उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर परविंदर के मामले में ईडी को राहत, दोबारा चल सकेगा केस
ड्रग्स बेचकर हजारों करोड़ रुपये की बिटकॉइन खरीदने के मामले का होगा निपटारा

Rajkumar Dhiman, Dehradun: देहरादून स्थित पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की विशेष अदालत ने हल्द्वानी निवासी परविंदर सिंह से जुड़े बहुचर्चित अंतरराष्ट्रीय बिटकॉइन और ड्रग तस्करी से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए अदालत ने आरोपी को सुनवाई का पूरा अवसर देने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मूल अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) पर दोबारा संज्ञान ले लिया है। इसके साथ ही इस बहुचर्चित मामले में नियमित ट्रायल आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
अमेरिका के आग्रह पर ईडी ने शुरू की थी जांच
ईडी के अनुसार, अमेरिका के न्याय विभाग (US Department of Justice) से म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर जुलाई 2023 में ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। एजेंसी का आरोप है कि परविंदर सिंह, उसके भाई बनमीत सिंह और अन्य लोगों ने डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी कर उससे अर्जित धन को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से छिपाने और वैध दिखाने का प्रयास किया।
जांच में ईडी का दावा है कि कथित “सिंह ऑर्गेनाइजेशन” ने डार्क वेब के माध्यम से मादक पदार्थों की बिक्री से कम से कम 8088 बिटकॉइन अर्जित किए। इन बिटकॉइन को विभिन्न क्रिप्टो वॉलेट और मिक्सिंग सर्विस के जरिए ट्रांसफर कर उनकी वास्तविक पहचान छिपाने का प्रयास किया गया।
268.22 बिटकॉइन की बरामदगी पर भी बहस
ईडी ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान परविंदर सिंह से 268.22 बिटकॉइन जब्त अथवा फ्रीज किए गए, जिनका संबंध अपराध की आय (Proceeds of Crime) से है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान बरामद डिजिटल साक्ष्य, आरोपी के बयान तथा अन्य दस्तावेज इस दावे का समर्थन करते हैं।
वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में कई तकनीकी और कानूनी आपत्तियां उठाईं। आरोपी की ओर से कहा गया कि वॉलेट में कुल 370.7 बिटकॉइन थे, जबकि ईडी ने केवल 268.22 बिटकॉइन जब्त दिखाए और शेष 102.48 बिटकॉइन का स्पष्ट विवरण नहीं दिया। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि सीएफएसएल (CFSL) की रिपोर्ट के अनुसार ईडी द्वारा प्रस्तुत “सीड फ्रेज” (Seed Phrase) से संबंधित क्रिप्टो वॉलेट का डेटा नहीं खुल सका, जिससे कथित बरामदगी और बिटकॉइन के अपराध की आय होने पर सवाल उठते हैं। आरोपी ने अपने बयानों को भी दबाव और भय के माहौल में दर्ज कराया गया बताया।
ईडी ने क्या कहा
ईडी ने अदालत से कहा कि संज्ञान लेने के चरण पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने योग्य सामग्री उपलब्ध है या नहीं। इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण या दोष-निर्दोष का निर्णय नहीं किया जाता। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बरामद बिटकॉइन, आरोपी के बयान और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों से प्राप्त दस्तावेज मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करते हैं।
अदालत ने क्या माना
विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि इस स्तर पर विस्तृत साक्ष्य परीक्षण आवश्यक नहीं है। उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त है। इसके बाद अदालत ने ईडी की अभियोजन शिकायत पर दोबारा संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
सरल भाषा में समझें फैसला
यह आदेश आरोपी को दोषी ठहराने का नहीं है। अदालत ने केवल यह माना है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर मुकदमे की सुनवाई की जा सकती है। अब ट्रायल के दौरान ईडी अपने साक्ष्य पेश करेगी, गवाहों के बयान होंगे और बचाव पक्ष को जिरह एवं अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम निर्णय ट्रायल पूरा होने के बाद ही होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया था पहला संज्ञान आदेश?
