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उमेश कुमार ने दे दिया इस्तीफा, काले कपड़े लहराए और हंगामे के बीच दो घंटे में निपटा विधानसभा सत्र

जनहित के मुद्दों पर विपक्ष का साथ नहीं मिलने से आहत होने का दावा, जन निर्माण पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे खानपुर विधायक

Rajkumar Dhiman, Dehradun: भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र बुधवार को हंगामे और राजनीतिक टकराव के बीच समाप्त हो गया। सत्र के दूसरे दिन खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को इस्तीफा सौंपकर सियासी हलचल बढ़ा दी। उन्होंने विपक्ष पर किसानों, भ्रष्टाचार और जनहित के मुद्दों पर साथ नहीं देने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े मामले में नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े लहराए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। भारी शोर-शराबे के बीच 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और सभी 10 विधेयक पारित कर दिए गए। सुबह 11 बजे शुरू हुई सदन की कार्यवाही दोपहर 1:06 बजे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष के साथ नहीं मिलने पर उमेश कुमार ने छोड़ी विधायकी
खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में उन्होंने विपक्ष के मुद्दों पर उसका साथ दिया, लेकिन जब हरिद्वार, किसानों, आपदा और बिजली बिलों में राहत जैसे विषय उठाए तो उन्हें विपक्ष का अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

उमेश कुमार ने किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि किसानों की आरसी काटी गई, किसान क्रेडिट कार्ड का ब्याज माफ नहीं हुआ और बिजली बिलों के बकाये के चलते कनेक्शन काटे गए। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दों पर विपक्ष से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह जन निर्माण पार्टी के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरेंगे। उनका लक्ष्य अधिक विधायकों को जिताकर विधानसभा में पहुंचाना है। उमेश कुमार ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों में शामिल होने की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह उन नेताओं के समर्थन में नारे नहीं लगा सकते, जिनके खिलाफ वह पहले भी सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, इस्तीफा सौंपे जाने के बाद उस पर विधानसभा अध्यक्ष का अंतिम निर्णय होना बाकी है।

रेखा आर्य की संपत्ति के मामले में चर्चा की मांग
सदन में कांग्रेस विधायकों ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े मामले को उठाते हुए नियम 310 के तहत चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।

विरोध जताने के लिए कांग्रेस विधायकों ने काले कपड़े लहराए और सदन के वेल में पहुंचकर नारेबाजी की। इस दौरान कागज भी फेंके गए। विपक्षी विधायकों ने ‘फर्जीवाड़ा करने वाली यह सरकार, नहीं चलेगी’, ‘झूठी घोषणाएं करने वाली यह सरकार, नहीं चलेगी’ और ‘उत्तराखंड को लूटने वाली यह सरकार, नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए।

विधायकों ने ‘बंटी-बबली कौन है?’ और ‘210 का झुमका कहां गिरा है, बरेली के बाजार में’ जैसे नारों से भी तंज कसा। सदन में ‘अंकिता भंडारी को न्याय दो’, ‘भ्रष्टाचार बंद करो’, ‘चंदा चोरों से बचो’ और ‘भ्रष्टाचारियों डूब मरो’ जैसे नारे भी गूंजे।

हंगामे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदस्यों से सदन की गरिमा और भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने ‘झुमका’ शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई और सदस्यों से अनुशासन बनाए रखने को कहा।

तिलकराज बेहड़ बोले—गैरसैंण में चार-पांच दिन चलना चाहिए था सत्र
कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ ने सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र कम से कम चार-पांच दिन चलना चाहिए था, ताकि जनहित, विकास, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज नहीं सुन रही है और भ्रष्टाचार के मामलों में नियम 310 के तहत चर्चा कराने को तैयार नहीं है। बेहड़ ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह खुद पर हुए कथित हमले का मामला भी सदन में उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिला।

उनका कहना था कि सत्र के पहले दिन शोक संदेशों के अलावा कोई चर्चा नहीं हुई। ऐसे में गैरसैंण में सत्र आयोजित करने पर होने वाले खर्च के बावजूद विधायकों को जनहित के मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया।

हंगामे के बीच अनुपूरक बजट की मांगें मंजूर
विपक्ष के विरोध के बीच वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुपूरक अनुदान मांगों को मंजूरी देने की प्रक्रिया जारी रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से प्रस्तुत 7,844.18 करोड़ रुपये के अनुपूरक बजट में 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद और 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद के लिए रखे गए हैं। इसके साथ ही राज्य का कुल बजट आकार बढ़कर 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो गया।

विधानसभा अध्यक्ष ने ग्रामीण विकास से संबंधित 69 लाख रुपये और अनुदान संख्या 20 के तहत 315 करोड़ 29 लाख रुपये की अनुपूरक मांगों को मंजूरी दिए जाने की घोषणा की। ऊर्जा विभाग के लिए 269 करोड़ 50 लाख एक हजार रुपये की मांग भी स्वीकृत हुई।

इसके अलावा अनुदान संख्या 13 के तहत जलापूर्ति, आवास एवं नगर निकायों के लिए 414 करोड़ 74 लाख 84 हजार रुपये की अनुपूरक मांग मंजूर की गई। अनुदान संख्या 16 के तहत 11 करोड़ 56 लाख रुपये की मांग को भी स्वीकृति दी गई।

विपक्षी सदस्यों ने मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार और उत्तराखंड के हक से जुड़े मुद्दे भी उठाए। विधानसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से सदन को खेल का मैदान नहीं बनाने और कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखने की अपील की।

सभी 10 विधेयक पारित, 17 सूचनाओं का उल्लेख
हंगामे के बीच सदन में विधायी कार्यवाही पूरी की गई। अनुपूरक बजट के साथ सभी 10 विधेयक पारित कर दिए गए। इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा।

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन को प्राप्त 17 सूचनाओं का उल्लेख किया। इसके बाद दोपहर 1:06 बजे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी गई।

इस तरह गैरसैंण में आयोजित दो दिवसीय विधानसभा सत्र का समापन हो गया। सत्र में एक ओर सरकार ने अनुपूरक बजट और विधायी कार्यवाही पूरी की, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध दर्ज कराया। इसी बीच उमेश कुमार के इस्तीफे ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में एक नया घटनाक्रम जोड़ दिया।

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