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भूस्खलन के लिहाज से उत्तराखंड सबसे खतरनाक, इसरो की रिपोर्ट पर भी नींद में सरकार

रुद्रप्रयाग जिला देश में शीर्ष पर, दूसरे स्थान पर टिहरी, दोनों ही जिलों में वर्षाकाल में भारी नुकसान

देहरादून: विषम भौगौलिक परिस्थिति वाले उत्तराखंड में भूस्खलन की भी संभावनाएं सर्वाधिक हैं। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन (इसरो) ने भी इस बात पर मुहर लगाई है कि देश में उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग जिला सर्वाधिक संवेदनशील है, जबकि टिहरी जिला दूसरे स्थान पर है। इसरो के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से बीते फरवरी में जारी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया गया है। हैरानी की बात है कि इसरो की ओर से रिपोर्ट जारी कर आगाह किए जाने के बावजूद उत्तराखंड में संवेदनशील क्षेत्रों में कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। इसी का नतीजा है कि इस वर्षाकाल में रुद्रप्रयाग और टिहरी में भूस्खलन के कारण जान-माल का खासा नुकसान भी हुआ।

इसरो के हैदराबाद स्थित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से फरवरी 2023 में भूस्खलन एटलस आफ इंडिया में देश के 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों का भूस्खलन जोखिम को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसमें ने वर्ष 1998 और 2022 के बीच देश में हुए 80 हजार से ज्यादा भूस्खलनों का डेटाबेस बनाने के लिए इसरो के उपग्रहों से प्राप्त डाटा का उपयोग किया गया। इसके अलावा भौगोलिक परिस्थितियों और भूगर्भीय स्थिति की जानकारी भी जुटाई गई। जिसके आधार पर उत्तराखंड का रुद्रप्रयाग देशभर में पहले और टिहरी दूसरे स्थान पर है। इन दोनों जिलों में भूस्खलन का सबसे अधिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। रुद्रप्रयाग में 32 पुराने भूस्खलन क्षेत्र हैं, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग व अधिकतर संपर्क मार्ग शामिल हैं। यहां केदारनाथ धाम और तुंगनाथ जैसे धार्मिक स्थल होने के कारण यहां देश-विदेश से वर्षभर ही तीर्थयात्री आते हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड के सभी 13 जिले भूस्खलन जोखिम वाली रिपोर्ट में शामिल हैं। दुर्भाग्यवश इसरो की इस रिपोर्ट का कोई संज्ञान नहीं लिया गया। न तो वर्षाकाल से पहले भूस्खलन जोन पर बचाव कार्य या पहाड़ियों का ट्रीटमेंट किया गया और न ही अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बरती गई। ऐसे में इसी माह रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड में भूस्खलन के कारण बड़ा हादसा हुआ और कई व्यक्तियों की जान चली गई। इसके अलावा टिहरी में भी चंबा और अन्य क्षेत्रों में भूस्खलन से जान-माल का नुकसान हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने इसरो की इस रिपोर्ट पर राज्य सरकार को चेताया है। शीघ्र भविष्य के लिए यथासंभव कदम उठाने की मांग की है।

 

 

 

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