वन मंत्री के क्षेत्र के वन प्रभाग को कैसे मिल गया 50 प्रतिशत बजट, खड़े हो रहे सवाल
नरेंद्रनगर वन प्रभाग को 24.41 करोड़ का बजट, खर्च सिर्फ 2.90 करोड़, 31 अगस्त तक महज 12 प्रतिशत व्यय

Aryan Walia, Dehradun: उत्तराखंड वन विभाग के 31 अगस्त 2026 तक के बजट और व्यय के आंकड़ों ने नरेंद्रनगर वन प्रभाग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों में नरेंद्रनगर वन प्रभाग के लिए 2441 लाख रुपये यानी 24.41 करोड़ रुपये का आवंटित बजट दर्शाया गया है। इसके मुकाबले 31 अगस्त तक 290 लाख रुपये यानी 2.90 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। इस तरह कुल आवंटित बजट का लगभग 12 प्रतिशत ही व्यय हुआ है।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नरेंद्रनगर वन प्रभाग भागीरथी वृत्त का हिस्सा है। भागीरथी वृत्त के चार प्रभागों टिहरी, टिहरी-1, नरेंद्रनगर और उत्तरकाशी को मिलाकर कुल 4939 लाख रुपये यानी 49.39 करोड़ रुपये का बजट आवंटित है। इसमें नरेंद्रनगर वन प्रभाग का बजट 24.41 करोड़ रुपये, यानी पूरे वृत्त के बजट का करीब 49.4 प्रतिशत है। हालांकि, पूरे भागीरथी वृत्त में 31 अगस्त तक 861 लाख यानी 8.61 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और व्यय प्रतिशत 17 है। इस तरह देखें को बजट में आगे नरेंद्रनगर प्रभाग के खर्च का ग्राफ औसत से कहीं नीचे है।
130.23 करोड़ के बजट में खर्च 34.42 करोड़
विभाग के आंकड़ों में राज्य के विभिन्न वन वृत्तों और प्रभागों की स्थिति भी दी गई है। शिवालिक वृत्त का आवंटित बजट 42.65 करोड़ और व्यय 15.91 करोड़ रुपये यानी 37 प्रतिशत है। गढ़वाल वृत्त के लिए 22.58 करोड़ के मुकाबले 6.12 करोड़ रुपये यानी 27 प्रतिशत खर्च दर्ज है। यमुना वृत्त में 15.60 करोड़ के बजट में 3.79 करोड़ रुपये यानी 24 प्रतिशत और भागीरथी वृत्त में 49.39 करोड़ में से 8.61 करोड़ रुपये यानी 17 प्रतिशत खर्च हुए हैं।
चारों वृत्तों को मिलाकर कुल आवंटित बजट 130.23 करोड़ रुपये है, जबकि 31 अगस्त तक कुल व्यय 34.42 करोड़ रुपये यानी करीब 26 प्रतिशत दर्ज है। आंकड़े सामान्य अधिष्ठान को छोड़कर और कैम्पा सहित जारी बजट-व्यय की स्थिति से संबंधित हैं। नरेंद्रनगर डिवीजन को अत्यधिक बजट के मुद्दे के साथ सवाल यह भी है कि 31 अगस्त तक 24.41 करोड़ रुपये के आवंटित बजट में से केवल 2.90 करोड़ रुपये ही क्यों खर्च हुए? शेष करीब 21.51 करोड़ रुपये की धनराशि किस चरण में है और इसके तहत कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
काम वर्किंग प्लान के मुताबिक हैं या नहीं? इस पर तस्वीर साफ होनी बाकी
सिर्फ बजट और व्यय के आंकड़े यह साबित नहीं करते कि कोई अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी हुई है। लेकिन वन विभाग के खर्च को लेकर पारदर्शिता के लिए यह जांच जरूरी है कि नरेंद्रनगर प्रभाग में स्वीकृत प्रत्येक कार्य संबंधित वर्किंग प्लान, वार्षिक कार्ययोजना (APO), प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति और निर्धारित वन प्रबंधन मानकों के अनुरूप है या नहीं।
साथ ही कार्यस्थल, स्वीकृत राशि, टेंडर/कार्यादेश, माप पुस्तिका, भुगतान और वास्तविक भौतिक कार्य की भी जांच होनी चाहिए। खासकर कैम्पा से जुड़े कार्यों में स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य का मिलान महत्वपूर्ण है। केंद्र से उत्तराखंड के लिए कैम्पा के तहत पिछले तीन वर्षों में 945.69 करोड़ रुपये के कार्य अनुमोदित होने तथा 2026-27 के लिए 339 करोड़ रुपये का एपीओ प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है।
वन मंत्री के विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण बढ़ी निगाह
नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल करते हैं और उनके पास वन विभाग भी है। ऐसे में नरेंद्रनगर वन प्रभाग के बजट और खर्च का यह पैटर्न स्वाभाविक रूप से अतिरिक्त सार्वजनिक जांच का विषय बनता है। हालांकि मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में प्रभाग होने मात्र से किसी अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। वास्तविक स्थिति जानने के लिए विभाग को यह बताना होगा कि 24.41 करोड़ रुपये का प्रावधान किस वजह से किया गया।
साथ ही 2.90 करोड़ रुपये किन कार्यों पर खर्च हुए और शेष राशि के लिए स्वीकृत कार्यों की वर्तमान स्थिति क्या है। सबसे अहम सवाल यही है क्या नरेंद्रनगर वन प्रभाग में प्रस्तावित और चल रहे सभी कार्य स्वीकृत वर्किंग प्लान और कैम्पा की निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप हैं? इसका जवाब बजट के आंकड़ों से नहीं, बल्कि कार्यवार स्वीकृति और मौके की जांच से मिलेगा।



