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धामी-पांडे की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल, बंद कमरे में हुई चर्चा पर अटकलें तेज

सभी सियासी समीकरणों को साधने में माहिर होते जा रहे सीएम धामी, हो सकता है मास्टर स्ट्रोक

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को उस समय नई चर्चाओं ने जन्म ले लिया जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के गूलरभोज स्थित आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री और विधायक के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई। मुलाकात के बाद भले ही किसी पक्ष ने चर्चा के विषयों का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके मायने तलाशे जाने लगे हैं। खासकर तब , जब सीएम धामी सभी तरह के सियासी समीकरणों को साधने में माहिर होते जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के आवास पहुंचने पर उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया गया। विधायक अरविंद पांडे की पत्नी और बेटी ने तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया, जबकि समर्थकों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के स्वागत के दौरान समर्थकों ने विधायक के समर्थन में नारेबाजी भी की।

लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच हुई मुलाकात
पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधायक अरविंद पांडे के बीच संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार होती रही हैं। दोनों नेताओं के बीच मतभेदों और दूरी की अटकलें समय-समय पर सामने आती रही थीं। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री का स्वयं विधायक के घर पहुंचना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि संगठनात्मक गतिविधियों, क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों और भविष्य की रणनीतियों सहित कई विषयों पर चर्चा हुई हो सकती है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी के संदर्भ में भी इस बैठक को अहम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रियता के बाद दिखे थे समीकरण बदलने के संकेत
भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की हालिया सक्रियता के बाद दोनों नेताओं के बीच संबंधों में सुधार की संभावनाओं को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। कुछ समय पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के उत्तराखंड दौरे के बाद विधायक अरविंद पांडे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उस मुलाकात को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया था और तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि पार्टी के भीतर समन्वय को लेकर प्रयास तेज हुए हैं।

वायरल पत्रों ने बढ़ाया था विवाद
इस बीच पिछले दिनों अरविंद पांडेय के नाम से कुछ पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिनके बाद राज्य की राजनीति में काफी हलचल देखने को मिली। वायरल पत्रों में दावा किया गया था कि पिछले चार वर्षों के दौरान उनके साथ लगातार राजनीतिक उपेक्षा और षड्यंत्र किए गए। पत्रों में यह भी आरोप लगाया गया था कि जनवरी में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के माध्यम से उनके पुत्र को धमकाने का प्रयास किया गया तथा उसके राजनीतिक और सामाजिक भविष्य को प्रभावित करने की बातें कही गईं।

इसी तरह एक अन्य दावे में कहा गया था कि उनके खिलाफ कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए और बाद में परिवार के कई सदस्यों को भी विभिन्न मामलों में शामिल किया गया। पत्रों में बुजुर्ग और अस्वस्थ परिजनों तक को कानूनी मामलों में घसीटे जाने का आरोप लगाया गया था।

व्यापारियों, मीडिया और राजनीतिक विरोधियों पर भी लगाए गए थे आरोप
वायरल दस्तावेजों में यह भी आरोप लगाया गया था कि कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की मदद से स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की गई। साथ ही कुछ व्यापारियों पर दबाव डालकर शिकायतें कराने और मीडिया के माध्यम से उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की बात भी लिखी गई थी।

एक अन्य पत्र में कुछ राजनीतिक व्यक्तियों के जरिए उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कराए जाने का दावा किया गया था। इसमें स्वयं और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए संभावित खतरे की बात भी कही गई थी तथा मामले की जांच और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

मुलाकात से निकाले जा रहे सियासी संदेश
गूलरभोज में हुई ताजा मुलाकात को भाजपा के भीतर संवाद और समन्वय के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब पिछले कुछ महीनों से दोनों नेताओं के संबंधों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं, मुख्यमंत्री का विधायक के घर पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि, बंद कमरे में हुई बातचीत के विषय सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इस मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियों और राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में इस बैठक के प्रभाव पर भी नजर रहेगी।

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