इस मामले में ईडी ने 24 जून 2024 को परविंदर सिंह के खिलाफ पीएमएलए के तहत मूल अभियोजन शिकायत विशेष अदालत में दाखिल की थी। विशेष अदालत ने 2 जुलाई 2024 को बिना आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए संज्ञान ले लिया था। बाद में इसी मामले में पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल कर बनमीत सिंह और अमरप्रीत कौर चावला को भी आरोपी बनाया गया।
इस संज्ञान आदेश को चुनौती देते हुए परविंदर सिंह ने SLP (Crl.) No. 12055/2025, Parvinder Singh vs Directorate of Enforcement के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत का 2 जुलाई 2024 का संज्ञान आदेश रद्द कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के पहले प्रावधान के अनुसार संज्ञान लेने से पहले आरोपी को प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई (Pre-Cognizance Hearing) का अवसर देना अनिवार्य है। चूंकि यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी, इसलिए पुराना संज्ञान आदेश कानून के अनुरूप नहीं माना गया।
इसके बाद 30 मई 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी WPCRL No. 567/2024 और WPCRL No. 585/2024 में इसी सिद्धांत को लागू करते हुए संबंधित संज्ञान आदेशों को निरस्त कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में विशेष अदालत ने परविंदर सिंह को धारा 223 बीएनएसएस के तहत नोटिस जारी किया, उसकी विस्तृत दलीलें सुनीं और फिर ईडी तथा बचाव पक्ष की बहस पर विचार करने के बाद दोबारा संज्ञान लिया।
स्पष्ट रूप से सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा था कि ईडी का मामला गलत है या आरोपी निर्दोष है। उसने केवल यह कहा था कि संज्ञान लेने से पहले आरोपी को सुनवाई का अवसर देना कानूनन अनिवार्य है। अब वही प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने मुकदमे को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है।
प्रकरण की पूरी पृष्ठभूमि: अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क, बिटकॉइन और ईडी की जांच
यह मामला हल्द्वानी निवासी बनमीत सिंह नरूला और उसके भाई परविंदर सिंह से जुड़े कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी एवं मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क से संबंधित है। ईडी अमेरिकी अधिकारियों के एमएलएटी (Mutual Legal Assistance Treaty) अनुरोध के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत इस मामले की जांच कर रही है।
ईडी के अनुसार दोनों भाइयों ने कथित “सिंह ड्रग ट्रैफिकिंग ऑर्गेनाइजेशन (Singh DTO)” के जरिए डार्क वेब पर “Liston” उपनाम का उपयोग करते हुए Silk Road 1, AlphaBay और Hansa जैसे प्लेटफॉर्म पर मादक पदार्थों की बिक्री की। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क ने कम से कम 8088 बिटकॉइन ड्रग तस्करी से अर्जित किए और उन्हें विभिन्न क्रिप्टो वॉलेट एवं मिक्सिंग सर्विस के जरिए छिपाने का प्रयास किया।
ईडी ने 26 अप्रैल और 1 मई 2024 को कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद परविंदर सिंह को 27 अप्रैल 2024 तथा बनमीत सिंह को 29 जुलाई 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान 268.22 बिटकॉइन, जिनकी कीमत उस समय 130 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई, जब्त या फ्रीज किए गए। इसके अलावा ईडी ने दोनों भाइयों की 9.67 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां भी कुर्क कीं।
ईडी का कहना है कि बनमीत सिंह ने अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष लगभग 3838 बिटकॉइन सरेंडर किए थे, जिनकी कीमत उस समय करीब 2,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार बनमीत सिंह अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य देशों में ड्रग्स की सप्लाई करने वाले नेटवर्क का संचालन करता था। उस पर आरोप है कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच अमेरिका के विभिन्न राज्यों में ड्रग वितरण नेटवर्क सक्रिय था। उसे अप्रैल 2019 में लंदन से गिरफ्तार किया गया, मार्च 2023 में अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया और बाद में उसने अमेरिकी अदालत में अपना अपराध स्वीकार किया। अमेरिकी अदालत ने उसे पांच वर्ष की सजा सुनाई।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि ड्रग्स खरीदने वाले ग्राहक क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान करते थे और अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा परविंदर सिंह तक पहुंचाया जाता था। वर्तमान में इस मामले के आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और भारत में उनके खिलाफ पीएमएलए के तहत मुकदमे की कार्रवाई जारी है।



