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अज्ञात निहंगों पर एफआईआर, कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेडिंग तोड़ने और वाहनों को पहुंचाया नुकसान

देहरादून से लौटने के बाद पांवटा साहिब गुरुद्वारे पर डटे निहंग, सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून की ओर बढ़ने और फिर वापस लौटने के बाद निहंग सिखों का जत्था फिलहाल हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में ही रुका हुआ है। प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद तत्काल उत्तराखंड कूच टाल दिया गया था। हालांकि, निहंग नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इस बीच हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर और देहरादून से अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा पांवटा साहिब पहुंचे और निहंग जत्थेदारों के साथ विस्तार से वार्ता की। उन्होंने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने दोहराया कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

कुल्हाल बॉर्डर पर दर्ज हुई एफआईआर
कुल्हाल चौकी प्रभारी (विकासनगर) की ओर से अज्ञात निहंग सिखों के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि 25 जून को उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी द्वारा रोके जाने के बावजूद निहंगों ने छोटे-छोटे समूहों में आगे बढ़ने की अपील नहीं मानी।

पुलिस का आरोप है कि जत्था हथियारों के साथ सामूहिक रूप से आगे बढ़ने और गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग पर अड़ा रहा। इसके बाद कथित रूप से बैरिकेडिंग तोड़ी गई, पुलिस वाहनों और मौके पर खड़े डंपरों में तोड़फोड़ हुई तथा ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल पर वाहन चढ़ाने का भी प्रयास किया गया।

निहंग नेतृत्व ने क्या कहा
निहंग जत्थेदार अकाली जगदीप सिंह के अनुसार, प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा है। इसी आश्वासन के आधार पर जत्था फिलहाल पांवटा साहिब में ही रुका रहेगा और वापस नहीं लौटेगा।

उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में गिरफ्तार चार निहंग साथियों की रिहाई, दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच और कथित पुलिस कार्रवाई की जांच शामिल है। उनका कहना है कि प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड की ओर दोबारा कूच करने का फैसला भी लिया जा सकता है।

मोहाली से मिल रहे निर्देश, खुफिया एजेंसियां सतर्क
सूत्रों के अनुसार, निहंगों को पंजाब के मोहाली स्थित सोहाना गुरुद्वारा सिंह शहीदां से लगातार निर्देश मिल रहे हैं। इसे देखते हुए उत्तराखंड पुलिस का खुफिया तंत्र भी सक्रिय है और पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।

उधर, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि पंजाब में बढ़ते धार्मिक और राजनीतिक दबाव के बीच इस विवाद का रुख उत्तराखंड की ओर मोड़ने की कोशिश हुई। हालांकि, इस दावे की किसी सरकारी एजेंसी या प्रशासन ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बॉर्डर पर अफसरों ने संभाली स्थिति
शुक्रवार सुबह देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने उत्तराखंड सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सीमा क्षेत्र में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण बनी हुई है।

इससे पहले प्रशासन ने जानकारी दी थी कि पंजाब और चंडीगढ़ से आए अधिकांश निहंग वापस पांवटा साहिब लौट गए हैं। डीएम आशीष चौहान के अनुसार, देर रात चली बातचीत सकारात्मक रही और हालात नियंत्रण में हैं। पांवटा साहिब में मौजूद करीब 150 निहंगों से भी संवाद हुआ, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए।

देर रात कैसे बढ़ा था तनाव
प्रशासन के मुताबिक, देर रात कुछ निहंग हिमाचल सीमा से उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास करने लगे। इस दौरान सुरक्षा बलों के साथ उनकी बहस हुई और बाद में कुछ लोग बैरिकेडिंग पार कर देहरादून की ओर बढ़ गए।

आरोप है कि रास्ते में तलवारें लहराई गईं और पुलिस द्वारा लगाए गए दो डंपरों में तोड़फोड़ की गई। बाद में रात लगभग एक बजे 10 से 15 निहंग देहरादून के रेसकोर्स गुरुद्वारे पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

इसके बाद देर रात से लेकर करीब ढाई बजे तक प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ता चली। बातचीत सफल रहने के बाद जत्थे ने वापस पांवटा साहिब लौटने पर सहमति जताई।

मांगें अब भी जस की तस
उत्तराखंड रवाना होने से पहले गुरुवार सुबह मोहाली के सोहाना गुरुद्वारे में निहंग सिखों की बैठक हुई थी। बैठक में कर्णप्रयाग प्रकरण में गिरफ्तार चार निहंगों की रिहाई, दर्ज एफआईआर रद्द करने और स्थानीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई गई थी। फिलहाल ये मांगें पूरी नहीं हुई हैं और गिरफ्तार चारों निहंग अब भी पुलिस हिरासत में हैं।

क्या है पूरा विवाद?
यह पूरा मामला 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है। हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे निहंगों के एक जत्थे की बाइक बाजार में खड़ी एक कार से टकराने के बाद विवाद बढ़ गया था।

आरोप है कि झड़प के दौरान धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हुए। एक गंभीर रूप से घायल होटल व्यवसायी को एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजा गया। घटना के बाद व्यापारियों ने बद्रीनाथ हाईवे पर कई घंटे तक जाम लगाया और पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार कर लिया।

बाद में सिख पक्ष ने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया और आत्मरक्षा की दलील दी। इसके बाद दूसरे पक्ष के खिलाफ भी काउंटर एफआईआर दर्ज की गई।

इसके कुछ दिन बाद रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में नया विवाद सामने आया। आरोप लगा कि कुछ लोगों को बंधक बनाया गया और निहंग हथियारों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर चले गए। इसके बाद पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद रखी गईं।

लगातार बातचीत के बाद बंधकों को सुरक्षित मुक्त कराया गया और निहंगों ने भी प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए वीडियो संदेश जारी किया।

बाद में कर्णप्रयाग में दर्ज दोनों एफआईआर की जांच चमोली से हरिद्वार स्थानांतरित कर दी गई। इसकी निगरानी एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर को सौंपी गई, जबकि बिना दस्तार (पगड़ी) के अदालत में पेश किए जाने के आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह चौहान को दी गई है। उन्हें दो सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश हैं।

इसके बाद नगरासू गुरुद्वारे में मौजूद निहंग पंजाब लौट गए और गुरुद्वारे की व्यवस्था बाबा बेअंत सिंह को सौंप दी गई। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चमोली और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील इलाकों में बीएनएसएस की धारा 163 भी लागू की गई।

हालांकि, 25 जून को गिरफ्तार साथियों की रिहाई और एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब और चंडीगढ़ से 150 से 200 निहंगों का नया जत्था उत्तराखंड की ओर रवाना हुआ। कुल्हाल बॉर्डर पर उन्हें रोकने की कोशिश के दौरान तनाव की स्थिति बनी, बैरिकेडिंग और वाहनों को नुकसान पहुंचा तथा भारी संख्या में पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी को तैनात करना पड़ा।

देर रात प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच हुई मैराथन वार्ता के बाद तत्काल टकराव टल गया और जत्था वापस पांवटा साहिब लौट गया। फिलहाल सीमा क्षेत्र में शांति बनी हुई है, जबकि प्रशासन और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं।

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