बिल्डर पर रेरा का शिकंजा, 09 लोगों को देना होगा 1.89 करोड़ का मुआवजा
सेरेन ग्रीन्स में ग्रीन एरिया पर निर्माण और सुविधाओं के विवाद पर न्याय निर्णायक अधिकारी का बड़ा आदेश, हर एक को 21-21 लाख रुपये मिलेंगे

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून के झाझरा-बंसीवाला स्थित सेरेन ग्रीन्स आवासीय परियोजना में ग्रीन एरिया में निर्माण, स्वीकृत लेआउट में बदलाव और वादे के मुताबिक सुविधाएं नहीं देने के मामले में उत्तराखंड भू-सम्पदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) के न्याय निर्णायक अधिकारी ने बिल्डर और संबंधित प्रतिवादियों पर बड़ा आर्थिक दायित्व तय किया है। न्याय निर्णायक अधिकारी एसएमडी दानिश ने नौ शिकायतकर्ताओं के पक्ष में प्रत्येक को 21 लाख रुपये, यानी कुल 1.89 करोड़ रुपये मुआवजा अधिनिर्णीत किया है। आदेश एकपक्षीय रूप से आंशिक रूप से पारित किया गया है।
ग्रीन एरिया पर कब्जे और लेआउट बदलने का आरोप
मामला सेरेन ग्रीन्स, बंसीवाला, झाझरा, एनएच-72, मुख्य चकराता रोड की परियोजना से जुड़ा है। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि परियोजना के स्वीकृत लेआउट में 1882.05 वर्गमीटर भूमि ग्रीन एरिया के लिए निर्धारित थी। एमडीडीए से स्वीकृत इस क्षेत्र का उपयोग सोसाइटी के निवासियों के लिए खुली हरित भूमि और सामुदायिक सुविधा के रूप में होना था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिल्डर ने आवंटियों की पूर्व लिखित सहमति के बिना स्वीकृत लेआउट और उसकी विशिष्टताओं में बदलाव किया। ग्रीन एरिया के हिस्से में निर्माण और दूसरे प्रोजेक्ट ओकवुड अपार्टमेंट्स को रास्ता देने के लिए सोसाइटी की सुविधाओं के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इससे सेरेन ग्रीन्स का प्रवेश मार्ग प्रभावित हुआ और हरित क्षेत्र का अतिक्रमण हुआ।
मामले में यह भी कहा गया कि सेरेन ग्रीन्स की सुविधाओं को बाद में विकसित किए जा रहे ओकवुड अपार्टमेंट्स और अन्य निर्माण से जोड़ा गया, जबकि शिकायतकर्ताओं की दो-तिहाई लिखित सहमति नहीं ली गई थी।
सात साल बाद भी सुविधाएं नहीं मिलने का दावा
शिकायतकर्ताओं ने केवल ग्रीन एरिया का विवाद नहीं उठाया, बल्कि परियोजना के ब्रॉशर में वादा की गई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का भी आरोप लगाया। आदेश में दर्ज शिकायत के मुताबिक कब्जा दिए जाने के लगभग सात वर्ष बाद भी कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं।
शिकायत में जिन 16 सुविधाओं का उल्लेख किया गया, उनमें
24 घंटे सुरक्षा और बाउंड्रीवाल वाला गेटेड कैंपस, स्विमिंग पूल, सुसज्जित जिम, योग सेंटर, इनडोर और आउटडोर खेल सुविधाएं, आधुनिक क्लब हाउस, पार्क और जॉगर्स लेन सहित लैंडस्केपिंग, शॉपिंग सेंटर, डॉक्टर ऑन कॉल सुविधा वाला इंफर्मरी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, 24 घंटे जलापूर्ति, वेस्ट डिस्पोजल और एसटीपी, कार वॉशिंग एरिया, डॉग पॉपू एरिया, बच्चों के खेलने का क्षेत्र और सीसीटीवी निगरानी वाली हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था शामिल थी।
शिकायत में यह भी आरोप था कि कुछ विला के पीछे का हिस्सा अधूरा होने से पानी जमा होता है और मच्छरों के पनपने की स्थिति बनती है। साथ ही परियोजना की सीमाएं स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं करने और उचित सीवेज लाइन तथा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं कराने की शिकायत भी की गई।
पांच करोड़ रुपये प्रति शिकायतकर्ता मांगा था मुआवजा
शिकायतकर्ताओं ने सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने के लिए कुल पांच करोड़ रुपये तथा मानसिक उत्पीड़न और प्रताड़ना के लिए भी प्रत्येक शिकायतकर्ता को पांच करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की थी। इसके अलावा मुकदमे का खर्च दिलाने की मांग भी की गई थी।
