
Rajkumar Dhiman, Dehradun: डालनवाला क्षेत्र के सिल्वर सिटी मॉल के पास 13 फरवरी 2026 को हुए चर्चित विक्रम शर्मा हत्याकांड में फरार चल रहे पांच आरोपियों पर उत्तराखंड पुलिस ने शिकंजा और कस दिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तराखंड ने सभी पांचों फरार आरोपियों पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर एक-एक लाख रुपये से दो-दो लाख रुपये कर दी है। इसके साथ ही इन पांचों पर कुल 10 लाख रुपये का इनाम हो गया है।
यह मामला अब केवल एक हत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एसटीएफ उत्तराखंड और दून पुलिस की जांच में यह संगठित अंतरराज्यीय आपराधिक साजिश, गैंगवार, रंगदारी, कारोबारी हितों और अपराध जगत में वर्चस्व की लड़ाई का बड़ा मामला बनकर सामने आया है।
डीजीपी ने बढ़ाया इनाम
15 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत पुलिस महानिदेशक ने हत्या के मामले में फरार पांचों आरोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया। डालनवाला कोतवाली में इस मामले में मु0अ0सं0-30/26 के तहत धारा 103(1), 238 और 61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) में मुकदमा दर्ज है।
पुलिस ने बताया कि मामले में पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उनसे हुई पूछताछ और विवेचना में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पांच अन्य आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी। पहले इन पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसे अब बढ़ाकर दो-दो लाख रुपये कर दिया गया है।
13 फरवरी को हुई थी सनसनीखेज हत्या, दहल गया था दून
13 फरवरी 2026 को कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचना मिली कि सिल्वर सिटी क्षेत्र में अज्ञात हमलावरों ने एक युवक को गोली मार दी है। सूचना मिलते ही डालनवाला पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को घेरकर फॉरेंसिक जांच शुरू कराई।
मृतक की पहचान अमन विहार, रायपुर निवासी विक्रम शर्मा के रूप में हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन आईजी गढ़वाल, एसएसपी देहरादून और एसएसपी एसटीएफ स्वयं मौके पर पहुंचे और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए।
झारखंड का कुख्यात अपराधी था विक्रम शर्मा
जांच में सामने आया कि विक्रम शर्मा झारखंड का कुख्यात अपराधी था, जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और संगठित अपराध सहित कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। वह कई मामलों में जमानत पर बाहर था और अपराध जगत में उसका मजबूत नेटवर्क सक्रिय था।
करीब आठ वर्ष पहले जमशेदपुर पुलिस उसे एक हत्या के मामले में देहरादून से गिरफ्तार भी कर चुकी थी। पुलिस का मानना है कि अपराध जगत में उसका बढ़ता प्रभाव ही उसकी हत्या की सबसे बड़ी वजह बना।
शुरुआत से गैंगवार के एंगल पर हुई जांच
विक्रम की आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए पुलिस ने शुरुआती जांच से ही इसे अंतरराज्यीय गैंगवार और संगठित अपराध से जोड़कर देखा। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर कई टीमें गठित की गईं और एसटीएफ उत्तराखंड के साथ संयुक्त जांच शुरू हुई।
सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सर्विलांस, डिजिटल पेमेंट, वाहन मूवमेंट और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पुलिस ने हत्या की पूरी साजिश को जोड़ना शुरू किया।
तीन बाइक सवारों ने दिया वारदात को अंजाम
सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि तीन बाइक सवार आरोपी हत्या करने पहुंचे थे। उन्होंने विक्रम शर्मा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं और मौके से फरार हो गए।
