Dehradun

रेरा ने बिल्डर पर दिखाया रहम, अपीलीय न्यायाधिकरण ने शिकंजा कस निर्माण पर लगाई रोक

सेरेन ग्रीन्स परियोजना में ग्रीन एरिया में निर्माण करना पड़ा भारी, एसटीपी और बाउंड्री वाल का मुद्दा भी उठा

Aryan Walia, Dehradun: देहरादून में झाझरा स्थित सेरेन ग्रीन्स आवासीय सोसाइटी के ग्रीन एरिया में निर्माण के मामले में उत्तराखंड रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने बिल्डर को राहत नहीं दी। ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) की ओर से मैसर्स जेमिनी पैकटेक प्राइवेट लिमिटेड व अन्य पर लगाए गए पांच लाख रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा। साथ ही रेरा के आदेश में महत्वपूर्ण निर्देश जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना सोसाइटी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आगे कोई निर्माण नहीं किया जाएगा।

मामला अशोक कुमार शर्मा व अन्य बनाम मैसर्स जेमिनी पैकटेक प्राइवेट लिमिटेड व अन्य से संबंधित है। यह अपील रेरा के एक सितंबर 2025 को पारित आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे (अध्यक्ष), एचएस बोनाल (सदस्य न्यायिक) और मनोज कुमार की पीठ ने की।

1882.05 वर्गमीटर ग्रीन एरिया में निर्माण पर विवाद
अपीलकर्ताओं अशोक कुमार शर्मा, मोनिका शर्मा और अन्य ने सेरेन ग्रीन्स परियोजना में आवासीय प्लाट और विला खरीदे हैं। परियोजना में 1882.05 वर्गमीटर क्षेत्र को ग्रीन एरिया के रूप में निर्धारित किया गया था। आरोप था कि बिल्डर ने सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना इसी क्षेत्र में निर्माण शुरू कर दिया।

शिकायत पर रेरा ने बिल्डर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि परियोजना के ग्रीन एरिया में पूर्व अनुमति के बिना निर्माण किया गया है। इसके आधार पर बिल्डर और प्रतिवादियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

हालांकि, रेरा ने संबंधित निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश नहीं दिया। प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि उसके पास इस प्रकार का ध्वस्तीकरण आदेश पारित करने की शक्ति नहीं है। साथ ही आवंटियों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत करने की स्वतंत्रता दी गई।

रेरा के इस आदेश को चुनौती देते हुए आवंटियों ने अपील दाखिल की। दूसरी ओर, बिल्डर और अन्य प्रतिवादियों ने भी इसी आदेश के खिलाफ अलग अपील दायर की।

बाउंड्रीवाल और एसटीपी निर्माण का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान आवंटियों ने सेरेन ग्रीन्स परियोजना की बाउंड्रीवाल और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण नहीं होने का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि बिल्डर ने ग्रीन बेल्ट के रूप में चिह्नित क्षेत्र में भी संबंधित प्राधिकारी की अनुमति के बिना निर्माण किया है।

आवंटियों ने यह सवाल भी उठाया कि जब रेरा ने ग्रीन एरिया में बिना अनुमति निर्माण की स्थिति स्वीकार कर ली थी, तो बिल्डर को भविष्य में वहां निर्माण करने से रोकने के लिए स्पष्ट निर्देश क्यों नहीं दिया गया।

इसके जवाब में बिल्डर की ओर से कहा गया कि मूल शिकायत में बाउंड्रीवाल और एसटीपी के निर्माण से संबंधित ऐसी राहत मांगी ही नहीं गई थी। इसलिए रेरा शिकायत में मांगी गई राहत से आगे जाकर आदेश पारित नहीं कर सकता। बिल्डर ने यह तर्क भी दिया कि अपीलीय न्यायाधिकरण भी शिकायत में मांगी गई राहत की सीमा से बाहर नहीं जा सकता।

