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सिलक्यारा सुरंग: ऑगर मशीन से ड्रिलिंग तेज, 32 मीटर तक पहुंचे पाइप, मंजिल करीब

सिलक्यारा पहाड़ी के ऊपर वर्टिकल ड्रिलिंग भी जल्द शुरू होने की उम्मीद

Dehradun: उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन 10वें दिन कुछ और उम्मीद बंधी है। सुरंग के मुख्य द्वार वाले हिस्से से 17 नवंबर की दोपहर से बंद पड़ी होरिजेंटल (क्षैतिज) ड्रिलिंग भी देर रात तक शुरू कर दी गई। बुधवार सुबह तक ड्रिलिंग के माध्यम से 800 एमएम के पाइप 32 मीटर तक दाखिल करा दिए गए। श्रमिकों को रेस्क्यू करने के लिए 60 मीटर तक ड्रिलिंग की जानी है। साथ ही सुरंग के ऊपरी भाग पर वर्टिकल (लंबवत) ड्रिलिंग और बड़कोट छोर से वर्टिकल और होरिजेंटल दोनों तरह की ड्रिलिंग की दिशा में भी अहम कदम बढ़ा दिए गए हैं।

सुरंग के मुख्य द्वार से होरिजेंटल ड्रिलिंग के लिए 800 एमएम व्यास के पाइप को लोड करती मशीनरी।

एनएचआइडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद के मुताबिक ऑगर मशीन में तकनीकी अड़चन के चलते सुरंग के मुख्य द्वार से होरिजेंटल ड्रिलिंग का काम 17 नवंबर की दोपहर से बंद चला आ रहा था। उस समय तक 900 एमएम व्यास के पाइपों को श्रमिकों तक पहुंचाने के लिए 22 मीटर तक की ड्रिलिंग की जा चुकी थी। श्रमिकों को अल्प समय में बाहर निकालने के लिए यही सबसे उपयुक्त विकल्प है। लिहाजा, मंगलवार सुबह एक बार फिर इसी माध्यम से ड्रिलिंग का निर्णय लिया गया।

सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने की दशा में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के परीक्षण को पहुंची महानिदेशक स्वास्थ्य डा विनीता शाह।

ड्रिलिंग से पहले अहम बदलाव यह किया गया कि सुरंग के भीतर भूस्खलन से जमा भारी मलबे के 30 मीटर से अधिक के ढेर को भेदने के लिए 800 एमएम व्यास के पाइप अधिक कारगर साबित होंगे। क्योंकि, थोड़ा कम व्यास के पाइपों को भीतर दाखल कराने में कंपन्न कम होगा और वह अधिक सरलता से दाखिल भी हो सकेंगे। उम्मीद है बुधवार दोपहर से लेकर रात तक श्रमिकों के फंसने वाले स्थान (60 मीटर) तक ड्रिलिंग पूरी कर लिए जाने की उम्मीद की जा रही है। श्रमिकों के बाहर आने की दशा में उनके स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।

वर्टिकल ड्रिलिंग के लिए सिलक्यारा पहुंची एसजेवीएन लिमिटेड की पाइप ड्राइवर मशीन।

उधर, नोडल अधिकारी डा नीरज खैरवाल के मुताबिक छह मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। सुरंग के ऊपर वर्टिकल ड्रिलिंग से रेस्क्यू सुरंग और लाइफ लाइन सुरंग तैयार करने को मशीनों को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया गया है। दोपहर तक मशीनों को स्थापित करने के लिए बेंच तैयार कर दिए गए थे, जबकि देर रात तक तीन ड्रिलिंग मशीनों को स्थापित भी किया जा चुका था।

लाइफ लाइन पाइप से श्रमिकों तक पहुंचाए फल
मंगलवार सुबह सुरंग में फंसे श्रमिकों तक छह इंच के लाइफ लाइन पाइप से विभिन्न फल भेजे गए। सूचना महानिदेशक वंशीधर तिवारी ने बताया कि लाइफ लाइन पाइप से श्रमिकों को संतरे, केले और खुबानी को पहुंचाया गया। एनएचआइडीसीएल के निदेशक अंशु मनीष खलके के मुताबिक श्रमिकों से वार्तालाप के लिए नए वाकी-टाकी भी भिजवाया गया था। साथ ही अब श्रमिकों तक पका हुआ भोजन नियमित रूप से पहुंचने लगा है।

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