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भिक्षा की बेड़ियों से बचपन मुक्त, हाथों में थमाई किताबें

पुलिस के ऑपरेशन मुक्ति अभियान से भिक्षावृत्ति के अभिशाप से मुक्त हो रहा बचपन, पुलिस मुख्यालय ने जारी किए आंकड़े

Amit Bhatt, Dehradun: बचपन में बचपन ही रहने देना चाहिए। बच्चों के हाथों में खिलौने अच्छे लगते हैं, किताबों का आशीष उनके सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी होता है। फिर भी पढ़े-लिखे समाज में आज भी बचपन कहीं भिक्षावृत्ति की जंजीरों में जकड़ा है, तो कहीं नन्हा जीवन कूड़े के बोझ और अत्याचार की आग में झुलस रहा है। ऐसे में उत्तराखंड पुलिस का ‘ऑपरेशन मुक्ति’ बचपन को बचाने का सराहनीय और पुण्य काम भी कर रहा है। ‘ऑपरेशन मुक्ति’ के ताजा आंकड़े कुम्ल्हाते बचपन को संजीवनी देने का सुखद उदाहरण बन रहे हैं। 01 मार्च 2024 से 31 मार्च 2024 तक पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार के निर्देश पर प्रदेशभर में चलाए गए ‘ऑपरेशन मुक्ति’ अभियान में 892 बच्चों का सत्यापन किया गया। जिनमें से अब तक बच्चों का स्कूल में दाखिला करवा दिया गया है। शेष बच्चों के दाखिले की कार्रवाई भी गतिमान है।

ऑपरेशन मुक्ति के माध्यम से खिलखिलाते बचपन की यह तस्वीर नई उम्मीद बयां करती है।

पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार के मुताबिक बच्चों से कराई जा रही भिक्षावृत्ति, बच्चों के साथ होने वाले अपराधों की रोकथाम, बच्चों के अपराध में संलिप्त होने से रोकने एवं उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किए जाने के लिए ‘ऑपरेशन मुक्ति’ अभियान दिनांक 01.03.2024 से दिनांक 31.03.2024 तक प्रदेश के समस्त जनपदों व रेलवेज में चलाया गया। समस्त जनपदों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के माध्यम से यह अभियान को चलाया गया। रेलवेज में भी एक टीम का गठन कर अभियान को गति दी गई। अभियान में अन्य संबंधित विभागों/स्वयं सेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया गया। अभियान में जनपद के मुख्य-मुख्य स्थान, जहां बच्चों द्वारा भिक्षावृत्ति की जाती है, वहां से भिक्षावृत्ति/ कूड़ा बीनने/ गुब्बारे बेचने आदि कार्यों में लिप्त बच्चों को रेस्क्यू कर उनका विद्यालयों में दाखिला कराए जाने की कार्रवाई की गई।

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी किए गए ऑपरेशन मुक्ति के आंकड़े।

इसके साथ ही स्कूल-कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों, महत्वपूर्ण चौराहों, सिनेमाघरों, बस व रेलवे स्टेशनों, धार्मिक स्थलों आदि स्थानों पर बच्चों को भिक्षा न दिए जाने के संबंध में विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाकर छात्र-छात्राओं व जनता को जागरुक किया गया । अभियान में भिक्षा मांगने/कूड़ा बीनने/ गुब्बारे बेचने आदि कार्यों में लगे कुल 892 बच्चों का सत्यापन किया गया। अब तक 378 बच्चों का विद्यालयों में दाखिला कराया जा चुका है। अन्य बच्चों के विद्यालयों में दाखिला कराए जाने की कार्रवाई प्रचलित है। अभियान के दौरान बच्चों से भिक्षावृत्ति करवाने वाला कोई गैंग प्रकाश में नहीं आया। अभियान के दौरान बाल श्रम करते पाए गए 06 बच्चों को रेस्क्यू कर नियोजकों के विरुद्ध 02 अभियोग तथा भिक्षावृत्ति पर 08 व्यक्तियों के विरुद्ध 02 अभियोग पंजीकृत किए गए।

वर्ष 2017 से 8562 बच्चों का किया गया सत्यापन
पुलिस महानिदेशक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक वर्ष 2017 से अब तक 8562 बच्चों का सत्यापन किया जा चुका है तथा 3981 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया है। बचपन को बचाने के लिए पुलिस की यह मुहिम जारी रहेगी सामाजिक-तानेबाने की बेहतरी के लिए बालजीवन को संरक्षित करना बेहद जरूरी है।

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