हालांकि न्याय निर्णायक अधिकारी ने प्रत्येक शिकायतकर्ता को 21 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्णय किया। इसमें ग्रीन एरिया, स्वीकृत मानचित्र में बदलाव और उससे हुई मानसिक प्रताड़ना/हानि के लिए पांच लाख रुपये तथा 16 वादा की गई सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने से हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए 16 लाख रुपये शामिल हैं। इस तरह प्रत्येक शिकायतकर्ता के हिस्से में 21 लाख रुपये आए।
प्रतिवादी अदालत में नहीं पहुंचे, 20 जुलाई को एकपक्षीय कार्रवाई
मामले में विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी किए गए, लेकिन आदेश के अनुसार प्रतिवादी अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद 20 जुलाई 2026 के आदेश से कार्यवाही एकपक्षीय कर दी गई। शिकायतकर्ताओं ने 29 जुलाई 2026 को दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्याय निर्णायक अधिकारी ने कहा कि प्रतिवादियों की ओर से शिकायतकर्ताओं के साक्ष्य के खंडन में कोई अभिवचन या साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं था।
आदेश में कहा गया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह स्थापित हुआ कि शिकायतकर्ताओं की पूर्व लिखित सहमति के बिना सेरेन ग्रीन्स के स्वीकृत मानचित्र और उसकी विशिष्टताओं में बदलाव किया गया, जिससे परियोजना का प्रवेश मार्ग संकरा हुआ और हरित क्षेत्र के अतिक्रमण की स्थिति सामने आई।
45 दिन में भुगतान, नहीं तो ब्याज
रेरा के न्याय निर्णायक अधिकारी ने आदेश दिया कि प्रतिवादी संख्या 1 से 9 संयुक्त रूप से और पृथक रूप से प्रत्येक शिकायतकर्ता को निर्धारित मुआवजा अदा करेंगे। भुगतान के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।
यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो आदेश में 8.80 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का निर्देश है, जो आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक लागू होगा। भुगतान न होने पर शिकायतकर्ता कानून के अनुसार मुआवजा और ब्याज की वसूली के लिए आगे की कार्रवाई कर सकते हैं।
कौन-कौन शिकायतकर्ता और प्रतिवादी?
शिकायतकर्ता नौ आवंटी हैं:
1. नरेंद्र नेगी
2. कविता नेगी
3. सतीश कुमार
4. राजकुमारी त्यागी
5. बृजेश कुमार चौहान
6. ईशा त्यागी
7. करूवल्ली रत्नांबा विजयांबा
8. सपना त्यागी
9. थेरेसिया एनजे
प्रतिवादी, जिनके विरुद्ध आदेश किया पारित (आदेश में प्रतिवादी संख्या 10 और 11 को प्रोफार्मा पक्षकार बताया गया है और शिकायतकर्ताओं ने इनके विरुद्ध राहत का दावा नहीं किया था।)
1. जेमिनी पैकटेक प्राइवेट लिमिटेड, डायरेक्टर के माध्यम से
2. समरेश कुमार सिंह, डायरेक्टर
3. देवेंद्र कुमार, डायरेक्टर
4. राजबाला, डायरेक्टर
5. रंजना राणा, डायरेक्टर
6. नीरज देवी, डायरेक्टर
7. मोनिका तेवतिया, डायरेक्टर
8. देवेंद्र सिंह, डायरेक्टर
9. दिनेश चुफाल, डायरेक्टर
10. सुनील कुमार कोटनाला
11. अशोक कुमार शर्मा
मामला यहां से शुरू हुआ था
शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने सेरेन ग्रीन्स में अलग-अलग विला और प्लॉट खरीदे थे। रिकॉर्ड में विला नंबर 11, 26, 4, 46ए और 20 समेत प्लॉट नंबर 8, 64 और 65 से जुड़े बिक्री विलेखों का विवरण दिया गया है। कई बिक्री विलेख वर्ष 2020 से 2022 के बीच पंजीकृत हुए। परियोजना का रेरा पंजीकरण नंबर UKREP10170000060 है। उपलब्ध पंजीकृत परियोजना रिकॉर्ड में सेरेन ग्रीन्स को जेमिनी पैकटेक प्राइवेट लिमिटेड की परियोजना के रूप में दर्ज किया गया है।
इस विवाद से पहले भी आवंटियों ने 15 अप्रैल 2023 को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद Secretary, Serene Green Residents Welfare Society बनाम Gemini Packtech Pvt. Ltd. नाम से केस नंबर 55/2024 का मामला भी सामने आया, जिसमें कथित अवैध निर्माण रोकने और ब्रॉशर में वादा की गई सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
पूरे प्रकरण का हालिया अपडेट: ट्रिब्यूनल ने भी बिल्डर को नहीं दी राहत
