DehradunUttarakhandमनमानी

कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी पर 20 हजार का जुर्माना, 03 साल से दे रहे थे गच्चा

राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने की कार्रवाई, पहले दिए थे कई अवसर

Rajkumar Dhiman, Dehradun: सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत राज्य सूचना आयोग के आदेश की अनदेखी हरिद्वार कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को भारी पड़ गई। आयोग ने आरटीआइ प्रकरण में आदेश का अनुपालन नहीं करने और आवेदक को भ्रामक एवं अस्पष्ट सूचना उपलब्ध कराने के मामले में हरिद्वार के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशीष कुमार वर्मा पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

मामला शिकायतकर्ता रमेश चंद्र शर्मा, प्रबंधक ट्रस्टी, धर्मशाला गंगा दर्शन मां गंगा निकेतन कुंभ क्षेत्र, हरिद्वार से जुड़ा है। उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी थी। प्रकरण में आयोग ने द्वितीय अपील संख्या 35222 का 30 नवंबर 2022 को निस्तारण करते हुए संबंधित अभिलेखों में दर्ज सूचना उपलब्ध कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

तीन साल बाद भी नहीं हुआ आदेश का पालन
राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर के आदेश में गंभीर टिप्पणी की गई है कि 30 नवंबर 2022 के निस्तारण आदेश के प्रस्तर 6.1 और 7 में दिए निर्देशों का लोक सूचना अधिकारी ने अनुपालन नहीं किया। आयोग के मुताबिक इस संबंध में लोक सूचना अधिकारी को प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन करीब तीन वर्ष बीतने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने के कई अवसर भी दिए। आदेश में 8 जनवरी 2026, 18 मार्च 2026, एक जून 2026 और 12 जून 2026 की सुनवाइयों का उल्लेख है। इसके बावजूद आयोग के अनुसार वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

आयोग के सामने उठाया गया भ्रामक सूचना का मुद्दा
सुनवाई में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आयोग के समक्ष लोक सूचना अधिकारी की ओर से उपलब्ध कराई गई सूचना भ्रामक और असत्य थी। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि सात जुलाई 2021 के प्रथम सूचना बिंदुओं के संबंध में मांगी गई सूचना आयोग के पूर्व आदेश के अनुरूप उपलब्ध नहीं कराई गई।

आयोग ने इससे पहले अपने अंतिम आदेश में कहा था कि 30 नवंबर 2022 के आदेश का अनुपालन न करना और बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद मांगी गई सूचना उपलब्ध न कराना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों का उल्लंघन है।

कारण बताओ नोटिस भी हुआ था जारी
आयोग ने इससे पहले मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आशीष कुमार वर्मा को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उन पर प्रतिदिन 250 रुपये के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रुपये तक का दंड क्यों न लगाया जाए। अधिकारी को लिखित स्पष्टीकरण और साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था।

अब अंतिम आदेश में आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और सुनवाई की स्थिति के आधार पर 20,000 रुपये का दंड अधिरोपित किया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि जुर्माने की राशि ई-चालान के माध्यम से जमा कराई जाए और संबंधित प्रक्रिया के तहत उत्तराखंड सूचना आयोग को इसकी सूचना दी जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button