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चढ़ावा चोरी मामले में अब एफआईआर, निजी सहायक प्रमोद को बनाया आरोपी

क्या अध्यक्ष तक पहुंचेगी आंच, जांच में बहुत कुछ साफ होना अभी बाकी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली थाली भेंट में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब विभागीय जांच से आगे बढ़कर आपराधिक मुकदमे तक पहुंच गया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष कार्यालय में तैनात वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल के खिलाफ कोतवाली बदरीनाथ में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 306 और 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। समिति का आरोप है कि उन्होंने व्यक्तिगत लाभ के उद्देश्य से मंदिर की भेंट राशि को अवैध रूप से अपने कब्जे में लिया।

मंदिर समिति की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार 2 जुलाई 2026 को बदरीनाथ मंदिर में थाली भेंट की गणना चल रही थी। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि सुबह करीब 9 बजे से 9:30 बजे के बीच भेंट गणना केंद्र से मंदिर की धनराशि कथित रूप से अवैध रूप से हटाई गई। समिति ने अपनी एफआईआर में इसी अवधि का उल्लेख किया है।

चढ़ावा चोरी प्रकरण कड़ी-दर-कड़ी
घटना के बाद सोशल मीडिया पर थाली भेंट की रकम में गड़बड़ी और धनराशि निकाले जाने के आरोप तेजी से वायरल होने लगे। इसके बाद मंदिर समिति ने मामले का संज्ञान लिया और आंतरिक जांच शुरू कर दी। शिकायतकर्ता संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और मुकदमा दर्ज करने की मांग भी उठाई।

3 जुलाई को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
मामले को गंभीर मानते हुए बीकेटीसी ने 3 जुलाई को प्रमोद नौटियाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसे सीसीटीवी फुटेज, अभिलेखों और संबंधित कर्मचारियों के बयान के आधार पर जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

प्रमोद नौटियाल ने दिया अपना स्पष्टीकरण
कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद प्रमोद नौटियाल ने मंदिर समिति को अपना लिखित जवाब और स्पष्टीकरण सौंपा। जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को साजिश बताया। समिति ने उनके जवाब का परीक्षण किया और उसे जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के साथ मिलाकर देखा। हालांकि, समिति का कहना है कि प्रस्तुत स्पष्टीकरण आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं पाया गया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप प्रथम दृष्टया सही प्रतीत हुए।

तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए प्रमोद नौटियाल
जांच रिपोर्ट के आधार पर बीकेटीसी ने प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जोशीमठ स्थित मंदिर समिति कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर रोक लगाई गई और जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए गए।

अध्यक्ष के निजी सचिव होने के दावे पर सफाई
सोशल मीडिया पर प्रमोद नौटियाल को मंदिर समिति अध्यक्ष का निजी सचिव बताया जा रहा था। इस पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि प्रमोद नौटियाल उनके निजी नियुक्त कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि मंदिर समिति के नियमित कर्मचारी हैं और कई पूर्व अध्यक्षों के कार्यकाल में भी कार्य कर चुके हैं।

7 जुलाई को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश
मंदिर समिति ने कार्यालय आदेश संख्या 250/जांच/2026-27 दिनांक 7 जुलाई 2026 के माध्यम से संबंधित कर्मचारी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश जारी किए।

8 जुलाई को कोतवाली बदरीनाथ में दर्ज हुआ मुकदमा
इसके बाद बीकेटीसी के पत्र संख्या 251/जांच/2026-27 दिनांक 8 जुलाई 2026 के आधार पर कोतवाली बदरीनाथ में प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में कहा गया कि प्रारंभिक जांच में मंदिर की धनराशि को अवैध रूप से हटाए जाने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 306 और 316(5) के तहत दर्ज की गई है।

सरकार ने गठित की उच्चस्तरीय जांच समिति
मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने भी तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति की अध्यक्षता गढ़वाल आयुक्त कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान को सदस्य बनाया गया है। समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि थाली भेंट से कथित रूप से कितनी राशि निकाली गई, क्या इस मामले में कोई और व्यक्ति भी शामिल था और प्रमोद नौटियाल की कोई भूमिका है या नहीं या इस सबके पीछे कौन-कौन और कितने अहम लोग शामिल हैं। इन सवालों के जवाब पुलिस जांच, विभागीय जांच और सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेंगे।

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