
Rajkumar Dhiman, Dehradun: सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस हेवनली फुटहिल्स कॉलोनी में एक प्रॉपर्टी डीलर की बिल्डिंग से गिरने से मौत हो गई। आशंका जताई जा रही है कि व्यक्ति ने संदिग्ध परिस्थितियों में बिल्डिंग से छलांग लगाई, हालांकि घटना की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। घटना से पहले व्यक्ति ने तड़के करीब 2:18 बजे कई लोगों को व्हाट्सएप संदेश भेजे थे। इन संदेशों में उसने मानसिक रूप से परेशान होने, आर्थिक नुकसान होने और कॉलोनी के ही बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाए। संदेशों में उसने अपनी मौत के लिए भी संबंधित व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया है।
संदेश में खुद को पंकज मित्तल बताया
व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट में संदेश भेजने वाले ने अपना नाम पंकज मित्तल, पिता पवन कुमार मित्तल, बताया है। उसने लिखा कि वह अपनी जिंदगी से तंग आ चुका है। उसने अपनी मानसिक स्थिति के लिए एटीएस हेवनली फुटहिल्स के मकान नंबर 144-L में रहने वाले पुनीत अग्रवाल को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगाया कि पुनीत ने उसे आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ सम्मानपूर्वक जीने का रास्ता भी छीन लिया है। उसके अनुसार, इस वजह से पिछले कुछ महीनों से उसे समाज में बेइज्जती का सामना करना पड़ रहा है।
पैसे नहीं लौटाने और धमकाने का आरोप
संदेश में पंकज ने आरोप लगाया कि पुनीत अग्रवाल ने उससे लिए पैसे लौटाने से इनकार कर दिया और उल्टा उससे बदसलूकी की। उसने दावा किया कि वह पिछले पांच से छह महीने से अपने पैसे वापस पाने के लिए प्रयास कर रहा था। संदेश के मुताबिक, उसके पैसे पुनीत की कंपनी स्तुति कंस्ट्रक्शन के बैंक खाते में दिए गए थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने उसके साथ धोखाधड़ी की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मारपीट और धमकियों के भी लगाए आरोप
व्हाट्सएप संदेश में पंकज मित्तल ने कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। उसने दावा किया कि संबंधित व्यक्ति ने कुछ समय पहले डीआरडीओ के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक को थप्पड़ मारने के बाद उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी। उसने संबंधित व्यक्ति की पत्नी के साथ बदसलूकी करने के बाद भी उल्टा दूसरे पक्ष पर केस बनवा देने का आरोप लगाया। इसके अलावा, उसने कॉलोनी के अध्यक्ष को शराब पिलाकर मारने, छोटे बच्चों को पिस्तौल दिखाने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप भी लगाए।
कॉलोनी में जमीन कब्जाने और लोगों को धमकाने का जिक्र
संदेश में पंकज ने आरोप लगाया कि कॉलोनी के भीतर संजय रावत की जमीन पर कब्जा कर उन्हें प्रताड़ित किया गया। उसने दावा किया कि नए घर में फर्नीचर का काम करने वाले जतिन से भी काम कराने के बाद पैसे नहीं दिए गए। संदेश में उसने लिखा कि कॉलोनी में लोगों को धमकाना और जान से मारने की धमकी देना सामान्य हो गया है। उसने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों के बीच उसे न तो अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद है और न ही कानून अथवा पुलिस पर भरोसा रह गया है।
मौत के लिए पुनीत अग्रवाल को ठहराया जिम्मेदार
अपने संदेश के अंतिम हिस्से में पंकज ने लिखा कि वह संबंधित व्यक्ति से लड़ने की स्थिति में नहीं है। उसने आशंका जताई कि यदि उसकी मौत दुर्घटना या किसी अन्य कारण से होती है, तो इसके लिए पुनीत अग्रवाल जिम्मेदार होंगे। यह संदेश घटना से पहले भेजा गया बताया जा रहा है। हालांकि, संदेश में लगाए गए आरोपों, घटना के कारणों और मौत की परिस्थितियों की पुष्टि पुलिस जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
पुलिस की ओर से घटना के संबंध में आधिकारिक जानकारी और जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि व्यक्ति की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल, व्हाट्सएप संदेश में लगाए गए आरोपों को जांच के विषय के रूप में देखा जाना चाहिए।
एटीएस कॉलोनी प्रकरण और आरोप बाबा साहनी की आत्महत्या जैसे
सहस्रधारा रोड स्थित एटीएस हेवनली फुटहिल्स कॉलोनी में पंकज मित्तल की मौत से पहले भेजे गए व्हाट्सएप संदेशों ने देहरादून के चर्चित बिल्डर सतिंदर सिंह साहनी उर्फ बाबा साहनी प्रकरण की याद ताजा कर दी है। दोनों मामलों में एक समानता यह है कि मौत से पहले संबंधित व्यक्ति की ओर से कथित आर्थिक विवाद, मानसिक तनाव और दूसरे लोगों पर गंभीर आरोप लगाए जाने की बात सामने आई। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां और जांच के निष्कर्ष अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें एक जैसा मामला मानने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है।
1. बाबा साहनी प्रकरण: 24 मई 2024 को हुई थी बिल्डर की मौत
देहरादून के चर्चित बिल्डर सतिंदर सिंह साहनी उर्फ बाबा साहनी की 24 मई 2024 को सहस्रधारा रोड स्थित पैसिफिक गोल्फ एस्टेट की आठवीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उन्हें उपचार के लिए मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद पुलिस को एक कथित सुसाइड नोट मिला था। इसमें साहनी ने दक्षिण अफ्रीका से जुड़े कारोबारी अजय कुमार गुप्ता और उनके बहनोई अनिल कुमार गुप्ता पर धमकाने, ब्लैकमेल करने और कारोबारी परियोजनाओं को अपने नाम कराने के लिए दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए थे। यह भी आरोप था कि उन्हें और उनके दामाद को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही थी। ये आरोप मृतक के नोट और उनके बेटे की शिकायत के आधार पर सामने आए थे।
मौत से आठ दिन पहले पुलिस को दी थी शिकायत
बाबा साहनी ने 16 मई 2024 को राजपुर थाने में शिकायत देकर खुद को खतरा होने की बात कही थी। शिकायत में कारोबारी विवाद, कथित धमकियों और दबाव का उल्लेख था। हालांकि, इस शिकायत पर आगे की कार्रवाई और जांच को लेकर बाद में सवाल उठे।
24 मई को उनकी मौत के बाद उनके बेटे रणवीर सिंह साहनी की शिकायत और कथित सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस ने अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया। दोनों को गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी और जबरन वसूली के लिए धमकाने से संबंधित धाराएं भी जोड़ी थीं।
2. जांच में क्या निकला? पुलिस ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट
बाबा साहनी प्रकरण में आगे चलकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। नवंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 18 महीने की जांच के बाद देहरादून पुलिस ने अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता के खिलाफ मामले में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की।
पुलिस की जांच में कॉल डिटेल, रिकॉर्डिंग और फोरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जांच में आरोपों की पुष्टि करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। दिसंबर 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में अदालत की ओर से अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने की जानकारी भी दी गई। बाद में फरवरी 2026 में उत्तराखंड हाई कोर्ट द्वारा इस मामले में अजय गुप्ता और अनिल गुप्ता के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त किए जाने की खबर भी प्रकाशित हुई।



