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हरिद्वार रोपवे संचालन में 01 करोड़ का घपला, कंपनी के बकाये को गायब कर दिया

सूचना आयोग में पकड़ में आया हरिद्वार नगर निगम की कारगुजारी, ऊषा ब्रेको कंपनी की देनदारी में किया गया गोलमाल

Amit Bhatt, Dehradun: हरिद्वार में मनसा देवी रोपवे का संचालन करती आ रही ऊषा ब्रेको कंपनी की देनदारी में करीब 01 करोड़ रुपये का गोलमाल प्रकाश में आया है। वर्ष 2006- 07 में कंपनी पर 66.78 लाख रुपये का बकाया था, जबकि वर्ष 2007-08 में इस देनदारी की जगह 7.27 लाख रुपये का सरप्लस कंपनी के पक्ष में दर्ज कर दिया गया। साथ ही नगर निगम के अधिकारियों ने दोबारा जाने क्या जोड़-घटाव किया कि यह सरप्लस राशि बढ़कर 12.70 लाख रुपये हो गई। इस तरह की अजब-गजब गणित का रिकार्ड भी नगर निगम के पास नहीं है। यह गड़बड़झाला सूचना आयोग में की गई सुनवाई में सामने आया है। प्रकरण में राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने वरिष्ठ वित्त अधिकारी, लेखाधिकारी और कर अधीक्षक को पक्षकार बनाते हुए मांग एवं वसूली का स्प्ष्ट ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा है।

हरिद्वार के हरनाम दास की कुटिया निवासी दीपक ठाकुर ने नगर निगम हरिद्वार से रोपवे का संचालन करने वाली कंपनी ऊषा ब्रेको की देनदारी के संबंध में आरटीआई में जानकारी मांगी थी। तय समय के भीतर सूचना न मिलने पर यह प्रकरण सूचना आयोग पहुंचा। अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने ऊषा ब्रेको कंपनी की वर्ष 2005-06 से मांग एवं वसूली की पंजिका तलब की थी।

मांग एवं वसूली पंजिका के अवलोकन में यह बात सामने आई कि वर्ष 2005-06 से वर्ष 2010-11 तक रोपवे संचालन के एवज में कंपनी ने नगर निगम (पूर्व में नगर पालिका) हरिद्वार को प्रतिवर्ष 21.76 लाख रुपये के हिसाब से भुगतान करना था। वर्ष 2011-12 से वर्ष 2020-21 तक यह राशि प्रतिवर्ष 27 लाख 12 हजार 222 रुपये थी। इसके साथ ही यह बात भी सामने आई कि वर्ष 2005-06 में उस वर्ष की मांग 21.76 लाख रुपये के साथ ही कंपनी पर 74.06 लाख के पिछले बकाए के साथ कुल 95.76 लाख रुपये का बकाया था। इस राशि के सापेक्ष कंपनी ने 21.70 लाख रुपये का भुगतान किया। इस तरह पंजिका में 74.06 लाख रुपये का बकाया दर्ज कर दिया गया।

वर्ष 2006-07 में यह राशि उस वर्ष की मांग के साथ बढ़कर 95.76 लाख रुपये हो गई। इस वर्ष कंपनी ने 28.97 लाख रुपये का भुगतान किया। होना यह चाहिए था कि इस भुगतान के साथ कंपनी पर 66.78 लाख रुपये का बकाया दर्ज किया जाता। जबकि इसकी जगह कंपनी के पक्ष में 7.27 लाख रुपये का सरप्लस दर्ज कर दिया गया। यहीं से मांग एवं वसूली का गणित गड़बड़ाता चला गया। बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रही, वर्ष 2007-08 में उस वर्ष की मांग 21.70 लाख रुपये के सापेक्ष 27 लाख 12 हजार 222 रुपये का भुगतान किया गया। ऐसे में पूर्व के 7.27 लाख रुपये की सरप्लस राशि को समायोजित कर दोबारा 12.70 लाख रुपये का सरप्लस दिखाया गया।

क्या हुआ 66.78 लाख के बकाये का?
सुनवाई में राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने पूछा कि ऊषा ब्रेको कंपनी पर 66.78 लाख रुपये के बकाए का क्या हुआ। क्यों इस राशि को वर्ष 2007-08 में कंपनी पर देनदारी के रूप में दर्ज नहीं किया गया। वर्ष 2007-08 में कंपनी के पक्ष में दिखाई गई 12.70 लाख की राशि को लेकर भी स्प्ष्टता नहीं दिख रही है। सूचना आयुक्त भट्ट ने पाया कि वर्ष 2008-09 का ब्यौरा और भी आश्चर्य वाला है। इस वर्ष की मांग 21.70 लाख रुपये के साथ अवशेष 14.42 लाख रुपये दिखाया गया। इस तरह कुल बकाया राशि 36.12 लाख रुपये दर्शाई गई। जिसमें से कंपनी की ओर से 13.56 लाख रुपये का भुगतान करने के बाद 22.55 लाख रुपये का बकाया दर्ज किया गया।

योगेश भट्ट, राज्य सूचना आयुक्त (उत्तराखंड सूचना आयोग)

2009-10 में बकाया बताया 44.25 लाख रुपये
नगर निगम हरिद्वार के रिकार्ड के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2009-10 ऊषा ब्रेको कंपनी पर 44.25 लाख रुपये का बकाया दिखाया गया, लेकिन वर्ष 2011-12 में जब अवशेष दर्ज किया गया तो राशि को केवल 27.12 लाख रुपये ही दिखाया गया। उस वर्ष की मांग को मिलाकर राशि 54.24 लाख रुपये दर्ज की गई। कुल मिलाकर वर्ष 2005-06 से वर्ष 2022-23 में ऊषा ब्रेको की पंजिका में वर्ष दर वर्ष यह स्पष्ट ही नहीं किया गया कि अवशेष राशि का भुगतान कब और किस माध्यम से किया जाता रहा।

ऊषा ब्रेको कंपनी के खाते में कांट-छांट
सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने पाया कि भूमि किराए के रूप में ऊषा ब्रेको कंपनी के बकाए को लेकर संबंधित पंजिका में मनमर्जी की गई है। कंपनी की वसूली पंजिका में ओवर राइटिंग और कांट-छांट की गई है। लिहाजा, आयुक्त भट्ट ने वरिष्ठ वित्त अधिकारी, लेखाधिकारी और कर अधीक्षक को पक्षकार बनाते हुए एक सप्ताह के भीतर ऊषा ब्रेको कंपनी से मांग और वसूली का स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही लोक सूचना अधिकारी/प्रभारी सहायक नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए कि वह वर्ष 2004-05 से लेकर वर्तमान तक अपडेट की गई मांग एवं वसूली की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करें। क्योंकि, वर्तमान स्थिति बताती है कि ऊषा ब्रेको कंपनी की मांग एवं वसूली में करीब 01 करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया है।

 

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