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हेलीकॉप्टर हादसे में यूकाडा का बड़ा आरोप, कंपनी ने खतरा जानकर भी यात्रियों को मौत के मुहं में धकेला

यूकाडा ने कहा, मौसम के ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए हेली सेवाओं की उड़ान पर रोक का था आदेश, कंपनी बोली-आदेश नहीं मिला

Rajkumar Dhiman, Dehradun: बदरीनाथ घाटी में ट्रांस भारत एविएशन के हेलिकॉप्टर हादसे में छह लोगों की मौत के बाद चारधाम हवाई सेवाओं के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के दिन मौसम खराब होने का ऑरेंज अलर्ट जारी था। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने भी मौसम की स्थिति को देखते हुए चारधाम मार्ग पर सभी हेलिकॉप्टर सेवाएं रोकने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर उड़ान भरकर बदरीनाथ से देहरादून के लिए रवाना हुआ। प्राधिकरण ने इसे आदेश की अनदेखी बताते हुए कंपनी पर सवाल उठाए हैं। अब जांच का दायरा केवल हादसे के कारणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि उड़ानें रोकने के आदेश के बाद ट्रांस भारत एविएशन के अलावा किसी अन्य हेली सेवा प्रदाता कंपनी ने भी अपने हेलिकॉप्टर संचालित किए थे या नहीं।

यूकाडा के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय टोलिया के अनुसार, शुक्रवार को खराब मौसम को देखते हुए चारधाम मार्ग पर सभी हवाई सेवाएं रोकने का आदेश जारी किया गया था। यह निर्देश प्राधिकरण के संचालन प्रमुख ग्रुप कैप्टन अमित शर्मा (सेवानिवृत्त) ने जारी किए थे। बताया गया है कि यह आदेश हेलिकॉप्टर हादसे से करीब एक घंटे पहले दिया गया था। इसके बावजूद ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने उड़ान संचालित की। टोलिया ने स्पष्ट किया कि हेलिकॉप्टर सेवाओं के संचालन में यूकाडा नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्धारित नियमों का पालन करता है। मौसम खराब होने पर नियमानुसार उड़ानें रोकने का निर्णय लिया गया था। ऐसे में अब यह जांच की जा रही है कि कंपनी तक आदेश पहुंचा था या नहीं, उसके बावजूद उड़ान क्यों संचालित की गई और इस मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

कंपनी का दावा, आदेश की जानकारी नहीं थी
यूकाडा के आरोपों पर ट्रांस भारत एविएशन के उड़ान संचालन निदेशक एस. भट्टाचार्य ने कहा कि वह दिल्ली में हैं और उन्हें उड़ानें रोकने संबंधी ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और इस संबंध में यूकाडा ही जानकारी दे सकता है। कंपनी के इस बयान के बाद जांच में एक अहम सवाल और जुड़ गया है। यह पता लगाया जाएगा कि यूकाडा की ओर से जारी आदेश संबंधित हेली कंपनियों और उनके संचालन कर्मचारियों तक किस माध्यम से पहुंचाया गया था। साथ ही आदेश जारी होने के बाद ट्रांस भारत एविएशन के अलावा अन्य हेलिकॉप्टर संचालक कंपनियों ने भी उड़ानें संचालित की थीं या नहीं। यदि किसी अन्य कंपनी ने भी प्रतिबंध के बावजूद उड़ान भरी तो उसकी परिस्थितियों और जिम्मेदारी की भी जांच होगी।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो और डीजीसीए की टीमें कर रहीं जांच
हेलिकॉप्टर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के अधिकारियों की टीम उत्तराखंड पहुंच गई है। टीम घटनास्थल पर पहुंचकर दुर्घटना से जुड़े तकनीकी और परिचालन संबंधी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच में मौसम की स्थिति, उड़ान से संबंधित अभिलेख, हेलिकॉप्टर के संचालन की परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों के पालन जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही यूकाडा के उड़ान रोकने के आदेश और उसके बाद हुए हवाई संचालन की भी जांच होगी। जांच दल यह भी पता लगाएगा कि आदेश की सूचना संबंधित कंपनियों को कब और किस माध्यम से दी गई तथा उसके बाद किन कंपनियों ने उड़ानें संचालित कीं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

आठ किलोमीटर पैदल चलकर घटनास्थल पहुंची बचाव दल की टीमें
बदरीनाथ के निकट दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में हुए इस हादसे में हेलिकॉप्टर के चालक और कर्नाटक के पांच श्रद्धालुओं समेत छह लोगों की मौत हुई थी। शनिवार सुबह सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों ने दोबारा तलाशी एवं बचाव अभियान शुरू किया। चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार, घटनास्थल तक पहुंचने के लिए बचाव दल को करीब आठ किलोमीटर पैदल पहाड़ी रास्ते पर चलना पड़ा। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव अभियान में काफी चुनौतियां आईं। मृतकों के पार्थिव शरीर पहले गोविंदघाट और उसके बाद देहरादून लाए गए। देहरादून में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की कार्रवाई की जा रही है।

छह मृतकों के पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से जोशीमठ पहुंचाए, हेलिकॉप्टर से एम्स ऋषिकेश भेजे
जोशीमठ के समीप हुए हेलिकॉप्टर हादसे में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के पार्थिव शरीर रविवार को घटनास्थल से निकालकर सड़क मार्ग तक पहुंचा दिए गए। दुर्गम और ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, जिला प्रशासन और वन विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया।

बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने और पार्थिव शरीरों को बाहर निकालने के लिए कठिन पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलना पड़ा। तमाम चुनौतियों के बीच टीमों ने अभियान पूरा करते हुए सभी छह मृतकों के पार्थिव शरीर सुरक्षित बाहर निकाले। इसके बाद उन्हें सड़क मार्ग से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), जोशीमठ पहुंचाया गया। जोशीमठ में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सभी पार्थिव शरीरों को एनटीपीसी हेलीपैड से हेलिकॉप्टर के माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश भेज दिया गया।

यहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपे जाएंगे। हादसे के बाद शुरू किए गए बचाव अभियान में विभिन्न सुरक्षा और राहत एजेंसियों के बीच समन्वय से दुर्गम क्षेत्र में अभियान को अंजाम दिया गया। छह लोगों की मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

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