
Rajkumar Dhiman, Dehradun: बचपन में पिता के साथ बड़े-बड़े अफसरों की ताकत और रुतबा देखा। सपना था खुद आईपीएस अधिकारी बनने का। कई साल तक यूपीएससी की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिली। सपना टूट गया, तो उसने कानून का रास्ता नहीं, बल्कि ठगी का रास्ता चुन लिया। खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी सेना का वरिष्ठ अफसर, कभी रॉ एजेंट तो कभी सीआरपीएफ अधिकारी बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाने लगा। आखिरकार एसएसपी देहरादून की रणनीति के तहत राजपुर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कहानी के उत्तराखंड के सबसे बड़े नौकरशाह रहे पूर्व मुख्य सचिव एस रामास्वामी के बेटे यशोवर्धन की।
गिरफ्तार आरोपी आर. यशोवर्धन (35), सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी एस. रामास्वामी का पुत्र है। वह गढ़ी कैंट स्थित ऑफिसर्स रेजिडेंशियल कॉलोनी का रहने वाला है। पुलिस ने उसके कब्जे से विभिन्न एजेंसियों के पांच फर्जी आई-कार्ड, आठ फर्जी विजिटिंग कार्ड, 25 पुलिस और सेना के लोगो, सेना/पैरामिलिट्री की तीन जोड़ी वर्दी, तीन फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया है।
पूछताछ में खुला पूरा खेल
पुलिस पूछताछ में यशोवर्धन ने बताया कि बचपन से वह अपने पिता के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहता था। अधिकारियों को मिलने वाली शक्ति, सम्मान और सुविधाओं से वह बेहद प्रभावित था। इसी कारण उसने आईपीएस अधिकारी बनने का सपना देखा और वर्षों तक यूपीएससी परीक्षा की तैयारी भी की। लेकिन बार-बार असफल होने के बाद उसने फर्जी पहचान बनाकर वही रुतबा हासिल करने की ठान ली।
इसके बाद उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां तैयार कराईं। लोगों के सामने खुद को कभी आईपीएस अधिकारी, कभी सेना का वरिष्ठ अधिकारी, कभी रॉ एजेंट और कभी सीआरपीएफ का अधिकारी बताने लगा। उसकी वर्दी, फर्जी पहचान पत्र और आत्मविश्वास से भरे बातचीत के अंदाज पर लोग आसानी से भरोसा कर लेते थे।
यशोवर्धन इसी भरोसे का फायदा उठाकर नौकरी दिलाने, रक्षा मंत्रालय और अन्य सरकारी विभागों में नियुक्ति कराने, टेंडर पास कराने तथा सरकारी काम जल्दी कराने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ठगता रहा। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह वर्षों से कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है।
15 लाख और 4.60 लाख की ठगी के दो मामले बने गिरफ्तारी की वजह
पहला मामला 8 जुलाई 2026 को सामने आया, जब डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने राजपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि यशोवर्धन ने उनकी दिवंगत मां के नाम पर कंपनी का पंजीकरण जल्द कराने का झांसा देकर 15 लाख रुपये हड़प लिए।
दूसरा मुकदमा 15 जुलाई को दर्ज हुआ। कैनाल रोड स्थित सोशल स्टेज हॉस्टल में रहने वाली डॉ. अनुषा ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताते हुए रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और 4.60 लाख रुपये ठग लिए।
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने तत्काल विशेष टीम गठित की। पुलिस ने घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तकनीकी साक्ष्य जुटाए और 16 जुलाई को मसूरी रोड स्थित सीएसआई तिराहे से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी से बरामदगी
-5 फर्जी आई-कार्ड
-8 फर्जी विजिटिंग कार्ड
-25 पुलिस/आर्मी के लोगो
-आर्मी/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दी
-3 फर्जी रिबन
-1 वायरलेस सेट
-1 लैपटॉप
पुलिस का मानना है कि आरोपी के खिलाफ और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है ताकि उसके द्वारा की गई अन्य ठगी के मामलों का भी खुलासा हो सके।