संयुक्त निरीक्षण में सामने आया ग्रीन एरिया से गुजरने वाला रास्ता
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की सहमति से रेरा में तैनात कार्यकारी अभियंता और सहायक अभियंता को मौके का निरीक्षण करने तथा विशेषज्ञ राय देने के लिए नियुक्त किया गया। अभियंताओं ने पक्षकारों की मौजूदगी में स्थल का निरीक्षण किया और पांच जून 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

न्यायाधिकरण ने इस रिपोर्ट को मामले के महत्वपूर्ण तथ्यों में शामिल किया। रिपोर्ट के अनुसार सेरेन ग्रीन्स सोसाइटी के पीछे ओकवुड अपार्टमेंट्स स्थित है। ओकवुड अपार्टमेंट्स के आवंटी सेरेन ग्रीन्स के ग्रीन एरिया में बने रास्ते का इस्तेमाल आवागमन के लिए कर रहे थे। निरीक्षण रिपोर्ट में बताया गया कि यह रास्ता ओकवुड अपार्टमेंट्स के आवंटियों के प्रवेश और निकास के लिए बिल्डर की ओर से बनाया गया था।

दूसरे प्रोजेक्ट के आवंटियों के लिए रास्ता बनाने पर सवाल
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि अभियंताओं की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि संबंधित ग्रीन एरिया सेरेन ग्रीन्स परियोजना का हिस्सा था। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इसे सेरेन ग्रीन्स सोसाइटी के ग्रीन एरिया के रूप में स्वीकृत किया था।

आदेश के अनुसार, बिल्डर की जिम्मेदारी थी कि इस क्षेत्र को सेरेन ग्रीन्स के आवंटियों के लाभ के लिए ग्रीन एरिया के रूप में खुला रखा जाए। इसके बावजूद ग्रीन एरिया के एक हिस्से में दूसरे प्रोजेक्ट के आवंटियों के आवागमन के लिए रास्ता बनाया गया।

ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीन एरिया से संबंधित विक्रय विलेख में आवंटियों की ओर से दी गई सहमति कानूनी रूप से वैध है या नहीं, इस प्रश्न पर रेरा अथवा न्यायाधिकरण कोई निर्णय नहीं दे रहा है। हालांकि, परियोजना और बिल्डर की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं तथा सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृत मानचित्र में दर्शाई गई व्यवस्था की जांच रेरा के अधिकार क्षेत्र में आती है।

रेरा के आदेश में अतिरिक्त निर्देश, आगे निर्माण पर रोक
न्यायाधिकरण ने माना कि रेरा ने आवंटियों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत करने की स्वतंत्रता देकर एक दिशा में कार्रवाई की थी। लेकिन ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आगे निर्माण रोकने के संबंध में स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया था।ट्रिब्यूनल ने कहा कि जिस प्राधिकारी ने परियोजना के मानचित्र को स्वीकृति दी है, वह बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सक्षम है।

इसके बाद न्यायाधिकरण ने रेरा के मूल आदेश को बरकरार रखते हुए उसमें अतिरिक्त निर्देश शामिल किया। आदेश के मुताबिक, बिल्डर और प्रतिवादी सेरेन ग्रीन्स सोसाइटी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना आगे कोई निर्माण नहीं करेंगे।

न्यायाधिकरण ने आदेश की प्रति रेरा को सूचना और आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश भी दिए हैं। इस तरह पांच लाख रुपये का जुर्माना कायम रहने के साथ ग्रीन बेल्ट में भविष्य के निर्माण को लेकर भी स्पष्ट प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इन्होंने दाखिल की याचिका
अशोक कुमार शर्मा, मोनिका शर्मा, संगीता थपलियाल, अतुल थपलियाल, नरेंद्र सिंह नेगी, कविता नेगी, राकेश बहुगुणा, निर्मल बहुगुणा, सतीश कुमार, राजकुमारी त्यागी, बृजेश कुमार चौहान, ईशा त्यागी, करुवल्ली रत्नम्मा विजयम्मा, सपना त्यागी और थेरेसिया एनजे।

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