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दून में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़: इंटास, मैकलियोड्स और डॉ. रेड्डीज के नाम पर बन रहीं थीं स्प्यूरियस दवाएं, यूपी तक नेटवर्क

उत्तराखंड के औषधि नियंत्रण विभाग की राजधानी के ईस्ट होप टाउन में बड़ी कार्रवाई

Amit Bhatt, Dehradun: उत्तराखंड में नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत औषधि नियंत्रण विभाग ने बुधवार को राजधानी देहरादून में बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। ईस्ट होप टाउन के ग्राम देवीपुर-परवल स्थित एक मकान में छापेमारी के दौरान नामी दवा कंपनियों इंटास (Intas), मैकलियोड्स (Macleods) और डॉ. रेड्डीज (Dr. Reddy’s) के नाम से तैयार की जा रही भारी मात्रा में स्प्यूरियस (नकली) दवाएं, पैकिंग सामग्री तथा दवा निर्माण और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की गईं। प्रारंभिक जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

आयुक्त के आदेश पर चल रहा है प्रदेशव्यापी अभियान
औषधि नियंत्रण विभाग के अनुसार आयुक्त के आदेश और अपर आयुक्त के निर्देशन में पूरे प्रदेश में नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 22 जुलाई 2026 को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर ग्राम देवीपुर, ईस्ट होप टाउन, परवल स्थित एक मकान पर अचानक छापेमारी की गई। मामले के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की सूचना पहले ही मिलने पर उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग की टीम को भी कार्रवाई में शामिल किया गया और उसके अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

किराये के मकान में चल रही थी अवैध फैक्ट्री 
जिस मकान में छापा मारा गया, वह विनय चमोली का बताया गया है। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि मकान के तीन कमरे अमित शर्मा नामक व्यक्ति को किराये पर दिए गए थे। हालांकि, मौके पर किरायानामा प्रस्तुत नहीं किया जा सका। विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि मकान मालिक, किरायेदार और अन्य संबंधित लोगों की इस पूरे प्रकरण में क्या भूमिका रही।

कई चर्चित दवाओं का जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान Tab. Gabapin-100, Tab. Zoryl M2 और Tab. Cefolac-200 सहित कई दवाओं का बड़ा जखीरा बरामद हुआ। इसके अलावा प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम वाले रैपर, लेबल, पैकिंग बॉक्स, पैकेजिंग सामग्री तथा दवा निर्माण और पैकिंग में प्रयुक्त मशीनें एवं अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। प्रथम दृष्टया यह सामने आया है कि नकली दवाओं को असली कंपनियों की पैकिंग में तैयार कर बाजार में खपाने की तैयारी थी।

यूपी समेत कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं गिरोह के तार
औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश तक जुड़े होने की जानकारी मिली है। इसी कारण उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग से लगातार संपर्क बनाए रखा गया था और संयुक्त कार्रवाई की गई। अब दोनों राज्यों की टीमें मिलकर यह पता लगाएंगी कि नकली दवाओं की आपूर्ति किन-किन राज्यों में की जा रही थी और इस अंतर्राज्यीय गिरोह से कौन-कौन लोग जुड़े हैं।

अरुण चौधरी उर्फ टुंडा मुख्य आरोपी, मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई
प्रकरण में अरुण चौधरी उर्फ टुंडा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। वहीं वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा और औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई कर रहे हैं। विभाग ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है तथा अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
राज्य औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि आयुक्त और अपर आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग पूरे प्रदेश में लगातार अभियान चला रहा है। यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े गिरोहों की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित राज्यों के औषधि नियंत्रण विभागों के समन्वय से उनके विरुद्ध भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर आगे भी पूरे प्रदेश और प्रदेश के बाहर सक्रिय अंतर्राज्यीय नेटवर्क के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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