crimeDehradunEducation

पेपर लीक में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन समेत खालिद और साबिया को हो सकती है उम्रकैद

विशेष सीबीआई कोर्ट ने ट्रायल के लिए पाया पर्याप्त आधार, पेपर हल करने के प्रमाण बनेंगे आधार

Round The Watch News: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच को अदालत से अहम आधार मिल गया है। विशेष CBI न्यायालय ने मुख्य आरोपी मोहम्मद खालिद, उसकी बहन साबिया और सह आरोपी तत्कालीन सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ आरोप तय करने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य माने हैं। मामले में अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

अदालत के इस रुख के बाद तीनों आरोपियों पर उत्तराखंड के सख्त नकल विरोधी कानून के तहत मुकदमा चलने का रास्ता साफ हो गया है। यदि आरोप तय होने के बाद सुनवाई में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित कानून के तहत 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही एक करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का भी प्रावधान है।

परीक्षा केंद्र में मोबाइल ले गया था खालिद
CBI की जांच के अनुसार पेपर लीक की शुरुआत परीक्षा केंद्र से हुई। 21 सितंबर 2025 को आयोजित स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थी मोहम्मद खालिद आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज, बहादुरपुर जट स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचा था। आरोप है कि वह नियमों को दरकिनार करते हुए मोबाइल फोन परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाने में सफल रहा।

परीक्षा शुरू होने के बाद उसने प्रश्नपत्र के कुछ पन्नों की तस्वीरें खींचीं। इसके बाद उसने कक्षा निरीक्षक से वॉशरूम जाने की अनुमति ली। जांच में सामने आया कि परीक्षा केंद्र के वॉशरूम में जैमर नहीं लगा था। CBI के अनुसार खालिद ने इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए प्रश्नपत्र के तीन पन्नों की तस्वीरें खींचीं और उन्हें परीक्षा केंद्र से बाहर भेज दिया।

पूर्व की जांच रिपोर्टों में भी सामने आया था कि खालिद ने प्रश्नपत्र की तस्वीरें अपनी बहन साबिया को भेजीं और साबिया ने उन्हें टिहरी गढ़वाल में तैनात सहायक प्रोफेसर सुमन चौहान तक पहुंचाया।

कुछ ही मिनट में तैयार कर दिए गए जवाब
CBI की जांच में सुमन की भूमिका भी अहम तरीके से सामने आई। आरोप है कि प्रश्नपत्र की तस्वीरें मिलने के कुछ ही मिनट के भीतर सुमन ने सवालों के उत्तर तैयार किए और उन्हें व्हाट्सऐप के माध्यम से खालिद तक भेज दिया।

जांच एजेंसी के मुताबिक सुमन ने बाद में पकड़े जाने की आशंका के चलते प्रश्नपत्र की तस्वीरें और संबंधित संदेश अपने मोबाइल फोन से डिलीट कर दिए। हालांकि, डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की जांच के दौरान CBI इन गतिविधियों से जुड़े सबूत जुटाने में सफल रही।

पूर्व में CBI की जांच से जुड़ी रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि सुमन ने लीक हुए प्रश्नों को हल कर उनके उत्तर अभ्यर्थी तक पहुंचाने में मदद की थी।

बचाव पक्ष की दलील- सुमन को नहीं पता था कि यह असली पेपर है
आरोप तय करने को लेकर हुई सुनवाई में बचाव पक्ष ने सुमन की भूमिका पर अलग दलील रखी। उसकी ओर से कहा गया कि सुमन को यह जानकारी नहीं थी कि उसके पास पहुंचे प्रश्न वास्तविक भर्ती परीक्षा के प्रश्न हैं।

इसके जवाब में CBI के लोक अभियोजकों ने अदालत में तर्क दिया कि प्रश्नपत्र पर विशिष्ट QR कोड मौजूद था। अदालत ने यह भी माना कि सुमन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया से परिचित थी। इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों की संलिप्तता के पर्याप्त प्रथमदृष्टया साक्ष्य होने की बात मानी।

नकल विरोधी कानून में कड़े प्रावधान
मामला उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत बेहद गंभीर श्रेणी में आता है। पेपर लीक करना, नकल कराने की व्यवस्था करना, साजिश रचना और परीक्षा की गोपनीयता भंग करना इस कानून के तहत गंभीर अपराध माने गए हैं।

दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा एक करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। कानून के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति जब्त किए जाने का प्रावधान भी है।

यदि किसी अभ्यर्थी की प्रतियोगी परीक्षा में अनुचित साधनों में संलिप्तता साबित होती है तो उसे दो से पांच वर्ष तक प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रतिबंधित किया जा सकता है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद यह प्रतिबंध 10 वर्ष तक बढ़ सकता है।

आंदोलन के बाद CBI को सौंपी गई जांच
UKSSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा का पेपर लीक सामने आने के बाद पूरे उत्तराखंड में युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश फैल गया था। देहरादून का परेड ग्राउंड कई दिनों तक बेरोजगार युवाओं के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना रहा।

मामला बढ़ने के बाद सरकार ने 21 सितंबर 2025 को आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया। युवाओं और विभिन्न संगठनों की ओर से CBI जांच की मांग के बीच राज्य सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का निर्णय लिया।

CBI ने बाद में मामले की जांच अपने हाथ में लेते हुए खालिद, साबिया और सुमन के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई। दिसंबर 2025 में CBI ने तीनों के खिलाफ विशेष अदालत में आरोपपत्र भी दाखिल किया था। आरोपपत्र में नकल विरोधी कानून के साथ भारतीय न्याय संहिता की आपराधिक साजिश, साक्ष्य मिटाने/छिपाने और धोखाधड़ी से संबंधित धाराएं भी शामिल की गई थीं।

अब 18 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
फिलहाल अदालत का आदेश दोष सिद्ध होने का फैसला नहीं है। अदालत ने केवल यह माना है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोप तय करने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अब आरोप तय होने और उसके बाद चलने वाले मुकदमे में CBI को अपने साक्ष्य साबित करने होंगे।

मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित है। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ किन धाराओं में औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाते हैं और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button