जीएसटी जांच में खुला खेल, 40 इलेक्ट्रिकल कारोबारियों ने छिपाई बिक्री
दो दिन की प्रदेशव्यापी कार्रवाई में 4.30 करोड़ रुपये जमा, अब होगी कर की मांग और वसूली

Rajkumar Dhiman, Dehradun: इलेक्ट्रिकल सामान बेचने वाले कारोबारियों पर राज्य कर विभाग ने शिकंजा कसा तो जीएसटी अनुपालन की तस्वीर सामने आ गई। 18 और 19 सितंबर को प्रदेशभर में चले जांच अभियान में 40 कारोबारियों के स्तर पर जीएसटी नियमों के मुताबिक कर का भुगतान नहीं करने और बिक्री छिपाने का मामला सामने आया। कार्रवाई के दौरान ही 4.30 करोड़ रुपये नकद जमा कराए गए। अब विभागीय अधिकारी सामने आईं सभी विसंगतियों की जांच के बाद नियमानुसार कर की मांग और वसूली की कार्रवाई करेंगे।
यह कार्रवाई आयुक्त राज्य कर प्रतीक जैन के निर्देश पर की गई। सभी संयुक्त आयुक्त (कार्यपालक) ने अपने-अपने क्षेत्रों में चिह्नित व्यापारिक प्रतिष्ठानों की जांच के लिए उपायुक्त, सहायक आयुक्त और राज्य कर अधिकारी स्तर की टीमें गठित की थीं। इसके बाद प्रदेशभर में इलेक्ट्रिकल उत्पादों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में लिया गया। जांच में सामने आया कि 40 व्यापारियों ने जीएसटी नियमों के अनुसार कर का भुगतान नहीं किया और अपनी बिक्री छिपाई।
गढ़वाल से कुमाऊं तक अधिकारियों ने संभाली निगरानी
पूरी कार्रवाई की निगरानी अपर आयुक्त गढ़वाल जोन डीएस नबियाल, अपर आयुक्त कुमाऊं जोन राकेश वर्मा ने की। मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी संयुक्त आयुक्त अनुराग मिश्रा, संयुक्त आयुक्त संजीव सोलंकी, संयुक्त आयुक्त स्मिता और संयुक्त आयुक्त हेमा बिष्ट ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में संभाली। मुख्यालय स्तर पर कार्रवाई की मॉनिटरिंग नोडल अधिकारी संयुक्त आयुक्त मनीष मिश्रा ने की।
बिल के बिना खरीदारी पर उपभोक्ता भी रहें सावधान
राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन ने उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रिकल सामान खरीदते समय टैक्स इनवॉइस यानी जीएसटी बिल जरूर लेने की अपील की है। विभाग के अनुसार बिल केवल कर भुगतान का प्रमाण नहीं है, बल्कि उत्पाद की वारंटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रिकल उत्पाद खराब होने पर कंपनी से मुफ्त मरम्मत या रिप्लेसमेंट के लिए बिल दिखाना पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर खरीदार बिल के आधार पर उपभोक्ता कोर्ट में भी शिकायत कर सकता है।
दुकानों पर लगेगा ‘जीएसटी बिल अवश्य लें’ का संदेश
आयुक्त ने व्यापारियों से दुकानों पर ‘जीएसटी बिल अवश्य लें’ का स्टीकर लगाने की अपील की है। अधिकारियों को व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के बीच कर जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने साफ किया है कि कर अनुपालन, राजस्व संग्रह में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए ऐसे निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे।