वारदात के बाद सहस्त्रधारा रोड पर अपाचे बाइक छोड़ दी गई। वहां पहले से खड़ी दूसरी बाइक और स्कूटी से आरोपी हरिद्वार पहुंचे।
हरिद्वार से स्कॉर्पियो में भागे ग्रेटर नोएडा
हरिद्वार पहुंचने के बाद आरोपियों ने किराये पर ली गई बाइक और स्कूटी वापस की और पहले से तैयार काली स्कॉर्पियो (JH-05-DZ-5517) से नोएडा होते हुए ग्रेटर नोएडा फरार हो गए। पुलिस ने सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से पूरे फरारी रूट को ट्रेस कर लिया।
यूपीआई ट्रांजैक्शन और वाहनों से खुली साजिश
जांच में बरामद अपाचे बाइक झारखंड निवासी जितेंद्र कुमार साहू के नाम पंजीकृत मिली।
हरिद्वार से किराये पर ली गई बाइक और स्कूटी आकाश कुमार प्रसाद के दस्तावेजों पर ली गई थीं, जबकि उनका भुगतान राजकुमार की यूपीआई आईडी से किया गया था।
स्कॉर्पियो से मिला कारोबारी कनेक्शन
फरारी में इस्तेमाल हुई स्कॉर्पियो जमशेदपुर के यशराज के नाम पंजीकृत मिली, जिसकी रेलवे में फूड सप्लाई का ठेका संचालित करने वाली कंपनी थी।
जांच में सामने आया कि विक्रम शर्मा भी इसी ठेके में दखल चाहता था और यशराज से रंगदारी मांगने की जानकारी भी पुलिस को मिली। यहीं से जांच कारोबारी हितों और रंगदारी की दिशा में भी आगे बढ़ी।
तीन गिरफ्तारियां, ऐसे खुलती गई पूरी साजिश
पुलिस ने सबसे पहले 19 फरवरी 2026 को जमशेदपुर से राजकुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में स्कॉर्पियो और पूरे नेटवर्क की अहम जानकारी मिली।
इसके बाद 23 फरवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 अपार्टमेंट से हत्या में प्रयुक्त स्कॉर्पियो बरामद की गई और मोहित उर्फ अक्षत ठाकुर को गिरफ्तार किया गया।
तीसरी गिरफ्तारी 12 मई 2026 को हरिद्वार में हुई, जब यशराज अपने पिता के वकील से मिलने आया था। पुलिस ने उसे वहीं से गिरफ्तार कर लिया।
महीनों पहले से बनाई गई थी हत्या की योजना
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह हत्या अचानक नहीं बल्कि कई महीनों की सुनियोजित साजिश थी।
मुख्य साजिशकर्ता आशुतोष सिंह अपराध की दुनिया में अपना दबदबा स्थापित करना चाहता था। पहले विक्रम शर्मा की हत्या की योजना जमशेदपुर में बनाई गई, लेकिन उसके साथ हमेशा लोगों के रहने के कारण मौका नहीं मिला।
इसके बाद नोएडा में प्रयास किया गया, लेकिन वहां भी योजना सफल नहीं हो सकी। आखिरकार देहरादून को टारगेट चुना गया।
जिम जॉइन कर की गई रेकी
देहरादून में आरोपियों ने विक्रम शर्मा की पूरी दिनचर्या पर नजर रखी। उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए एक आरोपी ने उसी जिम की सदस्यता ली, जहां विक्रम रोज जाता था।
घटना वाले दिन उसी आरोपी ने फोन कर जानकारी दी कि विक्रम जिम में मौजूद है। जैसे ही वह बाहर निकला, आशुतोष सिंह और विशाल सिंह ने उस पर गोलियां चला दीं। इसके बाद पहले से तय फरारी प्लान के तहत सभी आरोपी अलग-अलग वाहनों से ग्रेटर नोएडा पहुंच गए, जहां अक्षत ठाकुर ने उनके रहने, खाने और लॉजिस्टिक सपोर्ट की व्यवस्था की।
अब भी फरार हैं पांच आरोपी
पूरी जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे केवल गैंगवार नहीं, बल्कि रंगदारी, कारोबारी हित, संगठित अपराध और अपराध जगत में वर्चस्व की लड़ाई भी प्रमुख कारण थी।
फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे पांचों आरोपी हैं आकाश कुमार प्रसाद, जितेंद्र कुमार साहू, अंकित कुमार वर्मा उर्फ अंकित वर्मा, आशुतोष कुमार सिंह और विशाल सिंह। ये सभी झारखंड के रहने वाले हैं।
अब इन पांचों फरार आरोपियों पर उत्तराखंड पुलिस ने दो-दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। एसटीएफ और देहरादून पुलिस की टीमें विभिन्न राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि संगठित अपराध से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।



