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फर्जी गन लाइसेंस का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, खाते में पाए गए 1.70 करोड़

शाहजहांपुर के बदमाश सदानंद को उत्तराखंड एसटीएफ ने दबोचा, खुला पूरा खेल

Amit Bhatt, Dehradun: मुख्यमंत्री के “अपराध मुक्त उत्तराखंड” विजन के तहत चलाए जा रहे अभियान में उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता मिली है। राज्य में फर्जी शस्त्र लाइसेंसों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच STF ने फर्जी हथियार लाइसेंस रैकेट के मास्टरमाइंड सदानंद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी के बैंक खाते में फर्जी और कूटरचित शस्त्र लाइसेंसों के कारोबार से करीब 1 करोड़ 70 लाख रुपये की धनराशि पहुंची थी।

STF ने आरोपी को 23 जून 2026 को रुद्रपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया। सदानंद शर्मा पहले भी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और शाहजहांपुर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुका है और उसके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।

अब तक 14 अवैध हथियार, 355 कारतूस और कई फर्जी लाइसेंस बरामद
STF के अनुसार राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की वैधता और सत्यता की जांच की जा रही है। इसी अभियान के तहत 4 जून 2026 को काशीपुर कोतवाली में FIR संख्या 213/2026 दर्ज कराई गई थी।

इस मामले की जांच के दौरान अब तक STF ने:
-14 अवैध शस्त्र बरामद किए
-355 जिंदा कारतूस जब्त किए
-कई फर्जी और कूटरचित शस्त्र लाइसेंस बरामद किए
-09 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा
-राज्य में इस संबंध में 03 मुकदमे दर्ज कराए

बरामद हथियारों में:
-02 ऑटोमैटिक पम्प एक्शन गन
-02 रायफल
-09 पिस्टल
-01 रिवॉल्वर शामिल हैं।

ऐसे चलता था फर्जी लाइसेंसों का खेल
एसएसपी STF अजय सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सदानंद शर्मा पुत्र रामाधर शर्मा निवासी ग्राम अनावा, थाना पुवायां, जिला शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने का मुख्य सरगना है।

जांच में सामने आया है कि आरोपी ने बड़ी संख्या में फर्जी लाइसेंस सौरभ अग्रवाल और उसके भाई गौरव अग्रवाल के माध्यम से उधम सिंह नगर में तैयार कराए और लोगों को उपलब्ध कराए।

आरोप है कि शाहजहांपुर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय में कार्यरत कुछ संविदाकर्मियों की मिलीभगत से ऐसे पुराने UIN नंबर, जिनका मूल रिकॉर्ड गायब हो चुका था, उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी तरीके से अपलोड कराया गया। इसके बाद उन्हीं नंबरों के आधार पर लाइसेंसों को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।

कई लोगों से खाते में पहुंची रकम
जांच के दौरान STF को आरोपी के बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। पुलिस के अनुसार सदानंद शर्मा के खाते में सौरभ अग्रवाल, मोहित अग्रवाल, करन सिंह, जतिन कांडपाल, शुभम अग्रवाल सहित कई अन्य लोगों से धनराशि प्राप्त हुई।

STF का कहना है कि जांच में ऐसे अनेक अन्य लोगों की जानकारी भी मिली है जिनके फर्जी शस्त्र लाइसेंस सदानंद शर्मा द्वारा तैयार कराए गए थे। पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच जारी है।

पहले भी जा चुका है जेल
सदानंद शर्मा का आपराधिक इतिहास भी लंबा है। उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहले से कई मामले दर्ज हैं। इन मामलों में आरोपी का नाम पहले से दर्ज है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं।

दर्ज मुकदमे
1. FIR संख्या 1681/2019
थाना कविनगर, गाजियाबाद
धारा 420, 467, 468, 471, 120B IPC

2. FIR संख्या 635/2019
थाना पुवायां, शाहजहांपुर
धारा 420, 467, 468, 471 IPC

3. FIR संख्या 2110/2019
थाना कविनगर, गाजियाबाद
धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट

हजारों लाइसेंसों की जांच जारी
एसएसपी STF अजय सिंह ने बताया कि राज्य में बाहरी राज्यों से स्थानांतरित होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों और उनके धारकों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे भी वैधानिक कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि फर्जी शस्त्र लाइसेंस राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में उत्तराखंड पुलिस जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कठोर कार्रवाई कर रही है।

फर्जी लाइसेंस धारकों को चेतावनी
STF ने स्पष्ट किया है कि बाहरी राज्यों से फर्जी लाइसेंस बनवाकर उत्तराखंड में अवैध हथियार रखने और बाद में उन्हें वैध दिखाने की कोशिश करने वाले लोग एजेंसी के रडार पर हैं। ऐसे लोगों को अभी भी मौका दिया जा रहा है कि वे स्वयं अपने हथियार और लाइसेंस पुलिस के समक्ष सरेंडर करें।

सूचना देने वालों की पहचान रहेगी गोपनीय
STF ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंसों के बारे में कोई जानकारी हो तो तत्काल STF को सूचित करें। सूचनाकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। एसटीएफ को इस संपर्क नंबर 9412029536 पर सूचना दी जा सकती है।

गिरफ्तारी में शामिल टीम
-निरीक्षक विकास चौधरी
-निरीक्षक अरुण कुमार
-उपनिरीक्षक विपिन चंद्र जोशी
-उपनिरीक्षक कृष्ण गोपाल मठपाल
-हेड कांस्टेबल रविंद्र सिंह बिष्ट
-हेड कांस्टेबल महेंद्र गिरी
-कांस्टेबल रवि बोरा
-कांस्टेबल जितेंद्र कुमार
-किशन चंद्र शर्मा
-हेड कांस्टेबल सुरेंद्र कनवाल (सर्विलांस)

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