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पंजाब और चंडीगढ़ के निहंगों का जत्था कर रहा उत्तराखंड कूच, सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी

आईटीबीपी के साथ ही पीएसी और स्थानीय पुलिस भी सतर्क और संभाला मोर्चा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड में निहंग सिखों के संभावित बड़े जमावड़े को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गई है। जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ और पंजाब के मोहाली क्षेत्र से 150 से अधिक निहंग सिखों के उत्तराखंड की ओर रवाना होने की सूचना मिली है। माना जा रहा है कि यह जत्था गुरुवार शाम तक राज्य की सीमा तक पहुंच सकता है।

गुरुद्वारों की व्यवस्था का जायजा लेने की तैयारी
रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में पहले से मौजूद पंजाब से आए निहंगों ने कुछ दिन पहले जानकारी दी थी कि 25 जून को उनके अन्य साथी उत्तराखंड पहुंचेंगे। कार्यक्रम के अनुसार, यह जत्था पहले चमोली और रुद्रप्रयाग क्षेत्र के गुरुद्वारों का दौरा करेगा और वहां की व्यवस्थाओं तथा हालात की समीक्षा करेगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के हेमकुंड साहिब की ओर रवाना होने की योजना बताई गई है।

निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि आने वाला दल यह जानना चाहता है कि उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले सिख श्रद्धालुओं के साथ किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह दौरा विभिन्न सिख धार्मिक संस्थाओं और पंथिक प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।

सीमाओं पर बढ़ाई गई सुरक्षा
संभावित भीड़ और संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने राज्य की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है। हिमाचल प्रदेश से लगने वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है। यहां आईटीबीपी, पीएसी और स्थानीय पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

सरकार ने दिए शांति बनाए रखने के निर्देश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार भी सक्रिय है। प्रशासनिक अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की ओर से यह भी प्रयास किए जा रहे हैं कि सिख प्रतिनिधियों, निहंग जत्थों और स्थानीय प्रशासन के बीच संवाद बना रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का सम्मान किया जाता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नगरासू में स्थानीय संगठनों का प्रदर्शन
इसी बीच रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा परिसर के बाहर उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। हालांकि, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल नहीं हुए और मौके पर सीमित संख्या में प्रदर्शनकारी मौजूद रहे।

स्वाभिमान मोर्चा के नेता त्रिभुवन चौहान ने कहा कि नगरासू विवाद को किसी समुदाय और राज्य के बीच टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह दो पक्षों के बीच पैदा हुआ विवाद था, जिसकी शुरुआत में ही निष्पक्ष जांच हो जाती तो स्थिति और बेहतर ढंग से संभाली जा सकती थी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से माहौल खराब करने की कोशिशों पर भी चिंता जताई।

सोशल मीडिया पर जारी हुआ था आह्वान
उत्तराखंड पहुंचने की घोषणा को लेकर कुछ निहंग प्रतिनिधियों के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इनमें निहंग जसदीप सिंह की ओर से जारी एक वीडियो विशेष रूप से चर्चा में रहा, जिसमें 25 जून को उत्तराखंड पहुंचने का आह्वान किया गया था। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रुद्रप्रयाग और चमोली दोनों जिलों में फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है। चमोली प्रशासन ने किसी औपचारिक सभा या बड़े आयोजन की अनुमति या पुष्टि से भी इनकार किया है।

हाल ही में मिली थीं बम धमकियां
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य को हाल के दिनों में कई धमकी भरे ई-मेल भी प्राप्त हुए थे। इनमें उत्तराखंड के विभिन्न पुलिस थानों के अलावा प्रमुख धार्मिक स्थलों और महत्वपूर्ण व्यक्तियों को निशाना बनाने की धमकियां शामिल थीं। धमकियों में केदारनाथ, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी उल्लेख किया गया था।

पुलिस के अनुसार, अलग-अलग ई-मेल आईडी से भेजे गए संदेशों की शैली और घटनाक्रम में समानता पाई गई है। इस मामले में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। एक मामला देहरादून के कोतवाली नगर थाने में जबकि दूसरा मसूरी थाने में दर्ज किया गया है।

चार दिन बाद लौटे थे पंजाब से आए निहंग
उधर, नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर एक सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आया। पंजाब से आए चार निहंग मंगलवार को गुरुद्वारे में मौजूद जत्थे से मुलाकात के बाद वापस लौट गए। इसके साथ ही गुरुद्वारे का संचालन पुनः संचालक बाबा बेअंत सिंह को सौंप दिया गया।

निहंग प्रतिनिधियों ने कहा कि गुरुद्वारे से जुड़ा विवाद प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

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