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जेवर और बाइक बेचकर विदेश में नौकरी का सपना देखकर फंसा युवक, छापे में 61 पासपोर्ट मिले

07 युवा आर्मेनिया में फंसे, जेड ग्लोबल कार्यालय का संचालक अलीम खान गिरफ्तार

Aryan Walia, Uttarakhand: विदेश में नौकरी दिलाने और वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये ठगने का मामला सामने आया है। ऊधम सिंह नगर पुलिस ने रुद्रपुर के आवास विकास स्थित जेड ग्लोबल कार्यालय के संचालक अलीम खान को गिरफ्तार किया है। पुलिस को आरोपी के कार्यालय से 61 पासपोर्ट, एक डायरी और अवैध पिस्टल मिली है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अमरोहा, मुरादाबाद और जसपुर के आठ युवाओं को आर्मेनिया में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 19 लाख 27 हजार 500 रुपये लिए। इनमें से सात युवा वर्तमान में आर्मेनिया में फंसे हुए हैं। उनके स्वजन ने सुरक्षित वापसी और रकम वापस दिलाने की मांग की है।

बाइक और जेवर बेचकर दिए दो लाख रुपये
एसएसपी अजय गणपति के अनुसार, रुद्रपुर कोतवाली में 29 अक्टूबर 2026 को वार्ड संख्या 21 निवासी मुजाहिद पुत्र भूरे खान ने शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि प्रीत विहार निवासी अलीम खान ने आवास विकास स्थित अपने जेड ग्लोबल कार्यालय के माध्यम से उसे दुबई में नौकरी और वर्क परमिट दिलाने का भरोसा दिया था। इस पर मुजाहिद ने अपनी बाइक और जेवर बेचकर आरोपी को दो लाख रुपये दिए। आरोप है कि उसे वर्क परमिट के बजाय विजिटर वीजा पर दुबई भेज दिया गया। वीजा में बदलाव कर उसे वर्क वीजा जैसा दिखाया गया था।

दुबई में जुर्माना भरना पड़ा, रकम मांगने पर धमकी
दुबई पहुंचने के बाद मुजाहिद को वीजा की वास्तविक स्थिति का पता चला। नौकरी और वैध कार्य अनुमति नहीं होने के कारण उसे परेशानी उठानी पड़ी और जुर्माना भी भरना पड़ा। भारत लौटने के बाद उसने आरोपी से रकम वापस मांगी। आरोप है कि अलीम ने अलग-अलग तारीखों में केवल 30 हजार रुपये लौटाए और शेष एक लाख 70 हजार रुपये देने से इनकार कर दिया। मुजाहिद ने जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है।

आर्मेनिया में नौकरी के नाम पर आठ युवाओं से वसूले रुपये
पुलिस के मुताबिक, जांच में आर्मेनिया भेजने के नाम पर ठगी का एक और मामला सामने आया। आरोपी ने अमरोहा, मुरादाबाद और जसपुर के आठ युवाओं को आर्मेनिया में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। उन्हें प्रतिमाह करीब 55 हजार रुपये वेतन और मुफ्त रहने की सुविधा देने का वादा किया गया। साथ ही एक साल तक रोजगार की जिम्मेदारी लेने की बात कही गई। इस भरोसे में आकर युवाओं ने कुल 19 लाख 27 हजार 500 रुपये दिए। सितंबर 2026 में अलग-अलग तारीखों पर सभी आठ युवा आर्मेनिया पहुंच गए।

वहां पहुंचते ही बदल गईं नौकरी और सुविधाओं की शर्तें
आरोप है कि आर्मेनिया पहुंचने के बाद युवाओं को वादे के मुताबिक नौकरी और सुविधाएं नहीं मिलीं। उन्हें 55 हजार रुपये के बजाय करीब 47 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करने का विकल्प दिया गया। रहने और खाने के लिए 13 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त खर्च बताया गया। इसके अलावा हॉस्टल और रहने के नाम पर प्रत्येक युवा से 15 हजार रुपये और लिए गए। शिकायत में यह भी आरोप है कि दो युवाओं के वीजा में एक-दूसरे की तस्वीर लगा दी गई थी। कुछ युवाओं को उनकी सहमति के बिना मीट फैक्टरी और पोर्क मीट की लोडिंग-अनलोडिंग के काम में लगा दिया गया।

युवाओं ने जब एजेंसी के प्रतिनिधियों से पहले किए गए वादों के अनुसार नौकरी और सुविधाएं देने की मांग की तो कथित तौर पर उन्हें काम करने या भारत लौट जाने का विकल्प दिया गया। अतिरिक्त वसूली गई रकम लौटाने से भी इनकार कर दिया गया। इसके बाद युवाओं के स्वजन ने पुलिस से शिकायत कर उनकी सुरक्षित वापसी और पूरी रकम वापस दिलाने की मांग की।

61 पासपोर्ट और डायरी से खुलेगा नेटवर्क का दायरा
मुजाहिद की शिकायत पर उपनिरीक्षक धीरज टम्टा के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। पुलिस ने अलीम खान (29) पुत्र जमील अहमद को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 61 पासपोर्ट, एक डायरी और अवैध पिस्टल बरामद की। आरोपी की होंडा एक्टिवा स्कूटी भी सीज कर दी गई है। मुकदमे में आयुध अधिनियम की धारा 3/25 और उत्प्रवास अधिनियम की धारा 10/24 की बढ़ोतरी की गई है।

अब पुलिस बरामद पासपोर्ट और डायरी के माध्यम से यह पता लगा रही है कि आरोपी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कितने युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा दिया। 61 पासपोर्ट की बरामदगी से जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस के सामने एक ओर विदेश में फंसे युवाओं की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कराने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर यह पता लगाना भी जरूरी है कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले की विवेचना जारी है।

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