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कोर्ट ने भाजपा के पूर्व विधायक को जेल भेजा, अंकिता भंडारी केस से जुड़ा है वाद

बुग्गावाला क्षेत्र से गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के समक्ष किया गया पेश, नहीं मिली जमानत

Amit Bhatt, Dehradun: देहरादून की एक अदालत ने अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े विवादित मामले में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। सोमवार को पेशी के दौरान अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी। इस बीच पुलिस जांच में मामले में एक्सटॉरशन (वसूली/ब्लैकमेलिंग) से संबंधित धाराएं भी जोड़ दी गई हैं।

बुग्गावाला से हुई गिरफ्तारी
देहरादून पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की संयुक्त टीम ने रविवार को हरिद्वार जिले के बुग्गावाला क्षेत्र से सुरेश राठौर को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम पर गंभीर आरोपों से जुड़े प्रकरण में की गई।

एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल के अनुसार, दुष्यंत गौतम की शिकायत पर जनवरी में दर्ज मुकदमे में नामजद सुरेश राठौर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आगे कार्रवाई की जाएगी।

ऑडियो-वीडियो वायरल करने का आरोप
मामले में सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर पर सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ ऑडियो-वीडियो सामग्री प्रसारित करने का आरोप है। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने 5 जनवरी को देहरादून के डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में भाजपा नेताओं का नाम लेकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की गई और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया गया। शिकायत के अनुसार, वीडियो में प्रयुक्त भाषा और आरोपों से प्रदेश में तनाव, उपद्रव तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई।

जांच के दौरान जोड़ी गई एक्सटॉरशन की धारा
पुलिस जांच के दौरान मुकदमे में एक्सटॉरशन से जुड़ी धाराएं भी शामिल की गई हैं। पुलिस ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि सुरेश राठौर कथित तौर पर पार्टी से निष्कासन समाप्त कराने और पुनः राजनीतिक पद प्राप्त करने की मंशा से इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल थे।

पुलिस का तर्क है कि यदि उद्देश्य दबाव बनाना या लाभ हासिल करना नहीं होता तो संबंधित वीडियो में नेताओं के नाम लेकर उन्हें रिकॉर्ड करने और बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित करने जैसी परिस्थितियां सामने नहीं आतीं। इसी आधार पर वसूली अथवा ब्लैकमेलिंग से संबंधित धाराएं जोड़ी गई हैं।

चार एफआईआर, हाईकोर्ट से आंशिक राहत
इस पूरे विवाद को लेकर सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के खिलाफ हरिद्वार और देहरादून के चार अलग-अलग थानों झबरेड़ा, बहादराबाद, नेहरू कॉलोनी और डालनवाला में मुकदमे दर्ज किए गए थे।

इन एफआईआर को चुनौती देते हुए सुरेश राठौर ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए बहादराबाद और झबरेड़ा थानों में दर्ज दो मामलों को एक ही घटना से संबंधित क्रमिक (सक्सेसिव) एफआईआर मानते हुए निरस्त कर दिया।

हालांकि, अदालत ने नेहरू कॉलोनी और डालनवाला थानों में दर्ज दो अन्य मुकदमों को रद्द करने से इनकार कर दिया और उनकी जांच जारी रखने की अनुमति दी। इन्हीं लंबित मामलों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही थी।

अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
हाईकोर्ट से दो मामलों में राहत मिलने के बावजूद शेष मुकदमों की जांच जारी रही। इसी क्रम में पुलिस ने निगरानी के बाद राठौर को बुग्गावाला से गिरफ्तार किया। सोमवार को देहरादून की अदालत में पेशी के दौरान उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए गए।

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
यह पूरा विवाद सितंबर 2022 के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े आरोपों और कथित ‘वीआईपी एंगल’ की चर्चाओं के संदर्भ में सामने आया था। पौड़ी गढ़वाल निवासी 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं। 24 सितंबर 2022 को उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और कर्मचारी अंकित गुप्ता को अदालत पहले ही दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है।

सीबीआई कर रही ‘वीआईपी एंगल’ की जांच
अंकिता भंडारी मामले में लंबे समय से चर्चा में रहे कथित ‘अज्ञात वीआईपी’ एंगल की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच के हाथों में है। सीबीआई इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच कर रही है। मुकदमे के बाद दो सदस्यीय सीबीआई टीम उत्तराखंड भी पहुंची थी और स्थानीय एसआईटी से केस डायरी, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लिए थे। एजेंसी का उद्देश्य उन आरोपों और दावों की जांच करना है जिनके आधार पर लंबे समय से ‘वीआईपी एंगल’ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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