
Amit Bhatt, Dehradun: राजपुर थाना क्षेत्र स्थित Doon Defence Dreamers/Dreamers Eduhub Limited में एनडीए की कोचिंग कर रही छात्रा के गर्ल्स हॉस्टल से तीसरी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। घटना के करीब 02 सप्ताह बाद पुलिस ने पीड़िता के पिता की शिकायत पर हॉस्टल में रहने वाली चार छात्राओं के खिलाफ हत्या के प्रयास और साक्ष्यों से छेड़छाड़ समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जिन पर एफआईआर की गई है, उनमें मान्या तंवर, अनन्या, अक्षता और नंदिनी शामिल है। सभी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या के प्रयास से संबंधित आरोप) और धारा 238 (साक्ष्यों से छेड़छाड़) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
दरअसल, ग्वालियर निवासी शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी देहरादून में रहकर एनडीए प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह राजेश्वर नगर स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। परिजनों के अनुसार, 4 जून की देर रात उन्हें सूचना मिली कि दलीशा हॉस्टल की तीसरी मंजिल की बालकनी से नीचे गिर गई है। गंभीर हालत में उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 14 दिन बीत जाने के बाद भी उसे होश नहीं आया है।
परिजनों को सहेलियों की कहानी पर शक
पीड़िता के पिता का कहना है कि घटना के बाद उनकी बेटी की सहेलियों की ओर से दी जा रही जानकारी और बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। यही वजह है कि उन्हें पूरी घटना संदिग्ध प्रतीत हो रही है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जाए और घटना के समय मौजूद छात्राओं के बयान अलग-अलग और कैमरे की निगरानी में दर्ज किए जाएं।
परिजनों ने आशंका जताई है कि यह केवल हादसा नहीं भी हो सकता है। उनका कहना है कि संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि दलीशा को किसी ने धक्का दिया हो या घटना के पीछे कोई अन्य वजह हो, जिसकी जानकारी हॉस्टल में मौजूद छात्राओं को हो।
बताया जा रहा है कि नामजद सभी छात्राएं भी एनडीए की तैयारी कर रही हैं और घटना के समय हॉस्टल में मौजूद थीं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, घटनास्थल से जुड़े भौतिक साक्ष्य और छात्राओं के बयानों के आधार पर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
हादसा या साजिश? जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रा तीसरी मंजिल की बालकनी से कैसे गिरी। क्या यह महज एक दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई साजिश छिपी है? चूंकि पीड़िता अब तक बयान देने की स्थिति में नहीं है, इसलिए जांच एजेंसियों के लिए उपलब्ध साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान ही सच तक पहुंचने का सबसे बड़ा आधार होंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य इस रहस्यमयी घटना के पीछे की वास्तविक कहानी क्या उजागर करते हैं।



