टिहरी की मणिका का पद छीना, जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने के बाद कार्रवाई
भाजयुमो नेता मणिका राणा पर कार्रवाई के बाद भाजपा की 10 अन्य नेताओं पर भी कार्रवाई की तैयारी

Rajkumar Dhiman, Dehradun: उत्तराखंड के युवाओं के जंतर-मंतर प्रदर्शन की गूंज अब भारतीय जनता पार्टी के संगठन के भीतर भी सुनाई देने लगी है। 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने आंदोलन में शामिल होने या सोशल मीडिया के जरिए उसका समर्थन करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
इसी क्रम में भाजपा ने नई टिहरी मंडल की भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) अध्यक्ष मणिका राणा को उनके पद से मुक्त कर दिया है। वहीं, पार्टी सूत्रों का दावा है कि करीब 10 अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची भी तैयार की गई है, जिन्हें जल्द कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है।
राजनीतिक जानकार इस कार्रवाई को केवल संगठनात्मक अनुशासन का मामला नहीं, बल्कि चुनाव से पहले पार्टी की एक रणनीतिक कवायद मान रहे हैं, जिसके जरिए संगठन में एकरूपता बनाए रखने और सार्वजनिक संदेश को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
प्रदर्शन में शामिल होने के बाद हुई कार्रवाई
मणिका राणा हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित उत्तराखंड के युवाओं के प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। उन्होंने प्रदर्शन स्थल का एक वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया था। वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा संगठन ने उन्हें नई टिहरी मंडल भाजयुमो अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटा दिया और उनकी जगह शुभम नेगी को नया मंडल अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।संगठन के इस फैसले को पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग सार्वजनिक गतिविधियों पर स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
अस्पताल से जारी वीडियो में लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन के बाद मणिका राणा ने दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल से एक वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए बड़ी संख्या में छात्र अस्पताल पहुंच रहे थे और कई छात्रों के सिर पर गंभीर चोटें थीं।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्र खुद अस्पताल पहुंचे, जबकि कई को एम्बुलेंस के माध्यम से लाया गया। मणिका का आरोप था कि जिस एम्बुलेंस से वे एक घायल छात्र को लेकर अस्पताल पहुंचीं, उसमें न डॉक्टर मौजूद था, न कोई अटेंडेंट और न ही प्राथमिक उपचार की पर्याप्त व्यवस्था थी।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को “बेहद क्रूर” बताते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस का यह दावा सही नहीं है कि कहीं हिंसा नहीं हुई। उनके अनुसार अस्पताल में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के घायल जवान भी भर्ती किए जा रहे थे।
मणिका ने वीडियो में कहा कि “जिन्होंने मारा, वे भी अस्पताल में थे और जिन्हें मारा गया, वे भी वहीं भर्ती थे।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्रवाई के बाद कई छात्र कनॉट प्लेस सहित दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छिपने को मजबूर हो गए थे और लगातार मदद की अपील कर रहे थे। उनके मुताबिक प्रदर्शन में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अभिभावक, गृहिणियां, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी शामिल थे। वीडियो के अंत में उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए “शर्मनाक” बताते हुए इसे “लोकतंत्र का काला दिन” करार दिया।
मणिका राणा का दावा—निष्कासन नहीं हुआ
संगठनात्मक कार्रवाई के बाद मणिका राणा ने स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है। उनका कहना है कि उन्हें केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी से पदमुक्त किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय अप्रैल में ही लिया जा चुका था और इसका जंतर-मंतर प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। मणिका के अनुसार, वह उस समय अपनी पढ़ाई और परीक्षाओं में व्यस्त थीं, इसलिए व्यक्तिगत कारणों से जिम्मेदारी से मुक्त हुई थीं। उन्होंने कहा कि वह अब भी भाजपा की सक्रिय सदस्य हैं और पार्टी नेतृत्व से लगातार संपर्क में हैं।
सोशल मीडिया गतिविधियों की भी हो रही निगरानी
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा अब उन नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान कर रही है, जिन्होंने जंतर-मंतर प्रदर्शन में भाग लिया या सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन किया। वायरल वीडियो, पोस्ट और अन्य ऑनलाइन गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है। बताया जा रहा है कि ऐसे लोगों की सूची तैयार कर संगठनात्मक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
2027 चुनाव से पहले अनुशासन पर जोर
भाजपा के अंदर माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में किसी भी तरह के असंतोष या सार्वजनिक विरोध को नियंत्रित रखना पार्टी की प्राथमिकता है। इसी वजह से अनुशासन संबंधी मामलों में सख्त रुख अपनाया जा रहा है, ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक संदेश स्पष्ट बना रहे।
कांग्रेस ने सरकार और भाजपा पर साधा निशाना
भाजपा की इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने कहा कि जब सत्तारूढ़ दल के अपने नेता और कार्यकर्ता ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं तो यह जनता और संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत है। उनका दावा है कि अपने ही नेताओं पर की जा रही कार्रवाई का राजनीतिक असर 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को झेलना पड़ सकता है।



