DehradunUttarakhandराजनीति

क्षेत्रीय और जातीय संतुलन क्या पोर्टफोलियो में भी दिखेगा, कैसे साधेगी नए नवेले मंत्रियों को धामी सरकार

नवनियुक्त मंत्रियों को विभागों के बंटवारे पर टिकी सभी की निगाहें, कौन मंत्री किए जाएंगे हल्के?, किया सीएम अपना बोझ करेंगे कम?

Rajkumar Dhiman, Dehradun: विधानसभा चुनाव की दहलीज से महज कुछ कदम दूर धामी सरकार ने कसरत, कयासों और कहासुनी के लंबे दौर के बाद आखिरकार कैबिनेट का विस्तार कर ही डाला। ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल से मंत्री पद छिनने के करीब एक साल बाद एक साथ 05 विधायकों को राज्य कैबिनेट में जगह देकर मंत्री बनाया गया है। हरिद्वार जिले से एक साथ दो विधायक मदन कौशिक (हरिद्वार सीट) और प्रदीप बत्रा (रुड़की सीट) मंत्री बनाए गए हैं। दूसरी तरफ गढ़वाल के लगभग सुदूर जिले रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी की झोली में भी मंत्री पद डाला गया। इस तरह पहाड़ और मैदान के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया।

देहरादून के राजपुर क्षेत्र से विधायक खजान दास को भी मंत्री बनाकर जातीय समीकरण साधने का काम भी धामी सरकार ने कर डाला। इसके साथ ही भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद देकर कुमाऊं की राजनीती संतुलन बनाने की कोशिश की गई। खैर, मंत्री पद बांटे जा चुके हैं, लेकिन इसके साथ ही कयास और इंतजार का एक नया दौर भी शुरू हो चुका है। वह यह कि पोर्टफोलियो क्या होंगे?

क्या धामी सरकार मंत्री पदों की भांति ही पोर्टफोलियो वितरण में सभी समीकरणों जैसे पहाड़, मैदान और जीतीय समीकरणों को ध्यान में रखेगी। वैसे भी पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के वित्त, शहरी विकास और आवास जैसे विभागों का भारीभरकम बोझ स्वयं सीएम धामी ने वहन कर लिया था। इसके अलावा अन्य मंत्री भी तमाम विभागों के बोझ तले नजर आते हैं। पूर्व मंत्री चंदन रामदास के निधन के बाद भी यह बोझ बढ़ा था।

विभागों के बोझ को अब बांट लिया जाएगा, लेकिन किसे क्या जिम्मेदारी मिलेगी और किसके हिस्से क्या आएगा, इसका आकलन भी राजनितिक गलियारों में तेज हो गया है। अहम विभागों को झटकने के लिए हरिद्वार जिले से खासा जोर नजर आ रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि क्या मदन कौशिक अपने शहरी विकास और आवास जैसे पूर्ववर्ती विभाग को वापस हासिल कर सकते हैं या इस बार उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी। इसी तरह वित्त जैसे अहम विभाग की मजबूत जिम्मेदारी के लिए सरकार किसका कंधा तलाश करेगी?

क्या मुख्यमंत्री यह जिम्मेदारी किसी भरोसेमंद को सौंपेंगे? रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा किस भूमिका में फिट हो सकते हैं या रुद्रप्रयाग से भारत चौधरी और भीमताल से राम सिंह को क्या मिलने वाला है, इसके अनुमान भी लगाए जाने लगे हैं। वहीं, परिवहन जैसे विभाग में सरकार अब तक की परंपरा का निर्वहन करेगी या सीएम धामी के मन में कुछ और है? इनके सभी सवालों के जवाब जल्द मिलेंगे, लेकिन राजनितिक धुरंदर यह देखने को बेचैन हैं कि विभागों के आवंटन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कौन सा समीकरण साधते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button