राम मंदिर के बाद अब केदारनाथ-बदरीनाथ में चढ़वा चोरी का आरोप, जांच शुरू और 04 कर्मचारियों को नोटिस
बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने जारी किया नोटिस, हड़कंप मचा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर नया विवाद सामने आया है। धार्मिक संगठन भैरव सेना की शिकायत के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। समिति ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर मौजूद चार कर्मचारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। साथ ही संबंधित सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित कर लिया गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो आने के बाद बढ़ा विवाद
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए। इन वीडियो के आधार पर दानपात्रों से निकाली जाने वाली राशि की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद भैरव सेना के संस्थापक एवं अध्यक्ष संदीप खत्री ने BKTC को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया कि चढ़ावे की राशि की गिनती के दौरान कथित अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में समिति अध्यक्ष से जुड़े बताए जा रहे एक कर्मचारी सहित ड्यूटी पर मौजूद अन्य कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया।
अंदरूनी सूचना मिलने का दावा
संदीप खत्री का कहना है कि उन्हें यह जानकारी मंदिर समिति के भीतर से मिली थी। उनके अनुसार, पिछले कुछ समय से दान राशि की गिनती में गड़बड़ी की सूचनाएं मिल रही थीं। उनका दावा है कि 2 जुलाई 2026 को सीसीटीवी फुटेज में एक कर्मचारी की गतिविधियां संदिग्ध दिखाई देने के बाद उन्होंने तत्काल BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) को ज्ञापन देकर जांच की मांग की।
BKTC ने कर्मचारियों से मांगा जवाब
शिकायत मिलने के बाद मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने संबंधित कर्मचारी समेत ड्यूटी पर मौजूद चार कर्मचारियों को नोटिस जारी किया। सभी को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही 2 जुलाई की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। समिति के अनुसार फुटेज को जूम करने पर तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
जांच समिति का गठन, दोषियों पर होगी कार्रवाई
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष समिति गठित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
‘मेरा कोई निजी पीए नहीं’
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि उनका कोई निजी सचिव या निजी सहायक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी का नाम लिया जा रहा है, वह BKTC का नियमित कर्मचारी है और पहले भी तीन अलग-अलग अध्यक्षों के साथ वैयक्तिक सहायक के रूप में काम कर चुका है। किसी कर्मचारी की भूमिका की पुष्टि केवल जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
बदरीनाथ धाम के पूर्व रक्षा प्रवक्ता और तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष अमित सती ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उनके अनुसार केवल कर्मचारियों की भूमिका ही नहीं, बल्कि दान और चढ़ावे के पूरे प्रबंधन तंत्र की भी समीक्षा की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रहे।
BKTC ने बताई दान गिनने की व्यवस्था
मंदिर समिति के अनुसार दान पात्रों से राशि निकालने, उसकी गिनती करने और बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया तय नियमों के तहत होती है। इस दौरान समिति के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि और अन्य अधिकृत कर्मचारी मौजूद रहते हैं। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी निगरानी में होती है और जमा राशि का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है।
पहले भी विवादों में रही है BKTC
यह पहला अवसर नहीं है जब BKTC विवादों में आई हो। इससे पहले केदारनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगाई गई सोने की प्लेटों को लेकर विवाद, मंदिर परिसर में कथित अनधिकृत QR कोड लगाए जाने के आरोप, वीआईपी मेहमाननवाजी पर खर्च, एक पदाधिकारी द्वारा अपनी पत्नी की नियुक्ति तथा वीआईपी दर्शन व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर भी समिति सवालों के घेरे में रही है।
BKTC क्या है? जानिए अहम तथ्य
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ एंड श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट, 1939 के तहत किया गया था। इसी कानून के माध्यम से समिति को दोनों धामों के प्रशासन, प्रबंधन, धार्मिक व्यवस्थाओं और संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वर्तमान मामले की जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



