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कोटद्वार बस अड्डे पर 16 साल की किशोरी अकेली मायूस हालत में मिली, एक डांट ने पहुंचाया यहां

सजग पुलिसिंग का असर: 72 घंटे में नाबालिग बरामद, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की त्वरित कार्रवाई से परिवार में लौटी मुस्कान

Round The Watch News: आजकल के बच्चे भी गजब करते हैं। बिना सोचे समझे ऐसा कदम उठा देते हैं, जो उनके पूरे जीवन पर भारी पड़ सकता है। कोटद्वार बस अड्डे पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जहां 16 साल की एक किशोरी संदिग्ध और मायूस हालात में मिली। हालांकि, सतर्क पुलिसिंग और तेज़ समन्वय से किशोरी के साथ ही उसके परिवार की मुस्कान लौट आई। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और स्थानीय पुलिस टीम की संयुक्त कार्रवाई से लापता नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

बस अड्डे पर मिली लावारिस, तुरंत हुआ रेस्क्यू
चौकी बाजार, कोतवाली कोटद्वार पुलिस को बस अड्डा कोटद्वार पर एक 16 वर्षीय बालिका संदिग्ध अवस्था में अकेली मिली। बिना देर किए पुलिस ने एएचटीयू टीम को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर चौकी लाया।

पहचान में उलझन, लेकिन पुलिस ने नहीं छोड़ी कड़ी
पूछताछ में बालिका ने अपना नाम नूर फलक बताते हुए बिहार/मुरादाबाद निवासी होना बताया और घर से नाराज होकर आने की बात कही। मुरादाबाद पुलिस से संपर्क साधा गया, लेकिन शुरुआती प्रयासों में परिजनों तक पहुंच नहीं बन सकी।

CWC के निर्देश पर सुरक्षित ठिकाने में रखा गया
बालिका को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) कोटद्वार के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे सुरक्षा के मद्देनज़र राजकीय महिला एवं किशोरी पुनर्वास केंद्र, सिंबलचौड़ में रखा गया। यहां काउंसलिंग के दौरान मामले में नया मोड़ आया।

काउंसलिंग में खुला राज, श्रीनगर से जुड़ा परिवार
काउंसलिंग के दौरान बालिका ने बताया कि उसका परिवार पिछले 12-13 वर्षों से श्रीनगर में रह रहा है। इसके बाद पुलिस ने श्रीनगर पुलिस से संपर्क साधा और आखिरकार परिजनों तक पहुंचने में सफलता मिली।

मोबाइल पर डांट बनी घर छोड़ने की वजह
28 मार्च 2026 को परिजन—पिता जावेद और माता नूर चमन—कोटद्वार पहुंचे। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर डांट-फटकार के बाद बालिका नाराज होकर घर छोड़कर चली गई थी। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे और गुमशुदगी दर्ज कराने भी गए थे।

काउंसलिंग के बाद परिवार को सौंपी गई बेटी
महिला उपनिरीक्षक सुमन लता ने पुनर्वास केंद्र में बालिका और परिजनों की काउंसलिंग की। इसके बाद CWC के आदेशानुसार नूर फलक को सकुशल उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। साथ ही परिवार को भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए आवश्यक हिदायतें भी दी गईं।

संदेश साफ: सतर्कता और संवाद से टल सकते हैं बड़े खतरे
यह मामला न सिर्फ पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि परिवार में संवाद की कमी और छोटी नाराजगी भी बच्चों को बड़े जोखिम में डाल सकती है। समय रहते पुलिस की मुस्तैदी ने एक संभावित गंभीर स्थिति को टाल दिया।

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