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इनकम टैक्स ने आईजी कार्यालय पर मारा छापा, 30 लाख से अधिक की रजिस्ट्रियों की जांच

रियल एस्टेट में छिपाया काला धन आएगा बाहर, खुल सकती है मंत्री-विधायकों और अफसरों की कुंडली

Rajkumar Dhiman, Dehradun: राज्य में काले धन को टैक्स के रूप में बाहर निकालने के लिए आयकर विभाग ने इस बार सीधे स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के शीर्ष दफ्तर पर दस्तक दी। इंटेलिजेंस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग की टीम ने देहरादून स्थित महानिरीक्षक (आईजी) स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय में पहुंचकर उच्च मूल्य की संपत्ति रजिस्ट्रियों की गहन पड़ताल की। दो दिन पहले की गई इस छापेमारी के बाद अब रिपोर्ट भी लगभग तैयार कर दी गई है।
30 लाख से ऊपर की रजिस्ट्रियां जांच के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, टीम ने खासतौर पर 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की रजिस्ट्रियों का डेटा खंगाला। आशंका है कि कई मामलों में इन सौदों की जानकारी आयकर विभाग को पूरी तरह नहीं दी गई, जबकि नियमों के अनुसार ऐसी डील्स की रिपोर्टिंग अनिवार्य होती है।
रियल एस्टेट में काले धन का खेल कैसे?
जांच एजेंसियों का मानना है कि संपत्ति खरीद-फरोख्त में अक्सर बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच बड़ा अंतर होता है। रजिस्ट्री सर्किल रेट पर कराई जाती है, जबकि वास्तविक भुगतान अधिक होता है—और यही अंतर नकद में लिया-दिया जाता है। इस तरह न सिर्फ स्टांप शुल्क की चोरी होती है, बल्कि आयकर भी छिपा लिया जाता है।
पांच साल का रिकॉर्ड खंगाल रही टीम
बताया जा रहा है कि जांच का दायरा व्यापक है और पिछले करीब पांच वर्षों में हुई हजारों रजिस्ट्रियां इसकी जद में आ गई हैं। अधिकारी सुबह से देर रात तक रिकॉर्ड खंगालते रहे। फिलहाल जांच में क्या ठोस सामने आया है, यह सार्वजनिक नहीं किया गया है। विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सहकारी बैंकों में गड़बड़ी का दायरा बढ़ा
जांच सिर्फ रजिस्ट्रियों तक सीमित नहीं रही। आयकर विभाग ने गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के कुल पांच सहकारी बैंकों की भी पड़ताल की थी। इनमें 3000 करोड़ रुपये से अधिक ऐसे लेनदेन सामने आए हैं, जिनकी सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। कई मामलों में पैन नंबर तक दर्ज नहीं पाए गए।
आयकर विभाग अब इन लेनदेन से जुड़े खातों और व्यक्तियों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर रहा है। रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे संभव माने जा रहे हैं। रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर में छिपे लेनदेन अब आयकर की पैनी नजर से नहीं बच पाएंगे।

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