नकल माफिया पर ईडी का शिकंजा, 63.30 लाख की संपत्ति कुर्क, रसोइये से नकल माफिया बनने तक की पूरी कहानी
अवैध कमाई को वैध बनाने को लिया था कृषि आय का सहारा, ईडी ने खोल दी परतें

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड के बहुचर्चित UKSSSC भर्ती परीक्षा पेपर लीक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत की 63.30 लाख रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से (Provisional Attachment) जब्त कर ली हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। ED का दावा है कि हाकम सिंह ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध रकम को बैंक खातों, कृषि आय और संपत्ति खरीद के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कुछ समय पहले ही स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से पहले हाकम सिंह को दोबारा गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार वह अपने साथी पंकज गौड़ के साथ अभ्यर्थियों से 12 से 15 लाख रुपये लेकर चयन कराने का झांसा दे रहा था। इस तरह ED की संपत्ति कुर्की और हालिया गिरफ्तारी ने साफ कर दिया है कि हाकम सिंह पर अब आर्थिक और आपराधिक, दोनों मोर्चों पर शिकंजा कस चुका है।
ED की जांच में क्या मिला?
ED के अनुसार जांच की शुरुआत रायपुर थाने में दर्ज 2021 की स्नातक स्तरीय (VDO/VPDO) परीक्षा पेपर लीक एफआईआर तथा विजिलेंस सेक्टर, देहरादून द्वारा 2016 की VDO/VPDO परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़ी एफआईआर के आधार पर हुई।
जांच में सामने आया कि हाकम सिंह रावत, परीक्षा कराने वाली प्रिंटिंग एजेंसी RMS Techno Solutions Pvt. Ltd. के कर्मचारियों, कुछ लोक सेवकों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर संगठित गिरोह चला रहा था। यह गिरोह गोपनीय प्रश्नपत्र लीक करता, परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर करता और अभ्यर्थियों से भारी रकम वसूलता था।
ED के मुताबिक, लीक प्रश्नपत्र बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाते थे और इस पूरे नेटवर्क से प्राप्त धन से चल-अचल संपत्तियां खरीदी गईं।
95 लाख रुपये की अवैध कमाई, कृषि आय का सहारा
ED की वित्तीय जांच में दावा किया गया कि हाकम सिंह को अभ्यर्थियों से करीब 95 लाख रुपये प्राप्त हुए। उसके बैंक खातों में घोषित आय से कहीं अधिक नकद जमा मिला।
आयकर रिटर्न की जांच में यह भी सामने आया कि उसने कृषि आय दिखाई, लेकिन वास्तविक कृषि गतिविधियां उस आय के अनुरूप नहीं थीं। ED का आरोप है कि कृषि आय का इस्तेमाल केवल अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, अवैध कमाई को बैंक खातों में जमा कर, आयकर रिटर्न में गलत विवरण देकर और कृषि आय के दावे के जरिए वित्तीय प्रणाली में समाहित (Layering और Integration) किया गया।
14 ठिकानों पर छापे, दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले
ED ने बताया कि 14 परिसरों पर तलाशी के दौरान दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड और नकदी से जुड़े अहम साक्ष्य मिले।
इसके अलावा PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों, बैंक खातों के विश्लेषण और SIT की चार्जशीटों ने हाकम सिंह एवं उसके सहयोगियों की भूमिका की पुष्टि की।
ED पहले ही विशेष PMLA अदालत, देहरादून में अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल कर चुकी है। इसमें RMS Techno Solutions Pvt. Ltd. के कर्मचारी, लोक सेवक, बिचौलिए और अन्य आरोपित शामिल हैं।
जेल से बाहर आने के बाद फिर लगे आरोप और हुई गिरफ्तारी
