बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की अरबों की संपत्तियों पर कब्जे का आरोप, दानदाताओं की आस्था से खिलवाड़ का दावा
उत्तराखंड की फिजाओं में तैर रहा एक शिकायती पत्र, चढ़ावा चोरी के प्रकरण के बीच मची हलचल

Amit Bhatt, Dehradun: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की देशभर में फैली अरबों रुपये की जमीनों, भवनों और धर्मशालाओं पर अवैध कब्जे, औने-पौने किराये, संपत्तियों के गायब रिकॉर्ड और वर्षों से कार्रवाई नहीं होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक विस्तृत ज्ञापन/शिकायती पत्र में दावा किया गया है कि समिति की वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों ने इन संपत्तियों को मुक्त कराने या उनकी सुरक्षा के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जिससे दानदाताओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई से भगवान बदरी विशाल के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये मूल्य की अचल संपत्तियां दान की थीं, लेकिन समय के साथ इन पर अवैध कब्जे हो गए। आरोप है कि कई मामलों में तत्कालीन अधिकारियों/पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही, जबकि वर्तमान और पूर्व मंदिर समितियां कब्जे हटाने में विफल रहीं।
बदरीनाथ से जोशीमठ तक करोड़ों की जमीन पर सवाल
पत्र के अनुसार, श्री बदरीनाथ में मंदिर समिति की 181 नाली 4 मुट्ठी भूमि है। आरोप है कि नीलकंठ धर्मशाला, बस अड्डा, मंदिर परिसर और अन्य स्थानों की भूमि अधिक किराये पर देकर सरकारी खजाने में कम राशि जमा की जाती रही। इसके अलावा बामणी गांव में 12 नाली और माणा में 133 नाली 12 मुट्ठी भूमि भी समिति के नाम दर्ज बताई गई है।
पांडुकेश्वर में तीन भवन और 6 नाली 5 मुट्ठी भूमि का भी उल्लेख किया गया है। वहीं जोशीमठ में करीब चार नाली भूमि बेहद कम किराये पर लीज पर दिए जाने, वर्षों से किराया न बढ़ने, 10 कमरों का नाममात्र किराया मिलने, 12 नाली भूमि बिना अनुमति पीडब्ल्यूडी को दिए जाने, 33 नाली भूमि का रिकॉर्ड नहीं मिलने और 57 नाली कृषि भूमि की उपज का हिसाब कभी समिति के खाते में जमा नहीं होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अल्मोड़ा, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग से लेकर रामनगर तक संपत्तियों पर सवाल
ज्ञापन में नंदप्रयाग की पांच नाली भूमि, कर्णप्रयाग की दो दुकानों का बेहद कम किराया, द्वाराहाट में 13 नाली भूमि व भवन, बांसुरी सेरा (अल्मोड़ा) में करीब 190 नाली भूमि और भवन तथा सकनी (अल्मोड़ा) में सात नाली भूमि का भी उल्लेख किया गया है।
रामनगर (नैनीताल) में मुख्य स्थान पर लगभग 45 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे का दावा किया गया है। हल्द्वानी में समिति के भवन का मात्र 100 रुपये वार्षिक किराया मिलने और बरेली रोड पर एक अन्य भवन होने का भी जिक्र है।
देहरादून की 62 एकड़ जमीन पर भी कार्रवाई नहीं
ज्ञापन में दावा किया गया है कि देहरादून के डोभालवाला क्षेत्र में समिति की लगभग 62 एकड़ भूमि है, जिसकी कीमत अरबों रुपये बताई गई है। आरोप है कि इस भूमि को प्राप्त करने के लिए भी वर्तमान और पूर्व समिति ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। पौड़ी में कोटद्वार रोड स्थित दो मंजिला भवन और सिविल लाइन धर्मशाला से लगी दो नाली भूमि पर भी कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
केदारनाथ, ऊखीमठ और रुद्रप्रयाग क्षेत्र की जमीनों पर भी विवाद
ज्ञापन में केदारनाथ, डंगवाड़ी (ऊखीमठ), जयबीरी, गुप्तकाशी, मक्कूमठ, करौखी, त्यूड़ी, अगस्त्यमुनि और तुंगनाथ क्षेत्र में समिति की दर्जनों से लेकर सैकड़ों नाली भूमि पर अवैध कब्जे, सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्माण तथा कार्रवाई न होने के आरोप भी लगाए गए हैं।
दिल्ली और उत्तर प्रदेश की संपत्तियों का भी जिक्र
दस्तावेज में लखनऊ के अमीनाबाद स्थित राधा-कृष्ण मंदिर एवं भवन, उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की कृषि भूमि तथा नई दिल्ली के आर.के. पुरम स्थित करीब दो बीघा भूमि और मंदिर पर भी कब्जे के आरोप लगाए गए हैं।
धर्मशालाएं तोड़ीं, बसों का भी हिसाब नहीं
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मास्टर प्लान के नाम पर बदरीनाथ में लगभग 12 धर्मशालाएं तोड़ी गईं, लेकिन उनका कोई मुआवजा मिला या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा मंदिर समिति की पांच डीलक्स बसों का भी कोई रिकॉर्ड नहीं होने का दावा किया गया है।
ज्ञापन में इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर मंदिर समिति की संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने, किरायों की समीक्षा करने और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई गई है। साथ ही मौजूदा पदाधिकारियों को इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।



