उमेश कुमार विधायिकी से इस्तीफा देंगे, कहा त्रिवेंद्र और हरीश रावत जिंदाबाद के नारे नहीं लगा सकते
विपक्ष के सहयोग न मिलने से हैं खिन्न, भाजपा-कांग्रेस में जाने से भी किया इनकार

Rajkumar Dhiman, Uttarakhand: हरिद्वार की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने कल विधायिकी से इस्तीफा देने का एलान किया है। उन्होंने विपक्ष पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। साथ ही भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों में शामिल होने की संभावनाओं को खारिज कर दिया। उनके इस एलान ने उत्तराखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।
मीडिया से बातचीत में उमेश कुमार ने दो टूक कहा कि वह न तो भाजपा में जाकर त्रिवेंद्र सिंह रावत जिंदाबाद के नारे लगा सकते हैं और न ही कांग्रेस में शामिल होकर हरीश रावत जिंदाबाद बोल सकते हैं। उनके इस बयान से साफ है कि फिलहाल वह प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने का संकेत दे रहे हैं।
उमेश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बीच राजनीतिक तल्खी किसी से छिपी नहीं है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ भी उनके रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। दोनों नेताओं के साथ उनके छत्तीस के आंकड़े को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस में शामिल होने से इनकार करने वाला उनका बयान सियासी नजरिये से अहम माना जा रहा है।
विपक्ष से दूरी या नई राजनीतिक रणनीति?
विधायिकी से इस्तीफे का एलान करने के साथ ही उमेश कुमार ने विपक्ष के सहयोग की कमी को अपनी नाराजगी की वजह बताया है। हालांकि, उनके इस्तीफे के पीछे की पूरी राजनीतिक रणनीति और आगे की राह को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि निर्दलीय विधायक का यह फैसला उत्तराखंड की राजनीति में किस तरह के नए समीकरण पैदा करेगा और उनके अगले कदम क्या होंगे।



