
Rajkumar Dhiman, Dehradun: राजधानी के देहराखास स्थित सरकारी दून मेडिकल कॉलेज के छात्रावासों की मेस व्यवस्था में करीब 95 लाख रुपये के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मेस के मैनेजर ने छात्रों को कम कीमत में भोजन उपलब्ध कराने का लालच देकर उनसे मेस शुल्क अपनी कंपनी के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कराया। लंबे समय तक रकम और हिसाब-किताब को लेकर भ्रमित करने के बाद जब मामले की जांच हुई तो कथित गबन की रकम करीब 95 लाख रुपये तक पहुंचने का पता चला।
मामले में मेस संचालक की शिकायत पर पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने आरोपी मैनेजर अतीक अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार आरोपी फिलहाल फरार है और उसका मोबाइल फोन भी बंद मिल रहा है।
सरकारी छात्रावासों की मेस का मिला था ठेका
पुलिस को दी गई तहरीर में रघुबीर सिंह ने बताया कि वह निशांत यादव एसोसिएट्स के संचालक हैं। फर्म का सरकारी दून मेडिकल कॉलेज के देहराखास स्थित पुरुष एवं महिला छात्रावासों में मेस संचालन के लिए एक दिसंबर 2023 को अनुबंध हुआ था।
अनुबंध के तहत दोनों छात्रावासों में छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने और मेस संचालन की जिम्मेदारी फर्म की थी। मेस के रोजमर्रा के संचालन, छात्रों से समन्वय और धनराशि एकत्र करने के लिए फर्म की ओर से अतीक अहमद निवासी राजा खेड़ा, धौलपुर, राजस्थान को मैनेजर नियुक्त किया गया था।
छात्रों से शुल्क लेने के लिए अपनाया खेल
शिकायत के मुताबिक, मैनेजर को छात्रों के साथ समन्वय करने, मेस का संचालन संभालने और शुल्क की धनराशि एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि इसी जिम्मेदारी का फायदा उठाते हुए अतीक अहमद ने छात्रों को कम पैसे में भोजन उपलब्ध कराने का प्रलोभन दिया।
इसके बाद उसने छात्रों से मेस शुल्क फर्म के अधिकृत खाते में जमा कराने के बजाय कथित तौर पर अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा कराना शुरू कर दिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी लगातार छात्रों और मेस संचालक को अलग-अलग तरह से जानकारी देकर भ्रमित करता रहा। दूसरी ओर, वह अपनी धनराशि की मांग को लेकर कॉलेज प्रशासन के सामने भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने दे रहा था।
कॉलेज से सिर्फ 7.98 लाख रुपये मिले तो हुआ शक
मामला तब संदिग्ध हुआ जब भुगतान को लेकर वास्तविक स्थिति सामने आने लगी। शिकायतकर्ता के अनुसार, जनवरी माह के बाद अप्रैल में कॉलेज प्रशासन की ओर से उन्हें 7.98 लाख रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया।
यह रकम मिलने के बाद मेस संचालक को हिसाब-किताब में गड़बड़ी की आशंका हुई। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि छात्रों से बड़ी मात्रा में मेस शुल्क वसूला गया था, लेकिन उसका भुगतान फर्म को नहीं किया गया।
जांच में सामने आई करीब 95 लाख की रकम
शिकायतकर्ता के अनुसार, विस्तृत पड़ताल में पता चला कि अतीक अहमद ने छात्रों और मेस संचालक को कथित तौर पर धोखा देकर करीब 95 लाख रुपये अपने व्यक्तिगत बैंक खाते में प्राप्त किए और उनका गबन कर लिया।
आरोप है कि यह रकम मेस संचालन से संबंधित थी और आरोपी ने उसे फर्म तक पहुंचाने के बजाय अपने निजी खाते में प्राप्त किया।
रकम का खुलासा होने के बाद जब आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी अपने निवास स्थान से भी फरार हो चुका है।
जीवनभर की कमाई हड़पने का आरोप
मेस संचालक रघुबीर सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि अतीक अहमद ने उनके साथ विश्वासघात, धोखाधड़ी और अमानत में खयानत की तथा उनकी जीवनभर की कमाई को हड़प लिया।
शिकायत के आधार पर पटेलनगर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पटेलनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद गुसांई ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि करते हुए बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि छात्रों से कुल कितनी रकम वसूली गई, कितनी राशि आरोपी के व्यक्तिगत खातों में पहुंची और करीब 95 लाख रुपये के कथित गबन में उसकी भूमिका क्या रही। साथ ही आरोपी की तलाश और बैंक खातों से संबंधित लेनदेन की जांच भी मामले में अहम होगी।



