किसी विवाद को लेकर दो युवकों के बीच अस्पताल से बाहर कहासुनी और मारपीट हुई थी। इसके बाद दोनों पक्ष मेडिकल परीक्षण कराने के लिए कोरोनेशन अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में मेडिकल की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच फिर किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया।

कुछ ही देर में कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और दोनों पक्षों के युवक एक-दूसरे से भिड़ गए। अस्पताल परिसर में ही हाथापाई और धक्कामुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों की ओर से जूते-चप्पल फेंके जाने लगे। इस दौरान अस्पताल में रखी व्हीलचेयर भी चपेट में आ गई और उसे नुकसान पहुंचा। हंगामे के दौरान ईएमओ कक्ष के बाहर लगा शीशा भी टूट गया।

बीच-बचाव करने पर पीआरडी जवान से मारपीट
अस्पताल में तैनात पीआरडी जवान ने दोनों पक्षों को शांत कराने और विवाद रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि हंगामा कर रहे युवकों ने उसके साथ भी मारपीट कर दी। इससे अस्पताल परिसर में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। घटना की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस के पहुंचने तक हंगामा कर रहे लोग वहां से जा चुके थे।

कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
अस्पताल में मेडिकल कराने के लिए अक्सर विवादित मामलों में शामिल दोनों पक्ष पहुंचते हैं। ऐसे में उनके बीच अस्पताल परिसर में ही विवाद होने से चिकित्सकों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। देर रात हुई इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति भी सामने ला दी है। चिकित्सकों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते विवाद नहीं रोका गया तो भविष्य में किसी कर्मचारी या चिकित्सक को गंभीर चोट लग सकती है।

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. यतेंद्र सिंह ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि अस्पताल में मारपीट और हंगामा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। मामले की शिकायत पुलिस से की जाएगी और संबंधित युवकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की जाएगी। अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।

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