इस प्रकरण के हालिया अपीलीय चरण में, आपके दिए विवरण के अनुसार उत्तराखंड रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने भी बिल्डर को राहत नहीं दी। मामला अशोक कुमार शर्मा व अन्य बनाम मैसर्स जेमिनी पैकटेक प्राइवेट लिमिटेड व अन्य से संबंधित है। यह अपील रेरा के 1 सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी।
रेरा ने उस मामले में सेरेन ग्रीन्स के ग्रीन एरिया और परियोजना की साझा सुविधाओं से जुड़े बदलावों को लेकर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। अपीलीय न्यायाधिकरण ने यह जुर्माना बरकरार रखा।
1882.05 वर्गमीटर ग्रीन एरिया बना विवाद का केंद्र
सेरेन ग्रीन्स के स्वीकृत लेआउट में 1882.05 वर्गमीटर क्षेत्र ग्रीन एरिया के रूप में निर्धारित था। आवंटियों का आरोप था कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना इस क्षेत्र में निर्माण और दूसरे प्रोजेक्ट के लिए रास्ते का इस्तेमाल किया गया।
ट्रिब्यूनल के समक्ष रखी गई संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में भी ग्रीन एरिया से होकर गुजरने वाले रास्ते का उल्लेख हुआ। 5 जून 2026 की निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक सेरेन ग्रीन्स के पीछे स्थित ओकवुड अपार्टमेंट्स के आवंटी इस रास्ते का इस्तेमाल आवागमन के लिए कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार रास्ता बिल्डर ने ओकवुड अपार्टमेंट्स के प्रवेश और निकास के लिए बनाया था।
तीन अलग परियोजनाओं को जोड़ने का सवाल
मामले में सेरेन ग्रीन्स, ओकवुड अपार्टमेंट्स और द टेरेस परियोजना को लेकर भी सवाल उठे। रेरा के पूर्व आदेश में इन्हें अलग-अलग परियोजनाओं और अलग-अलग रेरा पंजीकरण से जुड़ा बताया गया था। आवंटियों का आरोप था कि सेरेन ग्रीन्स की साझा सुविधाओं और लेआउट का इस्तेमाल दूसरी परियोजना को आगे बढ़ाने में किया गया।
ट्रिब्यूनल के समक्ष यह भी मुद्दा आया कि क्या सेरेन ग्रीन्स के ग्रीन एरिया में दूसरे प्रोजेक्ट के आवंटियों के लिए रास्ता बनाया जा सकता है। न्यायाधिकरण ने माना कि संबंधित ग्रीन एरिया सेरेन ग्रीन्स परियोजना का हिस्सा था और स्वीकृत व्यवस्था के मुताबिक इसे उसी परियोजना के आवंटियों के लाभ के लिए खुला रखा जाना था।
ट्रिब्यूनल ने जोड़ा महत्वपूर्ण निर्देश
रेरा के मूल आदेश में पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था, लेकिन ग्रीन बेल्ट में भविष्य में निर्माण रोकने को लेकर स्पष्ट निर्देश नहीं था। अपीलीय न्यायाधिकरण ने इसी बिंदु पर अतिरिक्त निर्देश जोड़ा। इसके मुताबिक सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना सेरेन ग्रीन्स सोसाइटी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आगे कोई निर्माण नहीं किया जाएगा।
ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रीन एरिया से जुड़े विक्रय विलेख में आवंटियों की सहमति की कानूनी वैधता पर वह कोई फैसला नहीं दे रहा है। हालांकि परियोजना की स्वीकृत योजना और बिल्डर की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं की जांच रेरा के अधिकार क्षेत्र में आती है।
एक ही विवाद में दो स्तरों पर बड़ा आर्थिक असर
इस पूरे प्रकरण में अब तस्वीर और गंभीर हो गई है। एक तरफ पूर्व रेरा आदेश में पांच लाख रुपये का जुर्माना और ग्रीन एरिया से जुड़े उल्लंघनों पर निष्कर्ष दर्ज हुआ, जिसे अपीलीय न्यायाधिकरण ने बरकरार रखते हुए भविष्य के निर्माण पर स्पष्ट रोक जोड़ी। दूसरी तरफ ताजा न्याय निर्णायक अधिकारी के एकपक्षीय आदेश में नौ शिकायतकर्ताओं के लिए कुल 1.89 करोड़ रुपये मुआवजा तय किया गया है।
यानी सेरेन ग्रीन्स विवाद अब केवल ग्रीन एरिया में कथित निर्माण तक सीमित नहीं रहा है। इसमें स्वीकृत लेआउट में बदलाव, दूसरे प्रोजेक्ट के लिए साझा सुविधाओं/रास्ते के इस्तेमाल, ग्रीन एरिया के संरक्षण, आवंटियों की सहमति, परियोजना की मूल सुविधाएं और मुआवजे जैसे कई कानूनी सवाल एक साथ सामने आ चुके हैं।



