सरकार कर रही पहाड़ से धोखा, गांव में सिलेंडर की 45 दिन की सीमा पर हरक ने उठाए सवाल
सरकार कर रही पहाड़ से धोख, गांव में सिलेंडर की 45 दिन की सीमा पर हरक ने उठाए सवाल

Rajkumar Dhiman, Dehradun: पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत ने राज्य सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर शहरी और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग-अलग समय सीमा तय करना पहाड़ी जनता के साथ नाइंसाफी है।
देहरादून स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. रावत ने कहा कि शहरों में गैस बुकिंग के बाद सिलिंडर की आपूर्ति की समय सीमा 25 दिन निर्धारित है, जबकि गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए यह अवधि 45 दिन रखी गई है। उनका कहना था कि पर्वतीय इलाकों में पहले से ही लोगों को परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी झेलनी पड़ती है, ऐसे में गैस आपूर्ति में इतना लंबा इंतजार करवाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में गैस सिलिंडर की कीमत में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी से आम लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
डॉ. रावत ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ऊर्जा संसाधनों से जुड़े फैसलों का सीधा असर देश की जनता पर पड़ रहा है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि पहाड़ी क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार कुछ जिलों में इस कोष के वितरण में असमानता देखने को मिल रही है। आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि चंपावत और उधमसिंह नगर में कुछ व्यक्तियों को हर साल दो से तीन लाख रुपये तक की सहायता मिल रही है, जबकि कई जरूरतमंद लोगों को मात्र तीन हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं।
डॉ. रावत ने कहा कि इस तरह की स्थिति सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और सहायता वितरण में पारदर्शिता तथा समानता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस मौके पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी, लालचंद शर्मा समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।



