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एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में तीन और गिरफ्तार, 25 से 30 लाख देकर बनवाए प्रमाणपत्र

देहरादून की एसआइटी अब तक 08 आरोपियों को कर चुकी गिरफ्तार

Rajkumar Dhiman, Dehradun: नीट-यूजी की राज्य काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे एमबीबीएस में दाखिले के मामले में एसआइटी ने तीन और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुजफ्फरनगर निवासी प्रवीण कुमार, हरिद्वार निवासी जगपाल सिंह और बिजनौर निवासी रामपाल सिंह शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के लिए कूटरचित स्थायी निवास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र और आधार कार्ड तैयार कराए थे। इसके साथ ही देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में दर्ज दोनों मुकदमों में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या आठ हो गई है।

25 और 30 लाख रुपये देकर बनवाए प्रमाणपत्र
एसआइटी की पूछताछ में प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने मेरठ में मिकोडो (MECODO) पाठशाला नाम से एजुकेशन कंसल्टेंसी चलाने वाले रूपेश पंडित से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश पिछले पांच वर्षों से निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन पर दाखिला दिलाने का काम कर रहा था। आरोप है कि प्रवीण ने बेटी खुशी के दाखिले के लिए रूपेश को 25 लाख रुपये और जगपाल ने बेटी स्वाति के लिए 30 लाख रुपये दिए। खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया।

तीसरे आरोपित रामपाल सिंह ने पूछताछ में बताया कि उसने परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर बेटी तृप्ति के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इन दस्तावेजों के आधार पर तृप्ति का हरिद्वार स्थित जीएमसी मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया।

गलत पते से खुला था फर्जीवाड़ा
13 सितंबर को रायपुर थाने में मुकदमा संख्या 380/26 और क्लेमेंटटाउन थाने में मुकदमा संख्या 86/26 दर्ज किया गया था। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआइटी गठित की गई। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों पर दर्ज पते गलत पाए गए। इसके बाद संबंधित शिक्षण संस्थानों से प्रवेश संबंधी अभिलेख कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाए गए।

इस मामले में एसआइटी पहले रूपेश पंडित, अरविंद कुमार, धीरज कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार और गिरीश सिंह समेत अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। संजय कुमार और गिरीश सिंह पर स्वाति, परी और खुशी के फर्जी आधार, मूल निवास तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराने में सहयोग का आरोप है। पुलिस धनराशि के लेन-देन और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है।

21 सीट आवंटन अब तक निरस्त
एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने प्रमाणपत्रों के सत्यापन में अनियमितता मिलने पर अब तक 21 अभ्यर्थियों का सीट आवंटन निरस्त किए जाने की जानकारी दी थी। इनमें हरिद्वार, श्रीनगर और हल्द्वानी समेत विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें शामिल हैं। तीन अतिरिक्त सीटें निरस्त किए जाने के बाद 30 सितंबर तक संख्या 19 पहुंची थी। सात अक्टूबर को एक और सीट निरस्त होने के बाद आंकड़ा 20 हो गया था। इसके अतिरिक्त, अल्मोड़ा स्थित सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान में अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों की श्रेणी के कथित फर्जी प्रमाणपत्र पर दाखिला लेने वाले बाजपुर निवासी मोहम्मद शमी का प्रवेश भी निरस्त किया गया। कॉलेज की शिकायत पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।

754 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच, हाई कोर्ट ने भी दिए निर्देश
विश्वविद्यालय ने प्रथम और द्वितीय चरण में प्रवेश लेने वाले तथा फ्लोट श्रेणी के अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज संबंधित जिलों को सत्यापन के लिए भेजे थे। हालिया रिपोर्टों में 754 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच का उल्लेख है। वहीं, संदिग्ध प्रमाणपत्रों से जुड़े व्यापक मामले में 770 अभ्यर्थियों की जांच का विषय भी सामने आया है। दोनों आंकड़ों का दायरा अलग हो सकता है; इन्हें एक ही सूची का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 15 अक्टूबर को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति को प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करनी है। गृह और राजस्व विभागों को आदेश की प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर समिति गठित करने तथा छह महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

काउंसलिंग का स्ट्रे राउंड भी पूरा
एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने नीट-यूजी 2026 के स्ट्रे वैकेंसी राउंड का परिणाम 22 अक्टूबर को जारी किया था। आवंटित सीटों पर प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर निर्धारित थी। इससे पहले तीन चरणों की काउंसलिंग हो चुकी थी। तीन चरणों के बाद 145 एमबीबीएस और बीडीएस सीटें रिक्त होने की रिपोर्ट आई थी, जिनमें 116 एमबीबीएस और 29 बीडीएस सीटें शामिल थीं। यह आंकड़ा काउंसलिंग से पहले उपलब्ध रिक्त सीटों का है, न कि अब तक आवंटित कुल सीटों का।

कुमाऊं में भी कार्रवाई जारी
ऊधमसिंहनगर के बाजपुर और गदरपुर में फर्जी प्रमाणपत्रों से जुड़े मामलों में पहले सात गिरफ्तारियों और 30 आरोपितों के खिलाफ मुकदमों की जानकारी सामने आई थी। बाजपुर में मोहम्मद आलम, श्याम बिहारी भोजवाल, शिवम माथुर, अर्चना और रोहित की गिरफ्तारी हुई थी। गदरपुर में शुभम हुड़िया और निखिल वर्मा गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस ने संबंधित मामलों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और एसएसडी भी कब्जे में लिए थे।

बाजपुर में अल-सामी फाजिल के जाति प्रमाणपत्र में कथित तौर पर फर्जी गृहकर प्रमाणपत्र और रसीद इस्तेमाल करने का मामला भी सामने आया था। गदरपुर में राजस्व निरीक्षक विनोद कुमार की शिकायत पर 25 सितंबर को मुकदमा दर्ज किया गया था। रुद्रपुर में दीपांशु, दक्ष चतुर्वेदी और शुभम हुड़िया के खिलाफ भी प्रमाणपत्रों में अनियमितता को लेकर कार्रवाई हुई थी।

प्रमाणपत्र सत्यापन में लापरवाही के आरोप में देहरादून में जगदीश राठौर और डिंपल तथा ऊधमसिंहनगर में बाजपुर के राजस्व उपनिरीक्षक मोहम्मद अजमल खान और गदरपुर के राजस्व उपनिरीक्षक सरताज अली को भी निलंबित कर दिया गया था।

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