
Rajkumar Dhiman, Dehradun: नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद उत्तराखंड पहुंचने का ऐलान करने वाले निहंग सिखों के जत्थे को गुरुवार देर रात कुल्हाल बॉर्डर पर रोका गया, लेकिन ताजा घटनाक्रम में स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। बॉर्डर पर रोके गए कुछ निहंगों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी और देहरादून की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान कई निहंग तलवारें लहराते दिखाई दिए तथा तलवार से वार करने के इशारे भी किए गए। जत्थे में कुछ नकाबपोश लोगों की मौजूदगी भी देखी गई, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई।
हालांकि, मौके पर तैनात आईटीबीपी, पीएसी और उत्तराखंड पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान संयम का परिचय दिया। उग्र रूप धारण कर चुके जत्थे को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने धैर्य के साथ स्थिति को संभालने का प्रयास किया और किसी भी बड़े टकराव से बचने की कोशिश की।
पांवटा साहिब में वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा था जत्था
इससे पहले हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में प्रशासनिक अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। वार्ता विफल रहने के बाद पंजाब और चंडीगढ़ से आए निहंगों का जत्था उत्तराखंड की ओर रवाना हो गया था। प्रशासन को पहले से सूचना थी कि बड़ी संख्या में निहंग राज्य की सीमा तक पहुंच सकते हैं, जिसके चलते कूल्हाल पुल और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद से जुड़ा है मामला
पूरा घटनाक्रम रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में हुए विवाद के बाद शुरू हुआ। पंजाब से आए निहंगों के एक समूह ने गुरुद्वारे में पहुंचकर विरोध दर्ज कराया था। विवाद के बाद कुछ निहंगों ने 25 जून को बड़ी संख्या में उत्तराखंड पहुंचने का आह्वान किया था। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े कई वीडियो भी वायरल हुए थे।
निहंग प्रतिनिधियों का कहना रहा है कि वे उत्तराखंड के गुरुद्वारों और सिख श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लेने आए हैं। उनका यह भी कहना है कि वे विवाद का समाधान बातचीत से चाहते हैं और मारपीट प्रकरण में गिरफ्तार किए गए निहंगों के मामले में न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सीमाओं पर पहले से था हाई अलर्ट
निहंगों के प्रस्तावित कूच की सूचना के बाद उत्तराखंड पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियां पहले से अलर्ट पर थीं। हिमाचल प्रदेश से लगने वाली सीमाओं पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। कूल्हाल बॉर्डर के अलावा अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई थी।
धार्मिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने अधिकारियों को सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने तथा शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया था कि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाएगा, लेकिन कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
स्थानीय संगठनों ने भी जताया था विरोध
नगरासू गुरुद्वारा विवाद को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल और उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा जैसे संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। संगठनों का कहना था कि विवाद को किसी समुदाय या राज्य के बीच संघर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
फिलहाल हालात पर नजर
ताजा घटनाक्रम में बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने और तलवारें लहराने की घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। कूल्हाल बॉर्डर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन का प्रयास है कि स्थिति को संवाद और संयम के जरिए नियंत्रित रखा जाए तथा किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच संपर्क बना हुआ है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।



