उत्तराखंड में चलती बस के दोनों पहिए निकले, यात्रियों में मची अफरा-तफरी
चालक की सूझबूझ से बची यात्रियों की जान, सामान्य रफ्तार से भी स्थिति रही नियंत्रित

Amit Bhatt, Uttarakhand: नैनीताल-काशीपुर मार्ग पर मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र के नया गांव के पास चल रही एक यात्री बस के अचानक दोनों पहिए निकल गए। अचानक आई इस स्थिति में चालक ने घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लिया और बस को नियंत्रित करते हुए सुरक्षित सड़क किनारे रोक दिया। चालक की सतर्कता के चलते बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बच गए।
नया बाईपास के पास हुआ घटनाक्रम
यह घटना नया बाईपास के समीप हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बस सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी, तभी अचानक उसके दोनों पहिए अलग हो गए। चालक ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए बस की रफ्तार नियंत्रित की और उसे सुरक्षित स्थान पर रोक दिया। घटना के बाद यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन सभी लोग सुरक्षित बस से बाहर निकल आए।
धीमी रफ्तार बनी राहत की वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस की गति अधिक नहीं थी, जिससे चालक को वाहन संभालने का पर्याप्त समय मिल गया। यदि बस तेज रफ्तार में होती तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था और बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। सूचना मिलते ही आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। घटना के कारण कुछ समय तक मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा।
तकनीकी खराबी या रखरखाव में चूक की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस के पहियों के निकलने के पीछे तकनीकी खराबी या वाहन के रखरखाव में लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। घटना के बाद बस की तकनीकी स्थिति और उसकी देखरेख को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिटनेस व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने सार्वजनिक परिवहन वाहनों की फिटनेस जांच और नियमित रखरखाव की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों की समय-समय पर तकनीकी जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। वहीं यात्रियों ने परिवहन विभाग से नियमित फिटनेस निरीक्षण और नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।
ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या जरूरी है?
-सभी यात्री बसों की समय-समय पर अनिवार्य फिटनेस जांच कराई जाए।
-पहियों, व्हील नट, एक्सल, ब्रेक और सस्पेंशन की हर ट्रिप से पहले तकनीकी जांच की जाए।
-फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बनाया जाए।
-बस मालिक नियमित मेंटेनेंस शेड्यूल का पालन करें और रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
-परिवहन विभाग द्वारा अचानक निरीक्षण (Surprise Inspection) किए जाएं।
-किसी भी तकनीकी खराबी की शिकायत मिलने पर वाहन को तुरंत संचालन से हटाया जाए।
-चालकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।
-ओवरलोडिंग और क्षमता से अधिक संचालन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
-यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों और ऑपरेटरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



