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महिला अभ्यर्थी ने दूसरे के अनुक्रमांक से हासिल की नौकरी, शिक्षिका पर कार्रवाई

बागेश्वर में यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच में खुली पोल, जिले में 11वां मामला, प्रदेश में 80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी मिलने की जानकारी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बागेश्वर जिले में अब एक और शिक्षिका के प्रमाणपत्र में गड़बड़ी मिली है। जांच में पता चला कि शिक्षिका ने उत्तराखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूटीईटी) के जिस अंकपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की, उस पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का है। शिक्षा विभाग ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में इस तरह के मामलों में अब तक 11 शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी सामने आ चुकी है।

जनवरी में हुई थी नियुक्ति, सत्यापन में पकड़ी गई गड़बड़ी
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़ी में तैनात शिक्षिका बबीता, पुत्री फकीर राम, की नियुक्ति इसी वर्ष जनवरी में हुई थी। नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से कराया गया। जांच में यूटीईटी अंकपत्र पर दर्ज अनुक्रमांक किसी दूसरे अभ्यर्थी का पाया गया। इससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए। प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा राम ने बताया कि बोर्ड की जांच में अनुक्रमांक दूसरे अभ्यर्थी का होने की पुष्टि हुई है। शिक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

प्रदेश में 80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी मिलने का मामला
फर्जी प्रमाणपत्रों से शिक्षक बनने का मामला केवल बागेश्वर तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड हाईकोर्ट में अक्टूबर 2026 में हुई सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, राज्य में सत्यापन के दौरान 80 शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी या कूटरचित पाए गए थे। सरकार ने अदालत को बताया था कि संबंधित शिक्षकों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की गई है। वहीं, जून 2024 की एक रिपोर्ट में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले 65 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी दी गई थी। अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार, 69 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए थे, जिनमें से 52 को बर्खास्त किया जा चुका था। ये अलग-अलग समय और जांच चरणों के आंकड़े हैं।

एसआईटी जांच में 68 मुकदमों का भी उल्लेख
शिक्षक भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान एसआईटी ने वर्ष 2012 से 2016 के बीच नियुक्त 9,602 शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की थी। इस संबंध में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 80 शिक्षकों के विरुद्ध 68 मुकदमे दर्ज किए गए थे। इनमें शैक्षिक प्रमाणपत्रों के अलावा मूल निवास और अन्य दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी के मामले भी शामिल थे। हालांकि, इन मुकदमों में अब तक कितने मामलों में आरोपपत्र दाखिल हुए, कितनों में सुनवाई पूरी हुई और कितने मामलों में दोषसिद्धि हुई, इसका अद्यतन समेकित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

बागेश्वर के बाद अल्मोड़ा में भी तीन शिक्षक बर्खास्त
अक्टूबर 2026 में बागेश्वर में यूटीईटी प्रमाणपत्रों की जांच के बाद 10 प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की खबर सामने आई थी। उनके प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जानकारी भी दी गई थी। अब शिक्षिका बबीता का मामला सामने आया है। इसी महीने अल्मोड़ा में भी यूटीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर तीन प्राथमिक शिक्षकों की सेवाएं समाप्त किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। इन मामलों ने शिक्षक नियुक्तियों में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

सत्यापन लंबित, लेकिन सभी शिक्षक संदिग्ध नहीं
हाईकोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 33,055 शिक्षकों में से 24,820 के दस्तावेजों का सत्यापन किया जा चुका था। वहीं, 7,553 कार्यरत और 682 सेवानिवृत्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन लंबित था। ये आंकड़े लंबित सत्यापन से संबंधित हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी हैं।

प्रदेश में अब तक कितने शिक्षक बर्खास्त किए गए, कितने निलंबित हैं, कितने मुकदमे दर्ज हुए और कितने मामले जांच के अधीन हैं, इसकी एक ही तारीख की अद्यतन समेकित सूची फिलहाल उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग वर्षों की रिपोर्टों में सामने आए आंकड़ों को जोड़ने से दोहराव की भी आशंका है। ऐसे में शिक्षा विभाग से जिलेवार बर्खास्तगी, निलंबन, एफआईआर और लंबित जांच का पूरा ब्योरा सामने आना जरूरी है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति हासिल करने वालों के विरुद्ध कितनी कार्रवाई निर्णायक स्तर तक पहुंची है और कितने मामले अब भी लंबित हैं।

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