सितंबर 2025 में प्रस्तावित UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा से पहले देहरादून पुलिस और STF ने हाकम सिंह को फिर गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार, वह पंकज गौड़ के साथ मिलकर छह अभ्यर्थियों से संपर्क में था। योजना यह थी कि यदि अभ्यर्थी अपने दम पर चयनित हो जाएं तो उनसे 12–15 लाख रुपये वसूले जाएं और यदि चयन न हो तो अगली परीक्षा में मदद का झांसा देकर रकम समायोजित करने का वादा किया जाए।
दोनों को पटेलनगर क्षेत्र से गिरफ्तार कर उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में इस परीक्षा की सूचित भंग करने के आरोप एक असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान और उसके साथ खालिद पर भी लगे थे। जिनकी गिरफ्तारी के साथ परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई गई।
रसोइये से ‘नकल माफिया’ बनने तक
हाकम सिंह रावत का सफर एक साधारण कुक की नौकरी से शुरू हुआ। उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र का रहने वाला हाकम एक प्रशासनिक अधिकारी के घर रसोइये के रूप में काम करता था। बाद में हरिद्वार में उसकी आपराधिक नेटवर्क से पहचान हुई और यहीं से वह उत्तर प्रदेश के नकल गिरोहों के संपर्क में आया।
2008 में उसने पंचायत राजनीति में कदम रखा और 2019 में जिला पंचायत सदस्य बना। राजनीतिक प्रभाव, सरकारी ठेकों और प्रशासनिक संपर्कों ने उसका नेटवर्क मजबूत किया। इसी दौरान उसने सांकरी में आलीशान रिसॉर्ट समेत कई संपत्तियां खड़ी कीं।
2022 में खुला सबसे बड़ा राज
जुलाई 2022 की UKSSSC स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक ने पूरे राज्य को हिला दिया। STF जांच में हाकम सिंह का नाम मुख्य आरोपित के रूप में सामने आया और 13 अगस्त 2022 को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने उसे पार्टी से निष्कासित कर दिया। गैंगस्टर एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए। बाद में प्रशासन ने उसके रिसॉर्ट पर अतिक्रमण की कार्रवाई भी की।
5 सितंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट से उसे जमानत मिली, लेकिन हालिया गिरफ्तारी और अब ED की कार्रवाई से साफ है कि जांच एजेंसियां उसके पूरे आर्थिक नेटवर्क को भी खंगाल रही हैं।
भर्ती घोटाले की पूरी परतें
ED के अनुसार यह केवल 2021 के पेपर लीक तक सीमित मामला नहीं है। जांच में 2016 और 2021 की VDO/VPDO परीक्षाओं में OMR शीट से छेड़छाड़, गोपनीय प्रश्नपत्र लीक, अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने और संगठित आर्थिक अपराध के साक्ष्य मिले हैं।
एजेंसी का कहना है कि इस पूरे षड्यंत्र से आरोपितों को अवैध आर्थिक लाभ हुआ, जबकि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और हजारों युवाओं के भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंचा।
हाकम सिंह प्रकरण: एक नजर में टाइमलाइन
2000 के दशक की शुरुआत – प्रशासनिक अधिकारी के यहां रसोइये के रूप में काम।
2008 – पंचायत राजनीति में प्रवेश।
2019 – जिला पंचायत सदस्य बना।
2016–2021 – VDO/VPDO परीक्षाओं में कथित
अनियमितताओं का दौर।
जुलाई 2022 – UKSSSC स्नातक स्तरीय पेपर लीक उजागर।
13 अगस्त 2022 – STF ने पहली बार गिरफ्तार किया।
2022 – भाजपा से निष्कासन, गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे।
2022 – रिसॉर्ट पर अतिक्रमण की कार्रवाई।
5 सितंबर 2023 – सुप्रीम कोर्ट से जमानत।
हालिया प्रकरण (2026) – स्नातक स्तरीय परीक्षा से पहले फिर गिरफ्तारी, 12–15 लाख रुपये लेकर चयन कराने की साजिश का आरोप।
1 अगस्त 2026 – ED ने PMLA के तहत 63.30 लाख रुपये की संपत्ति कुर्क की, 95 लाख रुपये की कथित अवैध कमाई और मनी लॉन्ड्रिंग का दावा किया, जबकि जांच अभी भी जारी है।



